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10 सितंबर, 2026 (भारत बानी ब्यूरो): कार्ति की बहुप्रतीक्षित स्पाई-एक्शन फिल्म ‘Sardar 2’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। पहली फिल्म ‘Sardar’ की सफलता और कार्ति के दोहरे किरदार ने इस सीक्वल को लेकर उम्मीदें काफी बढ़ा दी थीं। निर्देशक पी.एस. मिथ्रन ने इस बार कहानी का दायरा बड़ा किया है, एक्शन को भव्य बनाया है और जासूसी की दुनिया को नए मिशन के साथ आगे बढ़ाया है। लेकिन शुरुआती समीक्षाओं के मुताबिक फिल्म का बढ़ा हुआ स्केल उसकी कहानी और रोमांच के स्तर में उसी अनुपात में बदलाव नहीं ला पाता।

कहानी क्या है?

‘Sardar 2’ में कार्ति एक बार फिर पिता सरदार और बेटे विजय की दोहरी भूमिका में नजर आते हैं। कहानी देश की सुरक्षा से जुड़े एक बड़े खतरे और एक खतरनाक मिशन के इर्द-गिर्द घूमती है। एजेंट वॉलरस, मिशन DOKU और जैविक युद्ध जैसे तत्व कहानी में रहस्य और खतरे का माहौल बनाने की कोशिश करते हैं।

फिल्म अतीत और वर्तमान को जोड़ते हुए यह दिखाती है कि सरदार के पुराने मिशन और विजय की वर्तमान जिंदगी किस तरह एक-दूसरे से जुड़ते हैं। फिल्म की कहानी का उद्देश्य सिर्फ एक और स्पाई मिशन दिखाना नहीं, बल्कि सरदार के अतीत और उसके अनुभवों के जरिए बेटे के किरदार को भी आगे बढ़ाना है।

कार्ति की दोहरी भूमिका मजबूत पक्ष

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत कार्ति ही हैं। दोनों किरदारों के बीच अंतर बनाए रखना आसान नहीं था, खासकर इसलिए क्योंकि इस बार पिता और बेटे को काफी समय तक एक साथ स्क्रीन पर दिखाया गया है। फिल्म के एडिटर विजय वेलुकुट्टी के अनुसार, दोनों किरदार सीक्वल में फिल्म के लगभग 50-60 प्रतिशत हिस्से में साथ दिखाई देते हैं।

कार्ति दोनों भूमिकाओं में पूरी ईमानदारी और ऊर्जा के साथ काम करते हैं। हालांकि, समस्या यह है कि कमजोर लेखन उन्हें ऐसे यादगार दृश्य कम देता है जिनसे दोनों किरदार लंबे समय तक दर्शकों के जेहन में रह सकें।

बड़ा एक्शन, लेकिन कम असर

‘Sardar 2’ का पैमाना पहले भाग से बड़ा है। अंतरराष्ट्रीय लोकेशन, बड़े एक्शन सेट पीस और जासूसी मिशन को अधिक भव्य तरीके से पेश करने की कोशिश की गई है। रिलीज से पहले फिल्म की टीम ने भी इसके बड़े स्केल और एक्शन पर जोर दिया था।

लेकिन यहीं फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी सामने आती है। कुछ एक्शन दृश्यों में भव्यता तो दिखाई देती है, मगर वे उतना रोमांच पैदा नहीं करते। विशेष रूप से कुछ हवाई और सैन्य मिशन वाले हिस्से दर्शकों से बहुत अधिक अविश्वास को स्वीकार करने की अपेक्षा करते हैं।

एक स्पाई फिल्म में अविश्वसनीय घटनाएं दिखाई जा सकती हैं, लेकिन उन्हें प्रभावी बनाने के लिए कहानी, तनाव और दृश्य प्रस्तुति का मजबूत होना जरूरी है। ‘Sardar 2’ कई जगह इस संतुलन को हासिल नहीं कर पाती।

दूसरा भाग सबसे कमजोर

फिल्म की सबसे बड़ी समस्या इसकी लंबाई और पेसिंग है। ‘Sardar 2’ का रनटाइम करीब 179 मिनट यानी लगभग 2 घंटे 59 मिनट है।

पहले हिस्से में एजेंट वॉलरस और DOKU मिशन को लेकर कुछ जिज्ञासा पैदा होती है। लेकिन दूसरे हिस्से में कहानी लगातार मिशन, पहेलियों और एक्शन सीक्वेंस के बीच घूमती रहती है। कई दृश्यों को अधिक कसकर संपादित किया जाता तो फिल्म का प्रभाव बेहतर हो सकता था।

इंडियन एक्सप्रेस की समीक्षा भी इसी ओर इशारा करती है कि सीक्वल ने पहले भाग की कमियों को दूर करने के बजाय कई जगह उन्हीं समस्याओं को बड़े पैमाने पर दोहरा दिया है।

एस.जे. सूर्या का किरदार

एस.जे. सूर्या फिल्म में प्रमुख विरोधी की भूमिका निभाते हैं। उनका प्रदर्शन ऊर्जा से भरपूर है, लेकिन किरदार का लेखन कई जगह जरूरत से ज्यादा नाटकीय हो जाता है। इससे खलनायक का डर और गंभीरता कम होने लगती है।

फिल्म में मालविका मोहनन भी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं, जबकि राजीशा विजयन, योगी बाबू और अन्य कलाकारों को अपेक्षाकृत सीमित अवसर मिले हैं। शुरुआती समीक्षाओं में भी सहायक किरदारों के पर्याप्त रूप से विकसित न होने की बात सामने आई है।

तकनीकी पक्ष

फिल्म का कैमरा वर्क और प्रोडक्शन स्केल कहानी की महत्वाकांक्षा को दर्शाते हैं। लेकिन बड़े बजट वाले स्पाई-एक्शन से जिस स्तर के विजुअल इम्पैक्ट की उम्मीद होती है, वह हर जगह नजर नहीं आता।

सैम सी.एस. का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के तनाव को बढ़ाने की कोशिश करता है, लेकिन कुछ समीक्षकों ने इसे अपेक्षाकृत पुराना और कम प्रभावशाली माना है। एडिटिंग विशेष रूप से दूसरे हिस्से में और ज्यादा सख्त हो सकती थी।

क्या फिल्म देखनी चाहिए?

अगर आपने पहली ‘Sardar’ पसंद की थी और कार्ति को एक बार फिर सरदार और विजय के रूप में देखना चाहते हैं, तो ‘Sardar 2’ में आपके लिए कुछ आकर्षक तत्व हैं। कार्ति का प्रदर्शन, बड़ा सेटअप और स्पाई-एक्शन का माहौल फिल्म को पूरी तरह असफल नहीं होने देते।

दर्शकों की शुरुआती प्रतिक्रियाएं भी पूरी तरह नकारात्मक नहीं हैं। कुछ दर्शकों ने कार्ति की एक्टिंग, एक्शन और इंटरवल ब्लॉक की तारीफ की है, जबकि दूसरे हिस्से और लंबे रनटाइम को लेकर शिकायतें सामने आई हैं।

लेकिन अगर आप ऐसी स्पाई थ्रिलर की उम्मीद कर रहे हैं जिसमें कहानी, तर्क, भावनात्मक गहराई और रोमांच बराबर मजबूती से काम करें, तो फिल्म निराश कर सकती है।

फैसला

‘Sardar 2’ बड़ी है, लेकिन पहले भाग से बेहतर नहीं। निर्देशक ने दुनिया का विस्तार किया है, मिशन को बड़ा बनाया है और एक्शन का स्तर बढ़ाया है, लेकिन कहानी की मजबूती और निष्पादन उस महत्वाकांक्षा का साथ नहीं दे पाते।

कार्ति पूरी ईमानदारी से फिल्म को संभालने की कोशिश करते हैं, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले, लंबा दूसरा भाग और कुछ अविश्वसनीय एक्शन सीक्वेंस फिल्म के असर को कम कर देते हैं। पहली फिल्म की नवीनता और मनोरंजन जिस तरह दर्शकों को जोड़ता था, उसका प्रभाव सीक्वल में उतनी मजबूती से दिखाई नहीं देता।

Bharat Baani Bureau

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