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23 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : ईरान संकट के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है, और इसी बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने संकेत दिया है कि वह जरूरत पड़ने पर तेल भंडार (ऑयल स्टॉक्स) की और रिलीज़ पर विचार कर रही है। IEA के प्रमुख फातिह बिरोल (Fatih Birol) ने कहा है कि सदस्य देशों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा जारी है और स्थिति के अनुसार आगे कदम उठाए जा सकते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी गिरावट आई है। अनुमान है कि करीब 11 मिलियन बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जो 1970 के दशक के तेल संकट से भी बड़ा झटका माना जा रहा है।

इस संकट का सबसे बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) का प्रभावित होना है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। इस रास्ते से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। इसके बंद होने या बाधित होने से कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा गया है।

इससे पहले IEA ने 11 मार्च 2026 को अपने इतिहास की सबसे बड़ी तेल रिलीज़ की घोषणा की थी, जिसके तहत लगभग 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में जारी किया गया। यह कदम तेल की कीमतों को नियंत्रित करने और सप्लाई शॉक को कम करने के लिए उठाया गया था।

फातिह बिरोल ने कहा कि इस बड़े कदम के बावजूद स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है और अगर जरूरत पड़ी तो आगे भी तेल भंडार जारी किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के कदम केवल अस्थायी राहत देते हैं, स्थायी समाधान नहीं होते।

उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक बाजार में तेल की पूरी तरह कमी नहीं है, बल्कि समस्या सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स में बाधा की है। यानी तेल उपलब्ध है, लेकिन उसे सही जगह तक पहुंचाने में कठिनाई हो रही है।

IEA के अनुसार, सदस्य देशों के पास अभी भी बड़ी मात्रा में तेल भंडार मौजूद है। अनुमान के मुताबिक, करीब 1.4 बिलियन बैरल से ज्यादा तेल रिजर्व में बचा हुआ है, जिसका इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर किया जा सकता है।

हालांकि, बिरोल ने यह भी कहा कि फिलहाल कोई तत्काल सामूहिक कार्रवाई (collective action) की योजना नहीं है, लेकिन “सभी विकल्प खुले हैं” और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।

ईरान संकट का असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। तेल की कीमतों में तेजी के कारण महंगाई बढ़ रही है, जिससे कई देशों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ गया है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र विशेष रूप से प्रभावित हो रहा है क्योंकि यह क्षेत्र तेल आयात पर काफी निर्भर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट लंबे समय तक चलता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका लग सकता है। कई देशों में विकास दर धीमी हो सकती है और महंगाई लंबे समय तक बनी रह सकती है।

IEA ने इस संकट से निपटने के लिए कुछ वैकल्पिक उपाय भी सुझाए हैं, जैसे ईंधन की बचत, वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देना, सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग और हवाई यात्रा को कम करना। ये उपाय अस्थायी रूप से तेल की मांग को कम करने में मदद कर सकते हैं।

इसके अलावा, G7 देशों के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है कि क्या संयुक्त रूप से और तेल भंडार जारी किया जाना चाहिए। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक स्तर पर इस संकट को गंभीरता से लिया जा रहा है और समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।

फातिह बिरोल ने यह भी जोर दिया कि इस संकट का स्थायी समाधान केवल एक ही है—स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और सामान्य तेल आपूर्ति बहाल करना। उन्होंने चेतावनी दी कि भले ही यह मार्ग तुरंत खुल जाए, तब भी वैश्विक ऊर्जा बाजार को सामान्य होने में समय लगेगा।

कुल मिलाकर, IEA की यह चेतावनी और संभावित कदम यह दर्शाते हैं कि वैश्विक ऊर्जा बाजार एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। हालांकि तेल भंडार की अतिरिक्त रिलीज़ से कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन लंबे समय के लिए स्थिरता तभी आएगी जब भू-राजनीतिक तनाव कम होगा और सप्लाई चेन सामान्य होगी।

हिंदी सारांश

ईरान संकट से तेल आपूर्ति प्रभावित होने पर IEA और तेल भंडार जारी करने पर विचार कर रहा है। प्रमुख फातिह बिरोल ने कहा कि यह कदम अस्थायी राहत देगा।

Bharat Baani Bureau

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