7 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): धर्म युद्ध मोर्चा से जुड़े एक प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से मुलाकात कर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के सदस्य अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग रखी।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सामने मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग उठाई। हालांकि, लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही किया जा सकता है।
SIT जांच की मांग
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ यौन उत्पीड़न से जुड़े आरोप सामने आए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि जांच किसी विशेष अधिकारी या स्थानीय स्तर की जांच तक सीमित न रहकर SIT के माध्यम से कराई जाए।
प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि स्वतंत्र जांच से शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों पक्षों के अधिकारों की रक्षा करते हुए तथ्यों को सामने लाने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री के सामने प्रतिनिधिमंडल ने मामले से संबंधित अपनी मांगें रखीं और सरकार से आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
आरोपों की जांच से ही सामने आएगा तथ्य
यौन उत्पीड़न जैसे मामलों में आरोप लगना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। किसी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर निर्धारित होती है।
ऐसे मामलों में पुलिस जांच के दौरान शिकायत, बयान, डिजिटल या दस्तावेजी साक्ष्य तथा अन्य उपलब्ध तथ्यों की जांच की जाती है। यदि SIT गठित होती है तो वह निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत मामले की जांच कर सकती है।
अमरजीत सिंह चावला की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध होने पर उसे भी मामले की रिपोर्टिंग में शामिल किया जाना महत्वपूर्ण होगा।
मुख्यमंत्री के सामने रखे अन्य मुद्दे
प्रतिनिधिमंडल ने बैठक के दौरान बंदी सिखों की रिहाई से संबंधित मुद्दा भी उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने लंबे समय से जेलों में बंद सिख कैदियों के मामलों की समीक्षा और पात्र कैदियों की रिहाई के लिए कानूनी एवं संवैधानिक कदम उठाने की मांग की।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सरकार बंदी सिखों से जुड़े मामलों में उपलब्ध सभी कानूनी और संवैधानिक विकल्पों पर विचार करेगी।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने धार्मिक और सामुदायिक मुद्दों से जुड़े अन्य मामलों पर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
निष्पक्ष जांच पर जोर
प्रतिनिधिमंडल की SIT जांच की मांग ऐसे समय में सामने आई है जब यौन अपराधों से जुड़े मामलों में शिकायतों की निष्पक्ष जांच और पीड़ितों की सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।
कानून के अनुसार, जांच एजेंसी को शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष तरीके से मामले की जांच करनी होती है। साथ ही आरोपी को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है।
इसलिए मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
अब आगे सरकार के फैसले पर नजर
धर्म युद्ध मोर्चा प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद अब नजर इस बात पर है कि सरकार SIT की मांग पर क्या निर्णय लेती है और संबंधित एजेंसियां मामले में आगे क्या कार्रवाई करती हैं।
फिलहाल प्रतिनिधिमंडल की ओर से स्वतंत्र SIT जांच की मांग रखी गई है। आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच के निष्कर्षों और आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकेगा।
