29 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): पंजाब में 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले धान खरीद सीजन से पहले राज्य सरकार को बड़ी वित्तीय सुविधा मिली है। अक्टूबर महीने के लिए पंजाब को 42,786.68 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट (CCL) मंजूर की गई है। राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक ने कहा कि इस CCL से किसानों से खरीदे जाने वाले धान का भुगतान तेजी से और बिना बाधा के करने में मदद मिलेगी।
धान खरीद पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर साल लाखों किसान अपनी फसल सरकारी खरीद केंद्रों और मंडियों में लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में खरीद प्रक्रिया के दौरान समय पर भुगतान, पर्याप्त बारदाना, मंडियों में बुनियादी सुविधाएं और फसल की सुचारू उठान प्रमुख चुनौतियां रहती हैं।
1 अक्टूबर से शुरू होगी धान की खरीद
राज्य में 2026-27 खरीफ सीजन के लिए धान की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली है। सरकार ने इस सीजन में लगभग 180 लाख मीट्रिक टन (LMT) धान की खरीद का लक्ष्य रखा है।
मंत्री लाल चंद कटारूचक के अनुसार, राज्य सरकार किसानों की पूरी उपज की खरीद सुनिश्चित करने के लिए तैयारियां कर रही है। उन्होंने कहा कि खरीद व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को मंडियों में अपनी फसल बेचने के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करने देना है।
CCL से किसानों को समय पर भुगतान में मदद
कैश क्रेडिट लिमिट का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदे गए धान के भुगतान के लिए किया जाएगा। सरकार के अनुसार, 42,786.68 करोड़ रुपये की CCL उपलब्ध होने से खरीद के बाद किसानों को भुगतान प्रक्रिया में वित्तीय बाधा नहीं आएगी।
धान की सरकारी खरीद में बड़ी मात्रा में धनराशि की जरूरत होती है। खरीद सीजन के दौरान रोजाना बड़ी संख्या में किसान मंडियों में फसल लेकर पहुंचते हैं और खरीद एजेंसियों को भुगतान की प्रक्रिया लगातार जारी रखनी पड़ती है। ऐसे में पर्याप्त कार्यशील वित्तीय व्यवस्था खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने में मदद करती है।
2,461 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद
राज्य सरकार के अनुसार, 2026-27 सीजन के दौरान धान की खरीद 2,461 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी। सरकार ने किसानों को उनकी फसल के लिए निर्धारित समर्थन मूल्य के अनुसार भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही है।
धान खरीद का लक्ष्य बड़ा होने के कारण सरकार और खरीद एजेंसियों के सामने मंडियों में पर्याप्त व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की चुनौती भी रहेगी। इसी को देखते हुए खरीद से पहले विभिन्न स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं।
5 लाख बारदाना भी पहुंचा
खरीद व्यवस्था के तहत विभाग को 5 लाख बारदाना भी प्राप्त हो चुका है। इसका इस्तेमाल किसानों द्वारा मंडियों में लाई जाने वाली धान की फसल की पैकिंग के लिए किया जाएगा।
बारदाने की उपलब्धता धान खरीद प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। पर्याप्त बारदाना नहीं होने पर मंडियों में फसल के भंडारण और पैकिंग में परेशानी पैदा हो सकती है। इसलिए खरीद शुरू होने से पहले इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
1,887 मंडियां अधिसूचित
सरकार ने धान खरीद के लिए अब तक 1,887 मंडियों को अधिसूचित किया है। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त मंडियों को भी खरीद प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।
इन मंडियों में किसानों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। विभाग के अनुसार, धान उतारने और पैकिंग से जुड़े श्रमिकों के लिए स्वच्छ पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था भी की जा रही है।
पंजाब की मंडियों में बाहरी धान रोकने के निर्देश
खाद्य मंत्री लाल चंद कटारूचक ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि पंजाब की मंडियों में दूसरे राज्यों से आने वाला धान सरकारी खरीद व्यवस्था को प्रभावित न करे। विभाग के जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों (DFSCs) को इस संबंध में निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का कहना है कि राज्य में पैदा हुए धान की खरीद को प्राथमिकता दी जाएगी और मंडियों में बाहरी राज्यों से आने वाले धान की बिक्री को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी।
किसानों, आढ़तियों और मजदूरों के हित पर जोर
धान खरीद व्यवस्था केवल किसानों तक सीमित नहीं है। मंडियों में आढ़ती, मजदूर, ट्रांसपोर्टर और खरीद एजेंसियां भी पूरी प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य खरीद नेटवर्क से जुड़े सभी हितधारकों के हितों की रक्षा करना है।
मंडियों में धान की आवक बढ़ने के साथ श्रमिकों पर भी काम का दबाव बढ़ता है। ऐसे में पेयजल, चिकित्सा सुविधा और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर विभागों को तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मंडियों का दौरा कर व्यवस्था की समीक्षा करेंगे मंत्री
लाल चंद कटारूचक ने कहा है कि वह स्वयं विभिन्न मंडियों का दौरा कर खरीद व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। इसका उद्देश्य खरीद प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाली समस्याओं की मौके पर पहचान करना और उनका समाधान सुनिश्चित करना है।
धान खरीद सीजन के शुरू होने से पहले 42,786.68 करोड़ रुपये की CCL से राज्य की खरीद व्यवस्था को वित्तीय आधार मिला है। अब सरकार के सामने चुनौती यह सुनिश्चित करने की होगी कि मंडियों में फसल की आवक, खरीद, भुगतान, बारदाने की उपलब्धता और उठान का काम निर्धारित समय के अनुसार चलता रहे।
1 अक्टूबर से शुरू होने वाले खरीद सीजन के दौरान किसानों के लिए समय पर भुगतान और सुचारू खरीद व्यवस्था प्रमुख मुद्दे होंगे। सरकार की तैयारियों और मंडियों में वास्तविक स्थिति पर अब किसानों और कृषि क्षेत्र की नजर रहेगी।
