31 अगस्त, 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : क्रॉनिक नर्व पेन यानी नसों की क्षति के कारण होने वाले लंबे समय तक बने रहने वाले दर्द के इलाज को लेकर वैज्ञानिकों ने एक नई संभावित रणनीति खोजी है। अमेरिका के University of Texas MD Anderson Cancer Center के शोधकर्ताओं ने पाया कि कैंसर से जुड़ा एक प्रोटीन BRAF नर्व इंजरी के बाद दर्द के संकेतों को बढ़ाने और बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। शोधकर्ताओं ने प्री-क्लिनिकल मॉडल में BRAF को रोकने वाली दवाओं के इस्तेमाल से दर्द की संवेदनशीलता में कमी देखी।
यह अध्ययन Science Signaling जर्नल में प्रकाशित हुआ है। रिसर्च का नेतृत्व Shao-Rui Chen और Hui-Lin Pan ने किया। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह खोज भविष्य में मौजूदा कैंसर दवाओं को न्यूरोपैथिक पेन के इलाज के लिए दोबारा इस्तेमाल करने की संभावना खोलती है, हालांकि अभी इंसानों में इसके प्रभाव और सुरक्षा की पुष्टि होना बाकी है।
BRAF और नर्व पेन के बीच कनेक्शन
न्यूरोपैथिक पेन तब हो सकता है जब नसें चोटिल या क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। यह चोट, कुछ बीमारियों या कैंसर के उपचार के बाद भी विकसित हो सकता है। इस तरह का दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है और सामान्य दर्द निवारक दवाओं से पर्याप्त राहत नहीं मिलने की स्थिति भी हो सकती है।
शोधकर्ताओं ने खास तौर पर NMDA receptors पर ध्यान दिया। ये प्रोटीन चैनल मस्तिष्क और स्पाइनल कॉर्ड में तंत्रिका कोशिकाओं के बीच संचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नर्व इंजरी के बाद NMDA receptors जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो सकते हैं, जिससे दर्द के संकेत बढ़ जाते हैं।
रिसर्च में पाया गया कि नर्व डैमेज के बाद BRAF peripheral sensory nerve cells से स्पाइनल कॉर्ड के भीतर उनके टर्मिनल तक पहुंच सकता है। वहां BRAF ऐसे molecular signals को सक्रिय करता है, जो NMDA receptor activity को बढ़ाते हैं। इससे दर्द के संकेत अधिक मजबूत हो सकते हैं।
दवाओं से दर्द की संवेदनशीलता हुई कम
शोधकर्ताओं ने प्री-क्लिनिकल मॉडल में दो दवाओं का परीक्षण किया—vemurafenib, जो BRAF inhibitor है, और selumetinib, जो MEK inhibitor है। दोनों दवाओं ने नर्व इंजरी वाले मॉडल में छूने, दबाव और गर्मी के प्रति दर्द की संवेदनशीलता कम की।
दिलचस्प बात यह रही कि जिन मॉडल में नर्व इंजरी नहीं थी, उनमें इन दवाओं ने सामान्य संवेदनशीलता को प्रभावित नहीं किया। इससे संकेत मिलता है कि यह pathway विशेष रूप से नर्व डैमेज के बाद विकसित होने वाली असामान्य pain signaling से जुड़ा हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने आनुवंशिक प्रयोगों से भी BRAF की भूमिका की जांच की। जब Braf gene को हटाया गया तो लंबे समय तक रहने वाली दर्द संवेदनशीलता कम हुई। इसके विपरीत, BRAF को सीधे सक्रिय करने पर बिना नर्व इंजरी के भी pain sensitivity बढ़ी।
इंसानों के लिए इसका क्या मतलब है?
यह खोज महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन अभी इसे क्रॉनिक नर्व पेन का साबित इलाज नहीं कहा जा सकता। शोध अभी preclinical stage में है, जिसका अर्थ है कि इसके प्रमुख निष्कर्ष प्रयोगशाला और पशु मॉडल में देखे गए हैं। इंसानों में इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा की पुष्टि के लिए clinical trials की जरूरत होगी।
शोधकर्ताओं को आगे यह पता लगाना होगा कि नर्व इंजरी के बाद BRAF peripheral nerves से spinal cord की ओर क्यों और किस प्रक्रिया से जाता है। इसके अलावा, संभावित उपचार के लिए सही dose, दवा पहुंचाने का तरीका और side effects का भी अध्ययन करना होगा।
