24 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :  भारत में दवा प्रतिरोधी ट्यूबरकुलोसिस (DR-TB) तेजी से एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। यह बीमारी सामान्य टीबी की तुलना में अधिक खतरनाक और इलाज में जटिल होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसे समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति पैदा कर सकती है।

दवा प्रतिरोधी टीबी उन रोगियों में होती है जो पारंपरिक एंटी-टीबी दवाओं से ठीक नहीं हो पाते। अक्सर मरीजों द्वारा दवाओं का समय पर सेवन न करना या दवाओं की कमी, गलत डोज़, या अधूरा इलाज इसका कारण बनता है। भारत में टीबी की दर सबसे अधिक है, और इस बीच DR-TB मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।

हाल के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 1.5 लाख से अधिक DR-TB के मामले सामने आते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे वैश्विक चिंता का विषय बताया है, और भारत सरकार ने भी इसे स्वास्थ्य नीति में प्राथमिकता देने की बात कही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर उपचार और रोकथाम पर तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति गंभीर हो सकती है।

दवा प्रतिरोधी टीबी का इलाज पारंपरिक टीबी की तुलना में लंबा, महंगा और जटिल होता है। मरीजों को 18 से 24 महीने तक कई दवाओं का सेवन करना पड़ता है, और इन दवाओं के साइड इफेक्ट भी गंभीर हो सकते हैं। इसके कारण कई मरीज इलाज पूरा नहीं कर पाते और बीमारी फैलती रहती है।

साथ ही, DR-TB रोगियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी भी बड़ी समस्या है। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में मरीजों को इलाज और डायग्नोस्टिक सुविधाएं समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती। इस कारण संक्रमण और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि सक्रिय स्क्रीनिंग, तेज़ निदान और उचित दवा वितरण प्रणाली को मजबूत करना जरूरी है।

भारत सरकार ने TB उन्मूलन के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू की हैं, जैसे Nikshay Poshan Yojana और TB Mukt Bharat अभियान। लेकिन DR-TB के मामलों में वृद्धि ने इन कार्यक्रमों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि DR-TB पर विशेष ध्यान, नई दवाओं की उपलब्धता और मरीजों को नियमित निगरानी सुनिश्चित करना आवश्यक है।

WHO ने DR-TB को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल माना है। वैश्विक स्तर पर भी यह बीमारी गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि यह तेजी से अन्य देशों में फैल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत में DR-TB को नियंत्रित किया गया तो यह वैश्विक स्तर पर टीबी नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि DR-TB से बचाव के लिए टीकाकरण, सार्वजनिक जागरूकता, समय पर निदान और दवा पालन पर जोर देना आवश्यक है। इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल निगरानी और डेटा आधारित रणनीति अपनाना प्रभावी उपाय हो सकता है।

DR-TB का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी गंभीर है। मरीज लंबे समय तक इलाज में रहते हैं, जिससे उनकी आय और परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। इसके साथ ही बीमारी का मानसिक और शारीरिक दबाव भी बड़ा होता है। इसलिए, सरकार और नागरिक समाज को मिलकर जागरूकता और रोकथाम के उपाय करने की आवश्यकता है।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भी भारत में DR-TB के मामलों पर चिंता जता चुके हैं। उनका कहना है कि यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल का मामला बन सकता है अगर नीति, संसाधन और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं हुआ। भारत में DR-TB पर नियंत्रण और इलाज को प्राथमिकता देकर वैश्विक स्तर पर टीबी उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

कुल मिलाकर, भारत में दवा प्रतिरोधी ट्यूबरकुलोसिस तेजी से बढ़ रहा है और इसे स्वास्थ्य आपातकाल मानकर तत्काल रोकथाम और इलाज की रणनीति अपनाना आवश्यक है। समय पर कार्रवाई से न केवल मरीजों की जान बचाई जा सकती है बल्कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली को स्थिर बनाए रखा जा सकता है।

Summary

भारत में दवा प्रतिरोधी टीबी तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल मानते हैं और तुरंत रोकथाम, निदान और इलाज की अपील कर रहे हैं।

Bharat Baani Bureau

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