15 सितंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो)। दुनिया से खसरा (Measles) को पूरी तरह खत्म करने की कोशिशों के सामने वैक्सीन को लेकर बढ़ती हिचकिचाहट एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने कहा है कि विशेष रूप से कुछ समृद्ध देशों में टीकाकरण के प्रति संदेह और गलत सूचनाओं के कारण खसरे का उन्मूलन मुश्किल हो रहा है।
खसरा बेहद संक्रामक बीमारी है और इसे रोकने के लिए समुदाय में बहुत ऊंचे स्तर का टीकाकरण कवरेज जरूरी है। WHO के अनुसार, जब टीकाकरण कवरेज में छोटी-सी भी कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो वायरस को दोबारा फैलने का अवसर मिल सकता है।
वैक्सीन से रोकी जा सकती है बीमारी
खसरा ऐसी बीमारी है जिसे प्रभावी टीकाकरण के जरिए लगभग पूरी तरह रोका जा सकता है। WHO के अनुसार, दो खुराक वाली measles-containing vaccine खसरे से मजबूत सुरक्षा प्रदान करती है।
समस्या तब पैदा होती है जब किसी समुदाय में बड़ी संख्या में बच्चे समय पर टीका नहीं लगवा पाते। ऐसे में बीमारी के एक मामले से संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
WHO और उसके साझेदार संगठन लगातार देशों से नियमित टीकाकरण कार्यक्रम मजबूत करने और छूटे हुए बच्चों तक पहुंचने की अपील करते रहे हैं।
अमीर देशों में भी बढ़ी चिंता
आम धारणा के विपरीत, खसरे का खतरा केवल कम आय वाले देशों तक सीमित नहीं है। कई उच्च आय वाले देशों में भी टीकाकरण कवरेज में कमी और वैक्सीन को लेकर संदेह के कारण संक्रमण के मामले सामने आते रहे हैं।
डॉ. टेड्रोस ने पहले भी चेतावनी दी है कि गलत सूचना और वैक्सीन के प्रति अविश्वास सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। सोशल मीडिया पर बिना वैज्ञानिक आधार वाली सूचनाओं के तेजी से प्रसार ने इस चुनौती को और जटिल बना दिया है।
हालांकि वैक्सीन हिचकिचाहट को खसरे के सभी मामलों का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता। युद्ध, विस्थापन, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की कमी और नियमित टीकाकरण में व्यवधान भी कम कवरेज के महत्वपूर्ण कारण हैं।
95 फीसदी से अधिक कवरेज जरूरी
खसरे के संक्रमण की श्रृंखला को रोकने के लिए विशेषज्ञ आम तौर पर आबादी के कम से कम 95 प्रतिशत हिस्से को दो खुराक का टीका देने की जरूरत पर जोर देते हैं।
यह लक्ष्य केवल राष्ट्रीय औसत हासिल करने से पूरा नहीं होता। किसी देश का औसत कवरेज 95 प्रतिशत होने के बावजूद यदि कुछ क्षेत्रों या समुदायों में टीकाकरण दर काफी कम है, तो वहां संक्रमण का प्रकोप हो सकता है।
इसीलिए स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए टीकाकरण में मौजूद स्थानीय अंतर की पहचान करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
खसरा मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है और कुछ मामलों में गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है। निमोनिया, मस्तिष्क में सूजन और गंभीर निर्जलीकरण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुपोषित बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में जोखिम अधिक हो सकता है।
WHO के अनुसार, खसरे के खिलाफ टीकाकरण ने पिछले दशकों में लाखों जानें बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके बावजूद दुनिया के कई हिस्सों में नियमित टीकाकरण से छूटे बच्चों की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है।
गलत सूचनाओं से निपटना जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल वैक्सीन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। लोगों में टीकाकरण को लेकर भरोसा कायम करना भी जरूरी है।
सरकारों और स्वास्थ्य संगठनों को माता-पिता के सवालों का वैज्ञानिक आधार पर जवाब देना, वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावशीलता के बारे में पारदर्शी जानकारी देना तथा सोशल मीडिया पर फैलने वाली गलत सूचनाओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला करना होगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, डॉक्टरों और स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे परिवारों के साथ सीधे संपर्क में रहते हैं और वैक्सीन से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में मदद कर सकते हैं।
खसरा उन्मूलन के लिए वैश्विक प्रयास जारी
दुनिया में खसरे को खत्म करने का लक्ष्य हासिल करना कठिन जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। इसके लिए उच्च और समान टीकाकरण कवरेज, मजबूत निगरानी व्यवस्था और प्रकोप की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया जरूरी है।
WHO का कहना है कि खसरे के खिलाफ लड़ाई में किसी भी देश की सफलता दूसरे देशों की सुरक्षा से जुड़ी है, क्योंकि वायरस सीमाओं को नहीं मानता। इसलिए अमीर देशों समेत सभी देशों में टीकाकरण कार्यक्रमों को मजबूत करना जरूरी है।
डॉ. टेड्रोस की टिप्पणी इसी व्यापक चुनौती की ओर इशारा करती है—जब एक अत्यधिक संक्रामक और वैक्सीन से रोकी जा सकने वाली बीमारी के खिलाफ सुरक्षा में थोड़ी भी कमी आती है, तो उसका असर पूरे समुदाय पर पड़ सकता है।
