17  जुलाई  2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : भारत सरकार ने Corporate Average Fuel Economy (CAFE)-III नियमों का संशोधित ड्राफ्ट पेश किया है, जिसका उद्देश्य यात्री वाहनों की ईंधन दक्षता बढ़ाना और कारों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना है। प्रस्तावित नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होने हैं और पांच साल के अगले चक्र में लागू रहेंगे।

CAFE-III में क्या नया है?

CAFE-III का मुख्य बदलाव वाहन निर्माताओं के पूरे बेड़े के औसत उत्सर्जन लक्ष्य को और कड़ा करना है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कंपनियों को अपनी सभी पात्र कारों की बिक्री के आधार पर औसत ईंधन दक्षता और CO₂ उत्सर्जन मानकों का पालन करना होगा। लक्ष्य लगभग 91.7 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर तक लाने का प्रस्ताव है।

छोटे वाहनों को मिलने वाली राहत में बदलाव

संशोधित ड्राफ्ट में छोटे वाहनों को मिलने वाली कुछ विशेष रियायतों में बदलाव किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, पहले प्रस्तावित छोटे-कार लाभ को हटाया गया है, जबकि वजन के आधार पर मिलने वाली कुछ छूट भी सीमित की गई है। इससे छोटे और बड़े वाहनों के लिए नियमों के बीच का अंतर कम हो सकता है।

हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सुपर क्रेडिट

CAFE-III में स्वच्छ तकनीक अपनाने वाले वाहनों के लिए सुपर क्रेडिट व्यवस्था में भी बदलाव प्रस्तावित है। मजबूत हाइब्रिड वाहनों का क्रेडिट 2 से घटाकर 1.6 करने का प्रस्ताव है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 3 का सुपर क्रेडिट जारी रहने की बात सामने आई है।

कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग से अनुपालन में लचीलापन

नए ढांचे में कंपनियों को अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अधिक लचीला अनुपालन तंत्र देने की दिशा में भी बदलाव प्रस्तावित हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग जैसी व्यवस्था से कंपनियां अपने प्रदर्शन के आधार पर क्रेडिट हासिल या उसका उपयोग कर सकेंगी।

कारों की कीमतों और तकनीक पर संभावित असर

CAFE-III के कारण वाहन निर्माता अधिक ईंधन-कुशल इंजन, हाइब्रिड तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों पर निवेश बढ़ा सकते हैं। इसका असर भविष्य में कारों के डिजाइन, मॉडल रणनीति और संभावित कीमतों पर पड़ सकता है।

हालांकि, कंपनियों को नियमों का पालन करने के लिए अलग-अलग तकनीकी रास्ते चुनने की छूट मिल सकती है। इसका अर्थ है कि वाहन निर्माता इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड, अधिक दक्ष पेट्रोल इंजन या अन्य तकनीकी उपायों के संयोजन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

आगे क्या होगा?

CAFE-III अभी ड्राफ्ट चरण में है और सरकार ने हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। इसलिए अंतिम नियमों में कुछ बदलाव संभव हैं। सरकार और ऑटो उद्योग के बीच कई दौर की चर्चा के बाद व्यापक सहमति बनने की दिशा में प्रगति हुई है।

Bharat Baani Bureau

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