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3 सितंबर , 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) के नियमों को सीमित करने की दिशा में एक और कानूनी झटका लगा है। मैरीलैंड की संघीय जिला अदालत की जज डेबोरा एल. बोर्डमैन ने ट्रंप प्रशासन के नए कार्यकारी आदेश के कुछ हिस्सों को लागू करने पर प्रारंभिक रोक लगा दी है। अदालत ने अपने फैसले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की उस हालिया मिसाल का हवाला दिया, जिसके तहत अमेरिका में जन्मे बच्चों की नागरिकता के अधिकार को 14वें संविधान संशोधन के तहत संरक्षण प्राप्त है।

यह फैसला ट्रंप प्रशासन द्वारा जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने के लिए अपनाई गई नई रणनीति के खिलाफ आया है। ट्रंप ने 6 अगस्त 2026 को एक नया कार्यकारी आदेश जारी किया था, जिसका विशेष फोकस तथाकथित “बर्थ टूरिज्म” यानी अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के उद्देश्य से अमेरिका आकर बच्चे को जन्म देने की प्रथा पर था। नए आदेश में कुछ परिस्थितियों में अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को स्वतः नागरिकता दिए जाने पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

जज बोर्डमैन ने कहा कि कार्यकारी आदेश के तहत जिन बच्चों की नागरिकता को चुनौती दी जा रही है, वे मौजूदा कानून और सुप्रीम कोर्ट की स्थापित मिसालों के अनुसार अमेरिकी नागरिक माने जाते हैं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश के जरिए संविधान में दिए गए नागरिकता अधिकारों को समाप्त नहीं किया जा सकता।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जून 2026 में ट्रंप की व्यापक जन्मसिद्ध नागरिकता नीति को असंवैधानिक करार दिया था। अदालत ने माना कि अमेरिकी धरती पर जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता देने का सिद्धांत 14वें संविधान संशोधन के Citizenship Clause से जुड़ा है।

14वें संशोधन की नागरिकता संबंधी व्यवस्था के अनुसार, अमेरिका में जन्मे या प्राकृतिक रूप से नागरिक बने और अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के अधीन आने वाले लोगों को अमेरिकी नागरिकता प्राप्त होती है। यह प्रावधान लंबे समय से अमेरिकी नागरिकता व्यवस्था का आधार रहा है।

ट्रंप प्रशासन ने जारी किया था नया आदेश

ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के पहले फैसले के बाद अपनी नीति में बदलाव करते हुए नया आदेश जारी किया। प्रशासन का तर्क था कि नया आदेश पहले वाले आदेश से अलग है और इसका लक्ष्य सभी बच्चों की जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करना नहीं, बल्कि विशेष परिस्थितियों में नागरिकता के दावे को रोकना है।

नए आदेश में उन परिस्थितियों को लक्षित किया गया, जिनमें प्रशासन का आरोप है कि माता-पिता अमेरिका में बच्चे के जन्म के जरिए नागरिकता हासिल करने का प्रयास करते हैं। इसमें “बर्थ टूरिज्म” से जुड़े मामलों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया था।

प्रशासन ने अदालत से कहा कि नए आदेश को लागू करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश अभी जारी नहीं हुए हैं और इसलिए इसे चुनौती देने वाली कानूनी कार्रवाई समय से पहले है। लेकिन जज बोर्डमैन ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और प्रभावित परिवारों को तत्काल न्यायिक संरक्षण देने की आवश्यकता मानी।

इमिग्रेंट परिवारों और अधिकार समूहों की याचिका

नए आदेश को चुनौती देने वाली याचिका प्रवासी परिवारों और नागरिक अधिकार संगठनों की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से कहा कि आदेश अमेरिकी संविधान और सुप्रीम कोर्ट की स्थापित कानूनी व्याख्या के विपरीत है।

इन संगठनों का कहना था कि कार्यकारी आदेश की व्यापक और अस्पष्ट भाषा से ऐसे बच्चों के अधिकार भी प्रभावित हो सकते हैं, जो मौजूदा कानून के तहत अमेरिकी नागरिक हैं। उनका तर्क था कि प्रशासन किसी कार्यकारी आदेश के जरिए संविधान द्वारा प्रदान किए गए नागरिकता अधिकारों को सीमित नहीं कर सकता।

‘बर्थ टूरिज्म’ बना विवाद का केंद्र

जन्मसिद्ध नागरिकता पर बहस में “बर्थ टूरिज्म” एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि कुछ लोग गैर-आप्रवासी वीजा पर अमेरिका आते हैं और बच्चे को जन्म देकर उसके लिए अमेरिकी नागरिकता हासिल करने की कोशिश करते हैं।

नए आदेश में ऐसी परिस्थितियों को सीमित करने का प्रयास किया गया है। प्रशासन इसे अमेरिकी आव्रजन व्यवस्था में सुधार और नागरिकता के दुरुपयोग को रोकने की कोशिश के रूप में पेश कर रहा है।

हालांकि, प्रवासी अधिकार संगठनों का कहना है कि ऐसी नीति से उन परिवारों के बच्चों के अधिकार भी प्रभावित हो सकते हैं जिनका अमेरिका में रहना वैध है और जो मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था के तहत नागरिकता के पात्र हैं।

कानूनी लड़ाई अभी जारी रहेगी

जज बोर्डमैन का फैसला अंतिम फैसला नहीं है। अदालत ने फिलहाल प्रारंभिक रोक लगाई है, जिसका उद्देश्य मुकदमे के दौरान प्रभावित बच्चों और परिवारों को संभावित नुकसान से बचाना है। मामले की आगे की सुनवाई में नए कार्यकारी आदेश की संवैधानिक वैधता पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

इस बीच, ट्रंप प्रशासन के लिए यह फैसला एक और कानूनी चुनौती है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा व्यापक प्रयास को खारिज किए जाने के बाद प्रशासन ने नई सीमित नीति के जरिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश की थी। अब संघीय अदालत की रोक से इस नई रणनीति पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

अमेरिका में नागरिकता को लेकर बड़ी बहस

जन्मसिद्ध नागरिकता का मुद्दा अमेरिका में लंबे समय से राजनीतिक और संवैधानिक बहस का विषय रहा है। ट्रंप इसे अपनी व्यापक आव्रजन नीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखते हैं, जबकि विरोधी दल और नागरिक अधिकार संगठन इसे संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हैं।

नए अदालती फैसले से फिलहाल प्रभावित बच्चों की नागरिकता को प्रशासन द्वारा चुनौती देने की क्षमता सीमित हो गई है। हालांकि, अंतिम कानूनी स्थिति आगे की सुनवाई और संभावित अपीलों पर निर्भर करेगी।

कुल मिलाकर, मैरीलैंड की संघीय अदालत का फैसला ट्रंप प्रशासन की जन्मसिद्ध नागरिकता नीति के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। सुप्रीम कोर्ट की स्थापित मिसाल और 14वें संशोधन का हवाला देते हुए अदालत ने कार्यकारी आदेश की संवैधानिक सीमाओं पर जोर दिया है। आने वाले समय में यह मामला अमेरिकी आव्रजन नीति और जन्मसिद्ध नागरिकता के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

Bharat Baani Bureau

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