28 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो): पाकिस्तान से भारत पहुंचे सिख श्रद्धालुओं के एक जत्थे ने बुधवार को अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब, जिसे स्वर्ण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, में माथा टेककर गुरबाणी का कीर्तन सुना और अरदास में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर की परिक्रमा की और गुरु घर की मर्यादा के अनुसार नतमस्तक होकर देश-दुनिया की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की।
पाकिस्तान से आने वाले सिख श्रद्धालुओं के लिए अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब की यात्रा विशेष धार्मिक महत्व रखती है। पाकिस्तान में सिख समुदाय के कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे मौजूद हैं और हर वर्ष विभिन्न धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालु भारत आकर प्रमुख सिख तीर्थस्थलों के दर्शन करते हैं।
गुरु घर में की अरदास
अमृतसर पहुंचने के बाद पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं ने श्री हरमंदिर साहिब परिसर में मत्था टेका। उन्होंने पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष नतमस्तक होकर आशीर्वाद लिया और गुरबाणी कीर्तन सुना।
श्रद्धालुओं ने कहा कि श्री हरमंदिर साहिब के दर्शन करना उनके लिए लंबे समय से जुड़ी धार्मिक इच्छा थी। गुरु घर में पहुंचकर उन्हें आध्यात्मिक शांति और भावनात्मक संतुष्टि का अनुभव हुआ।
स्वर्ण मंदिर सिख धर्म का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल माना जाता है और दुनिया भर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
पाकिस्तान से धार्मिक यात्राओं का सिलसिला
भारत और पाकिस्तान के बीच विभिन्न धार्मिक यात्राओं के लिए समय-समय पर श्रद्धालुओं के जत्थों का आवागमन होता है। सिख श्रद्धालु विशेष रूप से बैसाखी, गुरु पर्व और अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों पर पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारों के दर्शन के लिए भी जाते हैं।
इसी तरह पाकिस्तान से सिख श्रद्धालु भारत आकर श्री हरमंदिर साहिब, तख्त श्री पटना साहिब और अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारों में माथा टेकते हैं।
धार्मिक यात्राएं दोनों देशों में रहने वाले सिख समुदायों के लिए अपनी साझा धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े रहने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
पाकिस्तान में सिख विरासत से जुड़े प्रमुख स्थल
पाकिस्तान में सिख धर्म से जुड़े कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल हैं। इनमें ननकाना साहिब स्थित गुरुद्वारा जन्म स्थान, करतारपुर साहिब और पंजा साहिब प्रमुख हैं। ये स्थल सिख इतिहास और गुरु साहिबान से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं के कारण दुनिया भर के सिखों के लिए विशेष महत्व रखते हैं।
भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक यात्राओं के दौरान श्रद्धालुओं को इन ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन का अवसर मिलता है। इससे सिख समुदाय की साझा विरासत और धार्मिक संबंधों को बनाए रखने में मदद मिलती है।
अमृतसर में श्रद्धालुओं का स्वागत
अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एसजीपीसी और स्थानीय संस्थाओं की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की जाती हैं। श्रद्धालु गुरु घर की मर्यादा के अनुसार दर्शन, कीर्तन श्रवण और अरदास में हिस्सा लेते हैं।
पाकिस्तान से आए इन श्रद्धालुओं की यात्रा भी इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा रही। स्वर्ण मंदिर में माथा टेकने के बाद उन्होंने गुरु घर की सेवा और लंगर की व्यवस्था का भी अनुभव किया।
धार्मिक यात्राओं के माध्यम से सिख श्रद्धालु सीमाओं से परे अपनी आस्था और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ते हैं। पाकिस्तान से आए सिखों का अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब के दर्शन करना इसी साझा विरासत और धार्मिक जुड़ाव की एक झलक पेश करता है।
