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19 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भविष्य में अमेरिका में ऐसी सरकार बनने की संभावना को लेकर चिंता जताई है जो इजरायल के प्रति कम अनुकूल हो सकती है। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच इजरायल को अपनी रणनीतिक साझेदारियों को और व्यापक बनाने की जरूरत है। नेतन्याहू ने विशेष रूप से भारत और लैटिन अमेरिकी देशों के साथ संबंध मजबूत करने पर जोर दिया।

नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल अपनी विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को लेकर लगातार नए विकल्प तलाश रहा है। अमेरिका लंबे समय से इजरायल का प्रमुख सहयोगी रहा है, लेकिन पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों और अमेरिकी घरेलू राजनीति में संभावित बदलावों के बीच इजरायल अन्य देशों के साथ अपने संबंधों को भी मजबूत करना चाहता है।

अमेरिका पर निर्भरता कम करने का संकेत

नेतन्याहू ने संकेत दिया कि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भर रहना दीर्घकालिक रणनीति के लिहाज से उचित नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इजरायल को अपनी कूटनीतिक पहुंच का विस्तार करना चाहिए और दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत साझेदारियां विकसित करनी चाहिए।

भारत को इस रणनीति में महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखा जा रहा है। भारत और इजरायल के बीच रक्षा, कृषि, तकनीक, साइबर सुरक्षा और व्यापार सहित कई क्षेत्रों में सहयोग पहले से मौजूद है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध पिछले वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं।

भारत के साथ संबंधों पर जोर

भारत इजरायल के लिए एशिया में एक महत्वपूर्ण साझेदार है। रक्षा क्षेत्र में सहयोग के अलावा दोनों देशों के बीच कृषि तकनीक, जल प्रबंधन, नवाचार और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी है।

इजरायल के लिए भारत के साथ संबंधों को मजबूत करना व्यापक एशियाई रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वहीं भारत के लिए भी इजरायल के साथ तकनीकी और रक्षा सहयोग महत्वपूर्ण माना जाता है।

नेतन्याहू के बयान से संकेत मिलता है कि इजरायल भविष्य में भारत के साथ संबंधों को केवल रक्षा सहयोग तक सीमित रखने के बजाय आर्थिक और रणनीतिक क्षेत्रों में भी विस्तार देना चाहता है।

लैटिन अमेरिका पर भी नजर

इजरायली प्रधानमंत्री ने लैटिन अमेरिकी देशों के साथ संबंध मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। लैटिन अमेरिका कई देशों का बड़ा क्षेत्र है, जहां इजरायल कृषि, जल प्रबंधन, सुरक्षा तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा सकता है।

इजरायल के लिए इन देशों के साथ बेहतर संबंध संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी कूटनीतिक समर्थन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

अमेरिका के साथ संबंध फिर भी महत्वपूर्ण

हालांकि नेतन्याहू ने संभावित रूप से कम अनुकूल अमेरिकी राष्ट्रपति की आशंका जताई है, लेकिन अमेरिका और इजरायल के बीच संबंधों का रणनीतिक महत्व बना हुआ है। रक्षा, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग दोनों देशों के रिश्तों की आधारशिला हैं।

इजरायल की रणनीति में नए साझेदार जोड़ना जरूरी नहीं कि अमेरिका से दूरी बनाने का संकेत हो। इसके बजाय इसे वैश्विक स्तर पर अपने विकल्प और कूटनीतिक समर्थन का दायरा बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।

बदलती वैश्विक राजनीति में नई रणनीति

नेतन्याहू का बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक राजनीति में गठजोड़ तेजी से बदल रहे हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष, अमेरिका की घरेलू राजनीति और विभिन्न देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा ने देशों को अपनी विदेश नीति में अधिक विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित किया है।

भारत और लैटिन अमेरिका के साथ संबंधों को मजबूत करने का आह्वान इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इजरायल इन क्षेत्रों में आर्थिक, रक्षा और कूटनीतिक सहयोग को किस स्तर तक आगे बढ़ाता है।

Bharat Baani Bureau

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