9 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र के समापन पर मानवाधिकारों की रक्षा में समानता, निष्पक्षता और दोहरे मापदंडों से बचने की आवश्यकता पर जोर दिया। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भारत के स्थायी प्रतिनिधि एवं राजदूत अरिंदम बागची ने कहा कि मानव जीवन का कोई पदानुक्रम नहीं होना चाहिए और मानव गरिमा की रक्षा में किसी तरह का चयनात्मक रवैया नहीं अपनाया जाना चाहिए।
भारत के स्थायी मिशन के अनुसार, मानवाधिकार परिषद का एक महीने तक चला 63वां सत्र 7 अक्टूबर 2026 को संपन्न हुआ। भारत ने इस दौरान सभी लोगों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। (The Tribune)
आतंकवाद के पीड़ितों के मानवाधिकारों पर जोर
राजदूत अरिंदम बागची ने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा करते समय किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने परिषद की चर्चाओं में आतंकवाद के पीड़ितों के मानवाधिकारों पर स्पष्ट और पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने पर भी चिंता व्यक्त की।
भारत का कहना है कि आतंकवाद से प्रभावित लोगों के अधिकारों, सम्मान और न्याय की जरूरतों को भी वैश्विक मानवाधिकार विमर्श में उचित स्थान मिलना चाहिए। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि मानवाधिकारों की रक्षा के सिद्धांत सभी परिस्थितियों और सभी पीड़ितों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। (The Tribune)
विकास के अधिकार पर भारत का जोर
सत्र के दौरान भारत ने विकास के अधिकार को भी प्रमुखता से उठाया। भारत के प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने सभी देशों से विकास के अधिकार पर प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय समझौते (International Covenant on the Right to Development) को जल्द अंतिम रूप देने की अपील की।
भारत का दृष्टिकोण है कि मानवाधिकारों की चर्चा में आर्थिक और सामाजिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा लोगों के जीवन स्तर में सुधार को भी महत्व दिया जाना चाहिए। विकास के अवसरों तक समान पहुंच और कमजोर वर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखना इस बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा है। (The Tribune)
मानवाधिकार परिषद का 63वां सत्र
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का 63वां नियमित सत्र 7 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक जिनेवा स्थित पैलेस ऑफ नेशंस में आयोजित किया गया। इसमें मानवाधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों, देशों की रिपोर्टों और परिषद की प्रक्रियाओं पर चर्चा हुई। (UN Human Rights Council)
भारत ने सत्र के दौरान विभिन्न एजेंडा मदों पर अपने विचार रखे। इनमें मानवाधिकारों की सार्वभौमिकता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, विकास का अधिकार और परिषद के विशेष तंत्रों के कामकाज से संबंधित विषय शामिल रहे।
संवाद और निष्पक्षता को जरूरी बताया
भारत ने परिषद के मंच पर यह भी कहा कि मानवाधिकारों को आगे बढ़ाने के लिए संवाद और रचनात्मक सहयोग महत्वपूर्ण हैं। भारत के अनुसार, मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर विचार करते समय निष्पक्षता, सत्यापित तथ्यों और सभी देशों के साथ समान व्यवहार को महत्व दिया जाना चाहिए।
भारत ने पहले भी परिषद में कहा है कि मानवाधिकारों की सार्वभौमिकता को राजनीतिकरण या दोहरे मापदंडों से कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। देश ने सदस्य देशों के बीच संवाद और सहयोग के जरिए ठोस परिणाम हासिल करने की आवश्यकता पर बल दिया है। (संयुक्त राष्ट्र बैठक प्रतिलेख)
वैश्विक मानवाधिकार विमर्श में भारत का संदेश
63वें सत्र के समापन पर भारत का मुख्य संदेश यह रहा कि मानव गरिमा और अधिकारों की रक्षा किसी चयनात्मक दृष्टिकोण पर आधारित नहीं होनी चाहिए। भारत ने आतंकवाद के पीड़ितों के अधिकारों को उचित महत्व देने और विकास के अधिकार पर अंतरराष्ट्रीय सहमति को आगे बढ़ाने की अपील की।
मानवाधिकार परिषद में भारत की टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघर्षों, सुरक्षा, विकास और मानवाधिकारों के बीच संबंधों पर लगातार चर्चा हो रही है। भारत ने अपने वक्तव्य में सभी लोगों की गरिमा की रक्षा और वैश्विक मंचों पर समान मानकों के अनुपालन की जरूरत को रेखांकित किया।
