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4 सितंबर , 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) और क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC), वेल्लोर के शोधकर्ताओं ने किडनी की बीमारियों की शुरुआती पहचान और उनकी गंभीरता का आकलन करने में डॉक्टरों की मदद के लिए तीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकें विकसित की हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, इन तकनीकों का उद्देश्य बीमारी का पता लगने में होने वाली देरी को कम करना, चिकित्सकों को तेजी से और अधिक मानकीकृत जानकारी उपलब्ध कराना तथा मरीजों के लिए समय पर उपचार की योजना बनाने में सहायता करना है।

यह शोध IIT Madras के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर G.L. Samuel और रिसर्च स्कॉलर Jennifer Delighta ने CMC Vellore के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर Santosh Varughese के साथ मिलकर किया है। परियोजना को IIT Madras और SPARC पहल से संस्थागत समर्थन मिला है।

शुरुआती चरण में किडनी रोग की पहचान बड़ी चुनौती

किडनी से जुड़ी कई बीमारियां शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखातीं। इसके कारण कई मरीजों में बीमारी का पता तब चलता है जब किडनी को काफी नुकसान हो चुका होता है। यही वजह है कि शुरुआती पहचान और नियमित जांच को महत्वपूर्ण माना जाता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि AI आधारित प्रणालियां चिकित्सकों को उपलब्ध clinical और laboratory data तथा medical imaging का तेजी से विश्लेषण करने में मदद कर सकती हैं। इससे जोखिम वाले मरीजों की पहचान पहले की जा सकती है और उपचार संबंधी फैसले लेने में डॉक्टरों को अतिरिक्त सहायता मिल सकती है।

तीन अलग-अलग AI तकनीकों पर काम

IIT Madras और CMC Vellore की टीम ने तीन ऐसी तकनीकें विकसित की हैं, जो किडनी की जांच के अलग-अलग चरणों में उपयोगी हो सकती हैं।

पहली तकनीक एक machine learning model है, जो मरीज की clinical और laboratory information का इस्तेमाल करके chronic kidney disease (CKD) के जोखिम का अनुमान लगाती है। इस मॉडल को एक user-friendly prototype interface में भी लागू किया गया है, ताकि भविष्य में इसे clinical settings में इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।

दूसरी तकनीक एक deep learning-based CT scan analysis system है। यह किडनी की CT images का स्वचालित विश्लेषण कर उन्हें चार श्रेणियों में वर्गीकृत कर सकती है—normal kidney, kidney cyst, kidney stone और kidney tumour। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस system को 12,000 से अधिक CT images पर प्रशिक्षित किया गया है।

तीसरी तकनीक एक 3D imaging platform है, जो CT scans से मरीज की किडनी का त्रि-आयामी anatomical model तैयार करती है। इसके जरिए kidney tumour का volume और किडनी के कितने हिस्से में बीमारी का प्रभाव है, इसका अधिक सटीक आकलन किया जा सकता है।

डॉक्टरों को मिलेगी अधिक व्यक्तिगत जानकारी

शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन तकनीकों का एक प्रमुख फायदा यह हो सकता है कि डॉक्टरों को मरीज-विशिष्ट जानकारी अधिक तेजी से उपलब्ध हो। पारंपरिक imaging में कई measurements किए जाते हैं, लेकिन 3D reconstruction के जरिए बीमारी के फैलाव की अधिक व्यापक तस्वीर सामने आ सकती है।

IIT Madras की रिसर्च स्कॉलर Jennifer Delighta ने कहा कि शुरुआती पहचान किडनी रोगों से निपटने में बेहद महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, AI tools जोखिम वाले मरीजों की पहले पहचान करने और उपचार की बेहतर योजना बनाने में मदद कर सकते हैं।

महंगे उपचार की जरूरत कम करने की उम्मीद

किडनी रोग के उन्नत चरणों में मरीजों को महंगे और लंबे समय तक चलने वाले उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है। गंभीर मामलों में dialysis जैसी प्रक्रियाएं जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती हैं।

शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि बीमारी का पता पहले लगाया जाए और समय रहते उपचार शुरू किया जाए, तो disease progression को धीमा करने में मदद मिल सकती है और कुछ मामलों में महंगे interventions की आवश्यकता कम हो सकती है। हालांकि AI tools डॉक्टरों के निर्णय का विकल्प नहीं हैं और इनके clinical use से पहले व्यापक validation जरूरी है।

Kidney ‘Digital Twin’ की दिशा में कदम

इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू kidney Digital Twin विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ना है। Digital Twin का उद्देश्य मरीज के अंग का एक virtual, patient-specific representation तैयार करना है, जिसमें imaging और AI analysis जैसी तकनीकों को जोड़ा जा सके।

भविष्य में ऐसी प्रणाली बीमारी की निगरानी, उसके संभावित progression का आकलन और मरीज के लिए अधिक व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करने में मदद कर सकती है। हालांकि यह अभी विकास और validation के चरण में है।

बड़े datasets पर validation की तैयारी

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि इन AI models को वास्तविक स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले अधिक मरीजों के datasets पर परीक्षण और validation किया जाएगा। टीम healthcare institutions के साथ साझेदारी बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही है।

इसके अलावा भविष्य में AI technologies को wearable sensing systems के साथ जोड़ने की संभावना तलाश की जा रही है। इससे लंबे समय तक मरीज की kidney health की निगरानी और personalized healthcare को बढ़ावा मिल सकता है।

भारत में AI आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की नई संभावनाएं

IIT Madras और CMC Vellore का यह संयुक्त प्रयास भारत में medical technology और clinical expertise के बीच सहयोग की संभावनाओं को भी दर्शाता है। जहां इंजीनियरिंग और AI विशेषज्ञ data analysis तथा technology development में योगदान दे रहे हैं, वहीं nephrology विशेषज्ञ clinical requirements को दिशा देने में मदद कर रहे हैं।

यदि इन प्रणालियों का बड़े datasets पर सफलतापूर्वक validation होता है और इन्हें clinical practice में सुरक्षित एवं प्रभावी पाया जाता है, तो भविष्य में ये डॉक्टरों के लिए decision-support tools के रूप में उपयोगी साबित हो सकती हैं।

कुल मिलाकर, किडनी रोगों की अक्सर देर से होने वाली पहचान को देखते हुए IIT Madras और CMC Vellore द्वारा विकसित ये तीन AI technologies early detection, medical imaging और patient-specific assessment को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। अब इनकी वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि व्यापक clinical validation के बाद इन्हें अस्पतालों और healthcare systems में कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।

Bharat Baani Bureau

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