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26 अगस्त, 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :  भारत के युवा सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और श्रीलंका के तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो के बीच दूसरे टेस्ट के पहले दिन हुआ विवाद चर्चा में बना हुआ है। दोनों खिलाड़ियों के बीच मैदान पर तीखी बहस हुई और मामला इतना बढ़ गया कि दोनों के बीच सिर टकराने जैसी स्थिति बन गई। इस घटना पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर चेतेश्वर पुजारा ने कड़ी नाराजगी जताई है।

कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के दौरान फर्नांडो ने जायसवाल को आउट करने के बाद उन्हें विदाई दी। इसके बाद जायसवाल पीछे मुड़े और श्रीलंकाई गेंदबाज से बहस करने लगे। दोनों खिलाड़ियों के बीच कुछ देर तक तीखी नोकझोंक हुई और फिर साथी खिलाड़ियों ने दोनों को अलग किया।

पुजारा ने इस घटना को क्रिकेट के मैदान पर स्वीकार्य नहीं माना। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के बीच बहस या भावनात्मक प्रतिक्रिया समझी जा सकती है, लेकिन जब स्थिति शारीरिक संपर्क तक पहुंच जाए तो यह सही नहीं है।

पुजारा के मुताबिक, खिलाड़ी मैदान पर दबाव और गुस्से का सामना करते हैं, लेकिन उन्हें अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। उनके अनुसार, किसी खिलाड़ी का निराश या नाराज होना समझ में आता है, लेकिन विवाद को शारीरिक टकराव तक नहीं पहुंचना चाहिए।

इस घटना पर पूर्व भारतीय विकेटकीपर सबा करीम ने भी जायसवाल और फर्नांडो की आलोचना की। उन्होंने कहा कि क्रिकेट संपर्क वाला खेल नहीं है और खिलाड़ियों को इस तरह के व्यवहार से बचना चाहिए। करीम ने दोनों खिलाड़ियों को खेल के राजदूत होने की जिम्मेदारी याद रखने की बात कही।

करीम ने यह भी कहा कि तेज गेंदबाज और बल्लेबाज के बीच आक्रामकता क्रिकेट का हिस्सा हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि खिलाड़ी शारीरिक टकराव तक पहुंच जाएं। उनके मुताबिक, मैदान पर आक्रामक रहते हुए भी सीमाओं का ध्यान रखना जरूरी है।

जायसवाल और फर्नांडो के बीच विवाद की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहे। दोनों खिलाड़ियों के बीच हुई इस घटना ने मैच के क्रिकेटिंग एक्शन से अलग भी काफी ध्यान खींचा।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी ICC ने भी इस मामले में कार्रवाई की। जायसवाल और फर्नांडो दोनों पर मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया और दोनों को एक-एक डिमेरिट प्वाइंट दिया गया। यह कार्रवाई ICC की आचार संहिता के लेवल-1 उल्लंघन के तहत की गई।

इस विवाद के बाद खिलाड़ियों के आचरण को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा और आक्रामकता को खेल का हिस्सा माना जाता है, लेकिन खिलाड़ियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे विरोधी के प्रति सम्मान बनाए रखें।

जायसवाल भारतीय टेस्ट टीम के महत्वपूर्ण बल्लेबाजों में शामिल हैं और उनके प्रदर्शन पर टीम की नजर रहती है। दूसरी ओर, फर्नांडो श्रीलंका के तेज गेंदबाजी आक्रमण का हिस्सा हैं। ऐसे में दोनों खिलाड़ियों के बीच विवाद ने दूसरे टेस्ट के माहौल को भी गर्म कर दिया।

पुजारा और करीम की टिप्पणियों से साफ है कि पूर्व क्रिकेटर इस तरह की घटनाओं को लेकर गंभीर हैं। उनका मानना है कि खिलाड़ियों को अपनी आक्रामकता को नियंत्रित रखना चाहिए और मैदान पर किसी भी तरह के शारीरिक संपर्क से बचना चाहिए।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज में कड़ा मुकाबला चल रहा है। दोनों टीमों के खिलाड़ी लगातार दबाव में हैं और मुकाबले में भावनाएं भी देखने को मिल रही हैं। हालांकि, पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि प्रतिस्पर्धा के बावजूद खेल भावना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

फिलहाल जायसवाल और फर्नांडो पर ICC की कार्रवाई हो चुकी है। दोनों खिलाड़ियों के लिए यह घटना एक सबक भी मानी जा सकती है कि मैदान पर तीखी प्रतिस्पर्धा के बीच भावनाओं को नियंत्रित रखना कितना जरूरी है।

Bharat Baani Bureau

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