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9 सितंबर , 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :  पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान की 27 एयरलाइंस को प्रतिबंधित करते हुए देश के विमानन क्षेत्र पर व्यापक कार्रवाई की है। इसके साथ ही ईरानी विमानन नेटवर्क की मदद करने वाली तीसरे देशों की कई कंपनियों और एक कारोबारी को भी प्रतिबंधों के दायरे में लाया गया है।

अमेरिकी वित्त विभाग के मुताबिक, मंगलवार को कुल 36 ईरान-संबंधी लक्ष्यों पर कार्रवाई की गई। इनमें ईरान की बची हुई सक्रिय एयरलाइंस के अलावा विदेशी कंपनियां और एक व्यक्ति शामिल हैं। वाशिंगटन का आरोप है कि ईरान का वाणिज्यिक विमानन क्षेत्र सरकार और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की गतिविधियों को समर्थन देने में इस्तेमाल होता है।

अमेरिकी ट्रेजरी ने कहा कि ईरानी एयरलाइंस का इस्तेमाल कथित तौर पर हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद व ढुलाई तथा कर्मियों के परिवहन के लिए किया जाता है। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान के विमानन क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और व्यापारिक नेटवर्क से अलग करना है।

27 एयरलाइंस प्रतिबंधों के घेरे में

अमेरिका ने जिन 27 एयरलाइंस को प्रतिबंधित किया है, उनमें Iran Aseman Airlines, Iran Air Tour, Kish Airlines, Qeshm Air, Karun Airlines, Sepehran Airlines, Taban Airlines, Varesh Airlines और Zagros Airlines सहित कई प्रमुख ईरानी विमानन कंपनियां शामिल हैं।

इसके अलावा Air Shiraz, Asa Jet Airline, Atlas Aviation Group, Ava Airlines, Chabahar Airlines, Fly Kish, Fly Persia, Mehr Airways, Raimon Airways, Saha Airlines, Soroush Air और अन्य कंपनियों को भी सूची में शामिल किया गया है। अमेरिकी ट्रेजरी ने इन कंपनियों को ईरान के विमानन क्षेत्र में सक्रिय होने के आधार पर प्रतिबंधित किया है।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब पहले से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रही Mahan Air पर भी वाशिंगटन का दबाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका ने Mahan Air को 2011 में आतंकवाद विरोधी प्रतिबंधों के तहत सूचीबद्ध किया था और उस पर IRGC की Quds Force को समर्थन देने का आरोप लगाया था।

तीसरे देशों की कंपनियां भी निशाने पर

अमेरिकी कार्रवाई केवल ईरानी एयरलाइंस तक सीमित नहीं रही। ट्रेजरी विभाग ने कहा कि ईरान अमेरिकी मूल के विमानों और विमानन तकनीक तक पहुंच बनाने के लिए फ्रंट कंपनियों, विदेशी बिचौलियों और तीसरे देशों के जरिए जटिल ट्रांजिट नेटवर्क का इस्तेमाल करता है।

इसी के तहत UAE, तुर्किये, मलेशिया और कजाकिस्तान से जुड़ी कई कंपनियों पर भी कार्रवाई की गई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन कंपनियों ने Mahan Air को कार्गो सेवाएं, जनरल सेल्स एजेंट सहायता या विमान हासिल करने में मदद की थी।

अमेरिका के मुताबिक, 2026 की गर्मियों में Mahan Air को कम से कम तीन Boeing 777 विमान मिले थे। इन विमानों को संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के रास्ते ईरान तक पहुंचाया गया। ट्रेजरी का आरोप है कि इस प्रक्रिया में UAE स्थित ECT Aviation Support और तुर्किये की Sky Phoenix जैसी कंपनियों ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

उड़ानों पर भी असर पड़ सकता है

अमेरिकी ट्रेजरी के Office of Foreign Assets Control (OFAC) ने कुछ मौजूदा विमानन संबंधी अनुमतियां भी निलंबित कर दी हैं। इनमें ऐसी अनुमति शामिल थी, जिसके तहत गैर-अमेरिकी एयरलाइंस अमेरिकी मूल या अमेरिकी नियंत्रण वाले विमानों को ईरान ले जा सकती थीं।

इसके अलावा कुछ उड़ानों के ईरान के ऊपर से गुजरने और विमानन सुरक्षा से जुड़े सामान तथा सेवाओं की आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। इससे ईरान के अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क और विमानन उद्योग पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान का नागरिक विमानन क्षेत्र लंबे समय से पुराने विमानों, स्पेयर पार्ट्स की कमी और पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण मुश्किलों से जूझ रहा है। नई कार्रवाई से विमान हासिल करने, रखरखाव और अंतरराष्ट्रीय उड़ान संचालन में उसकी परेशानियां और बढ़ सकती हैं।

अमेरिका का सख्त संदेश

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने प्रतिबंधों के जरिए ईरान के विमानन क्षेत्र को समर्थन देने वाली विदेशी कंपनियों को भी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरानी एयरलाइंस के साथ कारोबार करने वाली संस्थाओं को अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से बाहर किए जाने का जोखिम रहेगा।

वाशिंगटन ने इस अभियान को “Operation Economic Outcast” का हिस्सा बताया है। अमेरिका का कहना है कि अभियान का लक्ष्य ईरानी सरकार की आर्थिक गतिविधियों, तेल निर्यात, विदेशी मुद्रा तक पहुंच और अन्य वित्तीय स्रोतों को सीमित करना है। विमानन क्षेत्र को इस रणनीति में एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

ईरान पर बढ़ता आर्थिक दबाव

नए प्रतिबंध ऐसे समय आए हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव भी चरम पर है। अमेरिकी कार्रवाई से ईरान के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार और यात्री एवं कार्गो विमानन को संचालित करना और मुश्किल हो सकता है।

प्रतिबंधों का असर केवल एयरलाइंस पर ही नहीं बल्कि विमानन से जुड़े विदेशी सेवा प्रदाताओं, कार्गो कंपनियों, विमान आपूर्तिकर्ताओं और वित्तीय संस्थानों पर भी पड़ सकता है। अमेरिकी अधिकारियों ने वित्तीय संस्थानों से ईरान के विमानन क्षेत्र से जुड़े संदिग्ध खरीद नेटवर्क पर नजर रखने को कहा है।

इस तरह की कार्रवाई से ईरान की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, इन प्रतिबंधों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरानी एयरलाइंस वैकल्पिक विमान, मार्ग और गैर-पश्चिमी सेवा प्रदाताओं तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंच बना पाती हैं।

ताजा कदम यह भी दर्शाता है कि अमेरिका ईरान पर केवल सैन्य दबाव तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि उसके आर्थिक और परिवहन नेटवर्क को भी कमजोर करने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।

Bharat Baani Bureau

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