28 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : सरकारी स्कूलों के शिक्षक इन दिनों ड्रग जनगणना (drug census) ड्यूटी को लेकर विरोध में उतर आए हैं। विभिन्न राज्यों में शिक्षकों ने इस अतिरिक्त जिम्मेदारी को लेकर नाराजगी जताई है और इसे अपनी मूल शैक्षणिक भूमिका से भटकाने वाला कदम बताया है।
शिक्षकों का कहना है कि उनका मुख्य कार्य छात्रों को पढ़ाना और उनकी शिक्षा को बेहतर बनाना है, लेकिन उन्हें लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है। ड्रग जनगणना जैसी संवेदनशील ड्यूटी में शामिल किए जाने से उनकी चिंता और बढ़ गई है।
इस ड्यूटी के तहत शिक्षकों को घर-घर जाकर नशे से जुड़े आंकड़े जुटाने होते हैं, जिसमें लोगों से व्यक्तिगत और संवेदनशील सवाल पूछे जाते हैं। शिक्षकों का मानना है कि यह काम न केवल कठिन है, बल्कि कई बार जोखिम भरा भी हो सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां नशे का नेटवर्क मजबूत है।
शिक्षकों ने सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बिना ऐसे इलाकों में भेजा जा रहा है, जहां संभावित खतरा हो सकता है। कई शिक्षकों का यह भी कहना है कि उन्हें इस कार्य के लिए कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं दिया गया है, जिससे वे असहज महसूस करते हैं।
इसके अलावा, शिक्षकों ने काम के बढ़ते बोझ को लेकर भी चिंता जताई है। पहले से ही स्कूलों में स्टाफ की कमी है और पढ़ाई का दबाव भी अधिक है। ऐसे में अतिरिक्त ड्यूटी से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
शिक्षकों के संगठनों का कहना है कि सरकार को इस तरह के कार्यों के लिए अलग से प्रशिक्षित कर्मियों की नियुक्ति करनी चाहिए। उनका तर्क है कि शिक्षकों का समय और ऊर्जा छात्रों के विकास में लगनी चाहिए, न कि प्रशासनिक या सर्वेक्षण कार्यों में।
कुछ शिक्षकों ने यह भी बताया कि इस तरह की ड्यूटी के कारण उन्हें छुट्टियों और स्कूल समय के बाद भी काम करना पड़ता है, जिससे उनके निजी जीवन पर असर पड़ रहा है।
सरकार की ओर से हालांकि यह कहा जा रहा है कि ड्रग जनगणना समाज के लिए बेहद जरूरी है और इसमें सभी विभागों का सहयोग आवश्यक है। अधिकारियों का मानना है कि शिक्षकों की भागीदारी से सर्वेक्षण को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकता है, क्योंकि वे समाज के हर वर्ग से जुड़े होते हैं।
फिर भी, शिक्षकों का विरोध लगातार बढ़ रहा है और वे इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि इस ड्यूटी को अनिवार्य रूप से लागू किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि शिक्षकों को बार-बार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाना लंबे समय में शिक्षा प्रणाली के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे न केवल छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है, बल्कि शिक्षकों का मनोबल भी गिरता है।
कुल मिलाकर, ड्रग जनगणना ड्यूटी को लेकर सरकार और शिक्षकों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या शिक्षकों की मांगों पर कोई समाधान निकल पाता है।
सारांश:
सरकारी शिक्षक ड्रग जनगणना ड्यूटी का विरोध कर रहे हैं, कारण हैं बढ़ता काम, सुरक्षा चिंताएं और गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां, जिससे पढ़ाई और शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।
