30 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): अमेरिका जाने के लिए घर से निकले गुजरात के मेहसाणा जिले के तीन रिश्तेदार इथियोपिया पहुंचने के बाद रहस्यमय तरीके से लापता हो गए हैं। परिवार का दावा है कि उन्हें कथित तौर पर अगवा किया गया है और एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर उनकी रिहाई के बदले 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यात्रा एजेंटों की भूमिका समेत कई पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
लापता लोगों की पहचान 30 वर्षीय ममता चावड़ा, 23 वर्षीय रित्विक जंसारी और 27 वर्षीय मयूरी सोलंकी के रूप में हुई है। तीनों गुजरात के मेहसाणा जिले से हैं और रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। परिवार के अनुसार, वे अमेरिका पहुंचने के लिए एजेंटों के संपर्क में थे और 20 सितंबर को अपनी यात्रा पर रवाना हुए थे।
जयपुर से अबू धाबी और फिर इथियोपिया पहुंचे
रिपोर्टों के मुताबिक, तीनों को सबसे पहले गुजरात के गोजारिया से जयपुर ले जाया गया। इसके बाद उन्होंने एतिहाद एयरवेज से अबू धाबी की यात्रा की और वहां से इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा पहुंचे।
इथियोपिया में तीनों एक स्थान पर ठहरे थे। रिपोर्ट के अनुसार, उनके पास एक महीने के ई-वीजा थे। परिवार को शुरुआत में लगा कि उनकी यात्रा योजना के मुताबिक आगे बढ़ रही है। लेकिन कुछ ही समय बाद उनसे संपर्क टूट गया।
22 सितंबर के बाद बंद हो गए फोन
परिवार के अनुसार, 22 सितंबर को ममता ने फोन करके बताया था कि वे सुरक्षित हैं और कनाडा पहुंच गए हैं। हालांकि, इस बातचीत के बाद तीनों के मोबाइल फोन बंद हो गए और उनसे संपर्क नहीं हो सका।
इसके कुछ दिनों बाद परिवार को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। उसने कथित तौर पर खुद को ‘खान’ बताया और दावा किया कि तीनों को अगवा कर लिया गया है। फोन करने वाले ने उनकी रिहाई के लिए 1 करोड़ रुपये की मांग की। परिवार के लिए यह स्थिति और गंभीर हो गई क्योंकि अमेरिका भेजने के लिए वे पहले ही एजेंटों को बड़ी रकम दे चुके थे।
एजेंटों को दिए गए थे लाखों रुपये
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, तीनों को अमेरिका पहुंचाने के लिए प्रति व्यक्ति लगभग 75 लाख रुपये की राशि तय होने की बात सामने आई है। परिवार की ओर से अब तक करीब 70 लाख रुपये अग्रिम दिए जाने का दावा किया गया है।
इस मामले में एजेंटों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। स्थानीय एजेंट अल्पेश पंचाल ने कथित तौर पर परिवार को दूसरे एजेंट से जोड़ा था। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तीनों वास्तव में इथियोपिया से आगे कहां गए और उनके साथ क्या हुआ।
एजेंट ने भी किया अपहरण का दावा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एजेंट अल्पेश पंचाल ने भी दावा किया है कि तीनों कनाडा नहीं पहुंचे थे और उन्हें इथियोपिया में ही अगवा किए जाने की आशंका है। पंचाल ने यह भी दावा किया कि उसका अंतरराष्ट्रीय संपर्क भी लापता है और उसने कथित अपहरणकर्ताओं को पहले ही करीब 60 लाख रुपये दिए थे।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच में यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि वास्तव में तीनों कहां हैं, क्या उनके साथ अपहरण हुआ है और फिरौती की कॉल किस व्यक्ति या समूह ने की थी।
पुलिस ने शुरू की जांच
मेहसाणा जिले के लांघणज पुलिस स्टेशन में मामले की जांच शुरू की गई है। अधिकारियों की कोशिश है कि तीनों की आखिरी ज्ञात लोकेशन का पता लगाया जाए और उनके मोबाइल फोन, यात्रा रिकॉर्ड तथा एजेंटों से जुड़े संपर्कों की जांच की जाए।
पुलिस कथित फिरौती कॉल के स्रोत का पता लगाने की भी कोशिश कर रही है। इसके साथ ही संबंधित एजेंटों से पूछताछ और विदेश में मौजूद अधिकारियों के साथ समन्वय के जरिए तीनों की वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है।
अमेरिका पहुंचने की चाह ने बढ़ाया जोखिम
यह मामला उन भारतीयों से जुड़े जोखिमों को भी सामने लाता है जो कानूनी वीजा मार्ग उपलब्ध न होने पर एजेंटों के जरिए अनधिकृत या अवैध रास्तों से अमेरिका पहुंचने की कोशिश करते हैं। ऐसे रास्तों में कई देशों से होकर गुजरना पड़ता है और यात्रियों को धोखाधड़ी, मानव तस्करी, जबरन वसूली और अन्य गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।
ममता चावड़ा के पति के अमेरिका में रहने की बात भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, ममता को अमेरिका का वीजा कई बार नहीं मिला था, जिसके बाद परिवार ने एजेंटों के जरिए वैकल्पिक रास्ते से अमेरिका पहुंचने की कोशिश की।
फिलहाल परिवार तीनों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद कर रहा है और सरकार से हस्तक्षेप की अपील की गई है। पुलिस की जांच में अब यह महत्वपूर्ण होगा कि कथित फिरौती कॉल की पुष्टि होती है या नहीं और तीनों की वास्तविक लोकेशन का पता कब तक लगाया जा सकता है।
