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21 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : पंजाब में नशे के खिलाफ कार्रवाई के बीच आदत डालने वाली दवाओं और गोलियों की अवैध बिक्री रोकने के लिए कानूनी व्यवस्था को और सख्त बनाने की मांग तेज हो गई है। पंजाब पुलिस और राज्य सरकार की ओर से दवाओं की आपूर्ति, बिक्री और वितरण पर अधिक प्रभावी नियंत्रण की जरूरत उठाई जा रही है। इस दिशा में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 तथा इससे जुड़े नियमों में संशोधन की मांग महत्वपूर्ण हो गई है।

यह मुद्दा हाल ही में मानसा में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद फिर चर्चा में आया है। इस घटना ने उन दवाओं की उपलब्धता और बिक्री पर सवाल खड़े किए हैं, जिनका चिकित्सकीय उपयोग होने के बावजूद दुरुपयोग नशे के लिए किया जा सकता है। राज्य में दवा विक्रेताओं की जांच तेज करने और वैध डॉक्टर के पर्चे के बिना प्रतिबंधित दवाएं नहीं बेचने के निर्देश भी दिए गए हैं।

आदत डालने वाली दवाओं की बिक्री पर निगरानी की जरूरत

पंजाब में प्रेगाबालिन, ट्रामाडोल और कुछ अन्य दवाओं के नशे के लिए दुरुपयोग की शिकायतें सामने आती रही हैं। ये दवाएं निर्धारित चिकित्सकीय परिस्थितियों में उपयोग की जाती हैं, लेकिन गलत तरीके से या बिना चिकित्सकीय निगरानी के इस्तेमाल से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जोखिम पैदा हो सकते हैं।

राज्य सरकार ने विशेष रूप से प्रेगाबालिन की बिक्री और इस्तेमाल पर अधिक नियंत्रण की जरूरत उठाई है। केंद्र सरकार ने 13 मई 2026 की अधिसूचना के जरिए प्रेगाबालिन को ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची H1 में शामिल किया। यह बदलाव 12 नवंबर 2026 से प्रभावी होने वाला है। इसके लागू होने के बाद दवा की बिक्री पर निर्धारित नियामकीय शर्तें लागू होंगी।

राज्य की चिंता यह है कि केवल खुदरा दुकानों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। दवाओं के निर्माण, थोक वितरण, खुदरा बिक्री और ऑनलाइन आपूर्ति तक पूरी श्रृंखला पर निगरानी जरूरी है। यदि किसी दवा का दुरुपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है, तो उसके स्रोत और वितरण नेटवर्क की पहचान करना भी महत्वपूर्ण होगा।

कानून में संशोधन से क्या बदल सकता है?

ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और संबंधित नियम दवाओं के निर्माण, वितरण, बिक्री और गुणवत्ता को नियंत्रित करते हैं। पंजाब में उठाई जा रही मांग का उद्देश्य उन दवाओं की बिक्री पर निगरानी मजबूत करना है, जिनका इस्तेमाल नशे के लिए किए जाने की आशंका रहती है।

संभावित नियामकीय उपायों में दवा विक्रेताओं के रिकॉर्ड की नियमित जांच, डॉक्टर के पर्चे का सत्यापन, संदिग्ध खरीद की निगरानी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई शामिल हो सकती है। हालांकि, किसी भी नए प्रावधान की वास्तविक रूपरेखा केंद्र सरकार की ओर से किए जाने वाले कानूनी और नियामकीय फैसलों पर निर्भर करेगी।

पंजाब सरकार ने ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर भी चिंता जताई है। राज्य के अनुसार, ई-फार्मेसी के संचालन और ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था की कमी प्रवर्तन एजेंसियों के सामने चुनौती पैदा करती है। ऑनलाइन बिक्री में खरीदार की पहचान, वैध पर्चे और दवा की आपूर्ति का रिकॉर्ड सुनिश्चित करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

पंजाब में तेज हुई जांच और कार्रवाई

राज्य में दवा कानूनों के उल्लंघन के खिलाफ पिछले डेढ़ साल से अधिक समय में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई है। पंजाब सरकार के मुताबिक, 1 अप्रैल 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच खाद्य एवं औषधि प्रशासन के ड्रग्स विंग ने 16,788 निरीक्षण किए। इस दौरान 214 लाइसेंसधारी और बिना लाइसेंस वाले प्रतिष्ठानों से 20.64 करोड़ रुपये मूल्य की दवाएं जब्त की गईं।

इसी अवधि में नियमों के उल्लंघन पर 520 दवा विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए गए और 22 अन्य के लाइसेंस रद्द किए गए। ये आंकड़े राज्य सरकार की ओर से जारी जानकारी पर आधारित हैं।

इन कार्रवाइयों के बावजूद अधिकारियों के सामने चुनौती यह है कि वैध दवाओं की जरूरत वाले मरीजों को उपचार उपलब्ध रहे और उन्हीं दवाओं का अवैध इस्तेमाल रोका जा सके। इसके लिए पुलिस, औषधि नियंत्रकों, स्वास्थ्य विभाग और दवा कारोबार से जुड़े संगठनों के बीच समन्वय आवश्यक है।

दवा कारोबार में जवाबदेही पर जोर

पंजाब केमिस्ट्स एसोसिएशन ने भी दवा विक्रेताओं से नियमों का पालन करने और नियंत्रित दवाओं की बिक्री का उचित रिकॉर्ड रखने की अपील की है। एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कहा है कि दवाएं केवल वैध चिकित्सकीय पर्चे के आधार पर बेची जानी चाहिए और गलत काम करने वाले कुछ लोगों के कारण पूरे फार्मास्यूटिकल कारोबार की छवि खराब नहीं होनी चाहिए।

नियामकीय व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए यह भी जरूरी होगा कि निरीक्षण नियमित हों, उल्लंघन के मामलों में समय पर कार्रवाई हो और दवाओं की आपूर्ति करने वाले थोक विक्रेताओं तथा निर्माताओं की भूमिका की जांच की जा सके।

नशे के खिलाफ अभियान में कानूनी बदलाव अहम

पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान अब केवल गिरफ्तारी और जब्ती तक सीमित रखने के बजाय आपूर्ति नेटवर्क को बाधित करने पर भी केंद्रित किया जा रहा है। राज्य सरकार ने 435 चिन्हित नशा प्रभावित क्षेत्रों में कार्रवाई और समन्वित रणनीति की योजना भी घोषित की है। <Cite refs={[“turn658265search8”]}/>

कानून में संशोधन की मांग इसी व्यापक चुनौती से जुड़ी है। यदि दवाओं की बिक्री, रिकॉर्ड रखने और ऑनलाइन आपूर्ति से संबंधित नियमों में प्रभावी सुधार होता है, तो आदत डालने वाली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कानून में बदलाव के साथ-साथ जमीनी स्तर पर निगरानी, जांच की गुणवत्ता और नियमों का समान रूप से पालन भी उतना ही जरूरी होगा।

Bharat Baani Bureau

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