24 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : भारत में हृदय रोग (Cardiovascular Disease) लगातार सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, हर साल लगभग 28.6 लाख भारतीय हृदय रोग के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह देश में सबसे बड़ी मृत्यु दर वाली गैर-संचारी बीमारी (Non-communicable Disease) में से एक है।

हालांकि हृदय रोग के निदान और इलाज के लिए आधुनिक तकनीक और दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन उनकी पहुंच और गुणवत्ता पूरे देश में समान नहीं है। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में लोग समय पर उचित उपचार नहीं पा पाते, जबकि महानगरों में सुविधा और विशेषज्ञता अधिक है। इसी असमानता के कारण लाखों लोगों की जान जोखिम में रहती है।

हृदय रोग के प्रमुख कारणों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, शराब का सेवन और जीवनशैली में असंतुलन शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन कारणों को नियंत्रित कर, समय पर स्क्रीनिंग और जांच कर, हृदय रोग के मामले और मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

भारत में हृदय रोग के इलाज में भी गंभीर चुनौतियां हैं। शहरों में उच्च तकनीक वाले अस्पताल और विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट मौजूद हैं, जबकि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी सुविधाएं बहुत कम हैं। कई बार मरीजों को बड़े शहरों तक आने के लिए लंबी यात्रा करनी पड़ती है, जो समय और धन दोनों की बाधा बन जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हृदय रोग का इलाज केवल अस्पताल या दवा तक सीमित नहीं है। इसके लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, जीवनशैली सुधार, पोषण, शारीरिक गतिविधि और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है। सरकारी और निजी स्वास्थ्य कार्यक्रमों को इन पहलुओं पर फोकस करना होगा, ताकि रोगियों की संख्या और मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।

हाल के अध्ययन बताते हैं कि भारत में हृदय रोग की उम्र पहले की तरफ बढ़ रही है। पहले यह रोग ज्यादातर 50 साल से ऊपर के लोगों में देखा जाता था, लेकिन अब 30–40 साल के लोग भी इसके शिकार हो रहे हैं। इसका कारण जीवनशैली में बदलाव, अधिक तनाव और अस्वस्थ खान-पान है।

उपचार और रोकथाम के असमान तरीके से इलाज की गुणवत्ता में अंतर आ जाता है। शहरी क्षेत्रों में रोगियों को सर्जरी, इंटेंसिव केयर, स्टेंट और दवा उपचार उपलब्ध है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में शुरुआती पहचान और प्राथमिक देखभाल तक पहुंच सीमित है। यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में मृत्यु दर ज्यादा है।

सरकार और स्वास्थ्य संगठन हृदय रोग के खिलाफ कई अभियान चला रहे हैं। इनमें राष्ट्रीय हृदय स्वास्थ्य कार्यक्रम, जागरूकता अभियान और निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शामिल हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन कदमों का असर तभी होगा जब स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सभी वर्गों तक समान रूप से हो।

इसके अलावा, मरीजों और परिवारों में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। लोग अक्सर हृदय रोग के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जैसे छाती में दर्द, सांस लेने में कठिनाई या अत्यधिक थकान। समय पर इलाज न मिलने से स्थिति गंभीर हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत में हृदय रोग पर समान, कुशल और समय पर इलाज उपलब्ध कराया जाए, तो हर साल लाखों मौतों को रोका जा सकता है। इसके लिए केवल अस्पताल और दवाओं की उपलब्धता ही नहीं बल्कि लोगों की जीवनशैली और स्वास्थ्य जागरूकता भी महत्वपूर्ण है।

कुल मिलाकर, भारत में हृदय रोग हर साल लाखों लोगों की जान ले रहा है। आधुनिक उपचार मौजूद हैं, लेकिन इलाज असमान और अनियमित है। समय पर पहचान, जीवनशैली सुधार और समान स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

Summary

भारत में हृदय रोग हर साल 28.6 लाख मौतों का कारण बनता है। इलाज असमान और अनियमित है, जिससे समय पर निदान और रोकथाम चुनौतीपूर्ण बन जाती है।

Bharat Baani Bureau

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