4 मई अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : फिल्म इंडस्ट्री में ‘प्रोपेगेंडा फिल्मों’ को लेकर चल रही बहस के बीच मशहूर गीतकार और लेखक Javed Akhtar ने अभिनेता Ranveer Singh की फिल्म ‘Dhurandhar’ का समर्थन किया है। उन्होंने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखते हुए कहा कि प्रोपेगेंडा फिल्मों को पूरी तरह गलत ठहराना उचित नहीं है।
हाल के दिनों में ‘Dhurandhar’ और इसके सीक्वल को लेकर सोशल मीडिया और फिल्म समीक्षकों के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। कुछ लोगों का मानना है कि फिल्म एक खास विचारधारा को बढ़ावा देती है, जबकि अन्य इसे एक मनोरंजक और प्रभावशाली सिनेमा मानते हैं।
इसी विवाद के बीच Javed Akhtar ने एक इंटरव्यू में कहा, “प्रोपेगेंडा फिल्मों में क्या गलत है? हर देश और हर दौर में ऐसी फिल्में बनी हैं। सवाल यह है कि फिल्म कितनी अच्छी तरह बनाई गई है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी फिल्म को सिर्फ उसकी विचारधारा के आधार पर खारिज करना सही नहीं है।
हालांकि, उन्होंने ‘Dhurandhar’ के पहले भाग को दूसरे भाग की तुलना में ज्यादा पसंद किया। उनके मुताबिक, पहले पार्ट में कहानी और प्रस्तुति ज्यादा प्रभावशाली थी, जबकि दूसरे भाग में वह प्रभाव थोड़ा कम नजर आया।
Ranveer Singh की इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की है और दर्शकों के बीच काफी चर्चा में रही है। फिल्म में उनके अभिनय की भी सराहना की गई है, जिसने इसे और लोकप्रिय बनाया।
फिल्म इंडस्ट्री में ‘प्रोपेगेंडा’ शब्द अक्सर विवाद का कारण बनता है। कुछ लोग इसे रचनात्मक अभिव्यक्ति का हिस्सा मानते हैं, जबकि अन्य इसे एकतरफा दृष्टिकोण को बढ़ावा देने वाला माध्यम बताते हैं।
Javed Akhtar का मानना है कि सिनेमा एक कला है, और इसमें विभिन्न विचारों और दृष्टिकोणों के लिए जगह होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दर्शकों को भी यह तय करने का अधिकार है कि वे क्या देखना चाहते हैं और क्या नहीं।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग जावेद अख्तर के विचारों से सहमत हैं, जबकि कुछ ने उनकी आलोचना भी की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बहस केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिनेमा की भूमिका और उसकी जिम्मेदारी से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है।
Ranveer Singh की ‘Dhurandhar’ ने इस बहस को और तेज कर दिया है, जिससे यह मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है।
कुल मिलाकर, Javed Akhtar का यह बयान सिनेमा और उसकी अभिव्यक्ति को लेकर चल रही बहस में एक नया दृष्टिकोण जोड़ता है, जहां उन्होंने कला की स्वतंत्रता और विविध विचारों के महत्व पर जोर दिया है।
Summary
जावेद अख्तर ने ‘धुरंधर’ का समर्थन करते हुए कहा कि प्रोपेगेंडा फिल्मों में कुछ गलत नहीं, लेकिन उन्होंने पहले भाग को दूसरे से बेहतर बताया, जिससे बहस और तेज हुई।
