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24 फरवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : पिछले कुछ सालों में हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी तेजी से बढ़ा है। हार्ट अटैक के मामले काफी ज्यादा सामने आ रहे हैं, लेकिन दिल की दूसरी बीमारियों का रिस्क भी बढ़ने लगा है। मेडिकल साइंस के लिए हार्ट संबंधी आपात स्थितियों से निपटना ज्यादा मुश्किल हो गया है। ये सबसे ज्यादा संवेदनशील और जानलेवा स्थितियों में गिनी जाने वाली मेडिकल कंडीशन है। अचानक कार्डियक अरेस्ट, तीव्र कोरोनरी सिंड्रोम या हाइपरटेंसिव क्राइसिस जैसी परिस्थितियां न केवल अच्छे हेल्थ एक्सपर्ट की मांग करती हैं बल्कि इन कंडीशन में तुरंत एक्शन लेना सबसे बड़ा हथियार माना जाता है। बिना देरी किए मरीज को सही मेडिकल केयर मिलना सबसे ज्यादा जरूरी है।

डॉक्टर सुनील सोफत ( सीनियर डायरेक्टर, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी एवं इलेक्ट्रोफिज़ियोलॉजी, मैक्स हॉस्पिटल, नोएडा) की मानें तो दुनियाभर में हार्ट की बीमारियों से मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है। इसके लिए आपको हहृदय संबंधी आपात स्थितियों को समझना जरूरी है। इसमें वो सभी मेडिकल कंडीशन आती है, जिसमें हार्ट प्रभावित होता है। हृदय की पंपिंग क्षमता, कोरोनरी धमनियों में रक्त प्रवाह या रक्त वाहिकाओं की संरचना को प्रभावित करती हैं। इनमें हार्ट अटैक (मायोकार्डियल इंफार्क्शन), हृदय की अनियमित धड़कनें (अरिदमिया), तीव्र हृदय विफलता, एओर्टिक डिसेक्शन, पल्मोनरी एम्बोलिज़्म और कार्डियोजेनिक शॉक शामिल हैं। इन सभी कंडीशन में तुरंत एक्शन मरीज की जान बचा सकता है।

हार्ट की बीमारी के लक्षण

सीने में दर्द, सांस फूलना, बेहोशी, धड़कन तेज या अनियमित होना या अचानक शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी जैसे लक्षणों को तुरंत पहचानना और चिकित्सा सहायता लेना जीवन बचा सकता है। थोड़ी सी भी देरी हृदय की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान, मस्तिष्क क्षति या मृत्यु का कारण बन सकती है।

तीव्र कोरोनरी सिंड्रोम (Acute Coronary Syndromes)

तीव्र कोरोनरी सिंड्रोम (ACS) हार्ट आपात स्थितियों का सबसे प्रमुख कारण है। जब कोरोनरी धमनियों में जमा प्लाक फट जाता है और उसमें थक्का (थ्रॉम्बस) बन जाता है, तो ब्लड सर्कुलेशन अचानक रुक सकता है, जिससे अस्थिर एंजाइना या हार्ट अटैक हो सकता है। इसके लिए ईसीजी (ECG) और ब्लड टेस्ट (कार्डियक बायोमार्कर) से इसका पता लगाया जा सकता है। सबसे जरूरी समय पर इलाज कराना है। थ्रोम्बोलाइसिस या प्राथमिक एंजियोप्लास्टी (Primary PCI) के जरिए जल्दी से ब्लड फ्लो को नॉर्मल कर हार्ट की मांसपेशियों को बचाने में मदद की जाती है। डॉक्टर इन कंडीशन में समय को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं।

अरिदमिया और कार्डियक अरेस्ट

अचानक कार्डियक अरेस्ट सबसे गंभीर आपात स्थित है, जो अक्सर वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन या वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया जैसी खतरनाक अरिदमिया के कारण होता है। इसमें रोगी की जान तुरंत सीपीआर (CPR) और समय पर डिफिब्रिलेशन पर निर्भर करती है। इसी प्रकार, गंभीर ब्रैडीकार्डिया (धीमी धड़कन) या सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया भी कुछ ही क्षणों में रक्तचाप और अंगों के कार्य को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में एडवांस्ड कार्डियक लाइफ सपोर्ट (ACLS), लगातार मॉनिटरिंग, डिफिब्रिलेटर और पेसिंग सुविधा जरूरी होती है।

हाइपरटेंसिव और एओर्टिक आपात स्थितियां

जब बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर दिमाग, हार्ट, किडनी या आंखों को अचानक नुकसान पहुंचाने लगे, तो उसे हाइपरटेंसिव इमरजेंसी कहा जाता है। इससे स्ट्रोक, तीव्र हृदय विफलता और हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। एओर्टिक डिसेक्शन एक रेयर और घातक कंडीशन है। इसमें अचानक फटने जैसा सीने या पीठ में तेज दर्द, नाड़ी में अंतर या दोनों हाथों के रक्तचाप में अंतर दिखाई दे सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत इमेजिंग जांच और सर्जिकल एडवाइज जरूरी है। सही समय पर इलाज और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करके मरीज की जाम बचाई जा सकती है।

सारांश:

दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा सिर्फ हार्ट अटैक तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, दिल की धड़कन में अनियमितता और दिल की मांसपेशियों की कमजोरी जैसी अन्य बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। लक्षण जैसे सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, चक्कर या थकान दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। समय पर एक्शन लेने से जानलेवा परिस्थितियों को रोका जा सकता है और दिल की सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है।

Bharat Baani Bureau

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