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10 सितंबर, 2026 (भारत बानी ब्यूरो): भारत का गोल्ड लोन बाजार आने वाले वित्त वर्ष में और अधिक प्रतिस्पर्धी होने वाला है। ब्रोकरेज फर्म Jefferies के मुताबिक, नए गोल्ड लोन खिलाड़ियों द्वारा वित्त वर्ष 2027 यानी FY27 में करीब 3,700 नई शाखाएं जोड़े जाने की संभावना है। यह संख्या FY26 में जोड़ी गई लगभग 1,500 शाखाओं के मुकाबले काफी अधिक है और देश की चार प्रमुख गोल्ड लोन NBFCs के मौजूदा शाखा नेटवर्क के करीब 20 फीसदी के बराबर है।

Jefferies की रिपोर्ट “Assessing the Evolving Competitive Landscape” के अनुसार, गोल्ड लोन अब केवल पारंपरिक जरूरत के समय लिया जाने वाला कर्ज नहीं रह गया है। अधिक ग्राहक इसे नियमित क्रेडिट प्रोडक्ट के तौर पर अपना रहे हैं। इससे बाजार में नए खिलाड़ियों के प्रवेश और मौजूदा कंपनियों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ी हैं।

गोल्ड लोन बाजार तेजी से बढ़ा

Jefferies के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 तक ज्वेलरी के बदले दिए जाने वाले रिटेल गोल्ड लोन में सालाना आधार पर करीब 80 फीसदी की वृद्धि हुई और मार्च 2026 की तुलना में भी इसमें 18 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

अगर कृषि से जुड़े गोल्ड लोन को भी शामिल किया जाए तो गोल्ड-बैक्ड लोन लगभग 50 फीसदी बढ़कर ₹18.6 लाख करोड़ हो गए। यह कुल रिटेल क्रेडिट का करीब 11 फीसदी है।

बाजार के विस्तार में सोने की ऊंची कीमतों की भी बड़ी भूमिका है। जब सोने की कीमत बढ़ती है, तो परिवारों के पास मौजूद आभूषणों के बदले अधिक कर्ज लेने की क्षमता बढ़ जाती है।

गोल्ड लोन अब सिर्फ ‘जरूरत का कर्ज’ नहीं

गोल्ड लोन ग्राहकों की प्रोफाइल में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। Jefferies के अनुसार, prime और उससे ऊपर के ग्राहकों की हिस्सेदारी CY2022 में 43 फीसदी थी, जो CY2025 में बढ़कर 52 फीसदी हो गई।

इसका संकेत यह है कि गोल्ड लोन धीरे-धीरे केवल आर्थिक दबाव या आपात जरूरत के समय लिया जाने वाला कर्ज नहीं रह गया है। अपेक्षाकृत बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल वाले ग्राहक भी अब सोने को collateral के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

नए खिलाड़ियों की हिस्सेदारी बढ़ी

गोल्ड लोन बाजार में नए खिलाड़ियों की तेजी से बढ़ती मौजूदगी प्रतिस्पर्धा का सबसे बड़ा कारण बन रही है। Jefferies के मुताबिक, जुलाई 2026 तक नए खिलाड़ियों के गोल्ड लोन में सालाना आधार पर 2.5 गुना वृद्धि हुई और उनका पोर्टफोलियो करीब ₹6,190 करोड़ तक पहुंच गया।

रिटेल गोल्ड लोन में नए खिलाड़ियों की हिस्सेदारी मार्च 2025 के मुकाबले 50 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 7.6 फीसदी हो गई है।

अब इन कंपनियों का लक्ष्य केवल दक्षिण भारत तक सीमित रहने के बजाय देश के उत्तर, पश्चिम और मध्य हिस्सों में विस्तार करना है।

दक्षिण के बाहर बढ़ रही गोल्ड लोन की पहुंच

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक अभी भी भारत के गोल्ड लोन बाजार के लगभग 70 फीसदी हिस्से में योगदान करते हैं। लेकिन नई लोन उत्पत्ति में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों की भूमिका बढ़ रही है।

महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे बाजार भी नए खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य बन रहे हैं। इससे पारंपरिक गोल्ड लोन कंपनियों के सामने अपने मजबूत दक्षिण भारतीय नेटवर्क से बाहर भी प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की चुनौती पैदा हो सकती है।

Bajaj Finance की आक्रामक रणनीति

नई शाखाओं के विस्तार में Bajaj Finance प्रमुख खिलाड़ियों में दिखाई दे रही है। Jefferies का अनुमान है कि FY27 में होने वाले नए शाखा विस्तार का करीब 35 फीसदी हिस्सा Bajaj Finance से आ सकता है।

जून 2026 में कंपनी का गोल्ड लोन AUM करीब ₹2,120 करोड़ था। कंपनी लगभग 110 शाखाएं प्रति माह जोड़ने और FY27 तक गोल्ड लोन AUM को करीब ₹30,000 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

इस तरह Bajaj Finance जैसी बड़ी वित्तीय कंपनियों का विस्तार Muthoot Finance और Manappuram Finance जैसे पारंपरिक खिलाड़ियों के लिए प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकता है।

Muthoot और Manappuram के सामने चुनौती

भारत के गोल्ड लोन बाजार में Muthoot Finance और Manappuram Finance लंबे समय से प्रमुख नाम रहे हैं। इनके पास व्यापक शाखा नेटवर्क, सोने की वैल्यूएशन का अनुभव और ग्राहकों के साथ लंबे समय से बने संबंध हैं।

हालांकि नए खिलाड़ी मजबूत बैलेंस शीट, अपेक्षाकृत कम फंडिंग लागत और बड़े ग्राहक नेटवर्क का लाभ उठाकर तेजी से बाजार हिस्सेदारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे ब्याज दरों और ग्राहकों को दिए जाने वाले अन्य ऑफर्स को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

हालिया उद्योग रिपोर्टों में भी गोल्ड लोन कंपनियों पर yield pressure की संभावना जताई गई है। नए खिलाड़ी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें पेश कर सकते हैं, जिससे मौजूदा NBFCs की effective yields पर दबाव पड़ सकता है।

बैंकों की मजबूत पकड़ भी चुनौती

गोल्ड लोन बाजार में NBFCs के लिए अवसर बड़ा है, लेकिन बैंकों की मौजूदगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उद्योग के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बैंकों के पास गोल्ड लोन बाजार का करीब 75 फीसदी हिस्सा है, जबकि NBFCs की हिस्सेदारी करीब 12 फीसदी बताई गई है।

इसका मतलब यह है कि बाजार में विस्तार की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है। लेकिन जैसे-जैसे अधिक बैंक और NBFCs एक ही ग्राहक वर्ग को लक्ष्य बनाएंगे, कीमत और ग्राहक अधिग्रहण की प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

शाखाएं बढ़ाना आसान, लेकिन विशेषज्ञता चुनौती

गोल्ड लोन कारोबार में सिर्फ शाखाएं खोलना ही पर्याप्त नहीं है। सोने की शुद्धता और कीमत का सही आकलन, सुरक्षित storage, collateral management और ग्राहक सेवा जैसे पहलू इस कारोबार की सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

यही कारण है कि पारंपरिक गोल्ड लोन कंपनियां अपने वर्षों के अनुभव और ग्राहक विश्वास को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मानती हैं। उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, नए खिलाड़ियों के लिए बड़े पैमाने पर शाखा नेटवर्क, संचालन क्षमता और ग्राहक विश्वास को दोहराना समय और भारी निवेश मांग सकता है।

FY27 में बदल सकता है बाजार का समीकरण

Jefferies का 3,700 नई शाखाओं का अनुमान इस बात का संकेत है कि FY27 में गोल्ड लोन उद्योग में केवल कारोबार बढ़ने की कहानी नहीं होगी, बल्कि market-share की लड़ाई भी तेज हो सकती है।

सोने की ऊंची कीमतें, बढ़ता ग्राहक आधार और ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कर्ज की मांग इस सेक्टर के लिए अवसर पैदा कर रही है। दूसरी ओर, नए खिलाड़ियों का आक्रामक विस्तार ब्याज दरों, yields और ग्राहक retention पर दबाव डाल सकता है।

ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Muthoot Finance और Manappuram Finance जैसे स्थापित खिलाड़ी अपनी शाखाओं, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ग्राहक संबंधों का इस्तेमाल करके नए प्रतिस्पर्धियों का मुकाबला कैसे करते हैं। साथ ही Bajaj Finance और अन्य नए खिलाड़ियों की विस्तार गति यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है कि भारत के तेजी से बढ़ते गोल्ड लोन बाजार में अगला बड़ा विजेता कौन बनता है।

Bharat Baani Bureau

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