27 अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :   एक नई वैज्ञानिक स्टडी ने चिंता बढ़ा दी है, जिसमें पाया गया है कि मानव शरीर, खासकर लिवर में जमा हो रहे Microplastics स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये बेहद छोटे प्लास्टिक कण शरीर में पहुंचकर धीरे-धीरे Liver Disease के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

Microplastics प्लास्टिक के ऐसे सूक्ष्म कण होते हैं, जो 5 मिलीमीटर से भी छोटे होते हैं और हवा, पानी तथा खाने के जरिए मानव शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में इनके शरीर के विभिन्न अंगों—जैसे खून, फेफड़ों और यहां तक कि प्लेसेंटा—में पाए जाने की खबरें सामने आ चुकी हैं।

इस नई स्टडी में शोधकर्ताओं ने लिवर टिश्यू के नमूनों का विश्लेषण किया और पाया कि उनमें माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी सामान्य से कहीं अधिक थी, खासकर उन लोगों में जो पहले से लिवर से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे थे। इससे यह संकेत मिलता है कि माइक्रोप्लास्टिक और लिवर रोगों के बीच एक संभावित संबंध हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जब ये कण लिवर में जमा होते हैं, तो वे सूजन (inflammation) पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक यह सूजन लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है और धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों का रूप ले सकती है।

लिवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो डिटॉक्सिफिकेशन, मेटाबॉलिज्म और पोषक तत्वों के प्रसंस्करण में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में यदि इसमें माइक्रोप्लास्टिक जमा होने लगें, तो यह पूरे शरीर के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

शोधकर्ताओं ने यह भी चेतावनी दी है कि माइक्रोप्लास्टिक केवल एक बाहरी प्रदूषण का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह अब एक “इनसाइड द बॉडी” समस्या बनता जा रहा है। इसका मतलब है कि पर्यावरण प्रदूषण का असर सीधे मानव शरीर के अंदर तक पहुंच चुका है।

हालांकि, वैज्ञानिकों ने यह स्पष्ट किया है कि इस संबंध को पूरी तरह समझने के लिए और अधिक रिसर्च की जरूरत है। अभी यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि माइक्रोप्लास्टिक सीधे तौर पर Liver Disease का कारण बनते हैं, लेकिन इनके संभावित प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इस स्टडी के बाद विशेषज्ञों ने लोगों को प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और सुरक्षित विकल्प अपनाने की सलाह दी है। साथ ही, सरकारों और उद्योगों से भी अपील की गई है कि वे प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाएं।

कुल मिलाकर, यह रिसर्च इस बात की चेतावनी देती है कि माइक्रोप्लास्टिक का खतरा केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

सारांश:

नई स्टडी में पाया गया कि माइक्रोप्लास्टिक लिवर में जमा होकर सूजन बढ़ा सकते हैं, जिससे लिवर रोग का खतरा बढ़ता है और यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता बन रहा है।

Bharat Baani Bureau

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