23 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : ईरान संकट के बीच वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। हाल ही में सोने के दाम लगभग 3% तक फिसल गए, जिससे निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है। आमतौर पर वैश्विक तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों में सोना सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) माना जाता है, लेकिन इस बार स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें लगातार गिर रही हैं और यह लगभग चार महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गई हैं। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब मध्य पूर्व में ईरान से जुड़ा संघर्ष तेज हो रहा है और वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है।
इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती आशंकाएं हैं। ईरान संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
जब महंगाई बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंक—खासतौर पर अमेरिका का फेडरल रिजर्व—ब्याज दरों को ऊंचा रखने या बढ़ाने का फैसला कर सकता है। यही वजह है कि बाजार में अब ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम हो गई है और इसके बजाय दरें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
उच्च ब्याज दरों का सीधा असर सोने पर पड़ता है। सोना एक नॉन-यील्डिंग एसेट है, यानी यह ब्याज नहीं देता। ऐसे में जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक सोने की बजाय बॉन्ड और अन्य फिक्स्ड इनकम साधनों में निवेश करना पसंद करते हैं। यही कारण है कि सोने की मांग कमजोर पड़ रही है और कीमतों में गिरावट आ रही है।
इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी सोने की कीमतों पर दबाव बना रही है। ईरान संकट के चलते निवेशक डॉलर को सुरक्षित विकल्प के रूप में देख रहे हैं, जिससे डॉलर मजबूत हुआ है। मजबूत डॉलर के कारण अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग और घट जाती है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि हाल ही में सोने की कीमतों में काफी तेजी आई थी और यह रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया था। ऐसे में अब निवेशक मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) भी कर रहे हैं, जिससे कीमतों में गिरावट और तेज हो गई है। इसके अलावा शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण कुछ निवेशक अपने नुकसान की भरपाई के लिए सोना बेच रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा स्थिति ने सोने के पारंपरिक व्यवहार को चुनौती दी है। आमतौर पर युद्ध या तनाव के समय सोना मजबूत होता है, लेकिन इस बार महंगाई और ब्याज दरों जैसे आर्थिक कारक ज्यादा प्रभावी साबित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान संकट लंबा चलता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर और गंभीर हो सकता है। ऊर्जा की कीमतें लगातार ऊंची बनी रह सकती हैं, जिससे महंगाई लंबे समय तक बनी रह सकती है। इससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ेगा और विकास दर धीमी पड़ सकती है।
कुछ अर्थशास्त्री तो यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि यह स्थिति “स्टैगफ्लेशन” (उच्च महंगाई और धीमी आर्थिक वृद्धि) का रूप ले सकती है, जो किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होती है।
आगे की बात करें तो सोने की कीमतों का भविष्य पूरी तरह से दो चीजों पर निर्भर करेगा—पहला, ईरान संकट किस दिशा में जाता है और दूसरा, केंद्रीय बैंक महंगाई को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं। अगर महंगाई बढ़ती रही और ब्याज दरें ऊंची बनी रहीं, तो सोने की कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है।
हालांकि, अगर आर्थिक मंदी के संकेत मिलते हैं या केंद्रीय बैंक नरम रुख अपनाते हैं, तो सोने में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है। यही कारण है कि निवेशकों को इस समय बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।
कुल मिलाकर, सोने की कीमतों में आई यह 3% की गिरावट यह दर्शाती है कि अब बाजार सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव से नहीं, बल्कि महंगाई, ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती जैसे व्यापक आर्थिक कारकों से भी प्रभावित हो रहा है। आने वाले समय में सोने की दिशा इन्हीं कारकों पर निर्भर करेगी।
हिंदी सारांश
ईरान संकट और बढ़ती महंगाई के कारण सोने की कीमतों में 3% गिरावट आई। ऊंची ब्याज दरों और मजबूत डॉलर ने निवेशकों की मांग को कमजोर किया।
