अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : पंजाब में बिजली क्षेत्र से जुड़ी शीर्ष नियुक्तियों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा पावर यूटिलिटी डायरेक्टर्स के चयन के लिए निर्धारित पात्रता मानदंडों में हाल ही में किए गए बदलावों ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में अटकलों को जन्म दे दिया है। इस कदम को लेकर जहां सरकार इसे सुधारात्मक और लचीला निर्णय बता रही है, वहीं विपक्ष और कर्मचारी संगठनों ने इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार, सरकार ने पंजाब की प्रमुख बिजली कंपनियों—Punjab State Power Corporation Limited और Punjab State Power Transmission Corporation Limited—में डायरेक्टर और शीर्ष प्रबंधन पदों के लिए योग्यता मानकों में संशोधन किया है। पहले इन पदों के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों या तकनीकी विशेषज्ञों को प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन अब पात्रता का दायरा बढ़ाते हुए अधिक अधिकारियों को इसमें शामिल किया गया है।

सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य चयन प्रक्रिया को अधिक व्यापक और पारदर्शी बनाना है, ताकि योग्य और सक्षम उम्मीदवारों को अवसर मिल सके। अधिकारियों के अनुसार, बदलते समय के साथ प्रशासनिक ढांचे में लचीलापन जरूरी है, जिससे बेहतर निर्णय लिए जा सकें और बिजली क्षेत्र में सुधार लाया जा सके।

हालांकि, इस फैसले ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। पावर सेक्टर से जुड़े इंजीनियरों और कर्मचारी संगठनों ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि यह कदम तकनीकी विशेषज्ञता को कमजोर कर सकता है। उनका मानना है कि बिजली जैसे तकनीकी क्षेत्र में उच्च पदों पर ऐसे लोगों की नियुक्ति होनी चाहिए, जिनके पास गहन तकनीकी ज्ञान और अनुभव हो।

कर्मचारी संगठनों का यह भी आरोप है कि इस तरह के बदलाव अक्सर विशेष व्यक्तियों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह इस फैसले पर पुनर्विचार करे और सभी हितधारकों से चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय ले।

विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यह बदलाव पारदर्शिता के बजाय संभावित राजनीतिक हस्तक्षेप का संकेत देता है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार अपने पसंदीदा अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करने के लिए नियमों में बदलाव कर रही है।

हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों और योग्यता के आधार पर होगी। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी नियुक्तियां पारदर्शी तरीके से की जाएंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बदलावों का असर केवल प्रशासनिक ढांचे तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव बिजली आपूर्ति और उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। यदि योग्य और अनुभवी लोगों की नियुक्ति नहीं होती, तो इससे बिजली सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

इस बीच, राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है और गर्मी के मौसम में यह और भी बढ़ने की संभावना है। ऐसे समय में पावर सेक्टर में स्थिरता और कुशल प्रबंधन की आवश्यकता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

पंजाब में पावर यूटिलिटी डायरेक्टर्स के चयन मानदंडों में किया गया यह बदलाव आने वाले समय में किस दिशा में जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, इस फैसले ने प्रशासनिक पारदर्शिता, तकनीकी विशेषज्ञता और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे मुद्दों पर एक नई बहस छेड़ दी है।

Summary

पंजाब में पावर यूटिलिटी डायरेक्टर चयन मानदंडों में बदलाव से अटकलें तेज हैं, विपक्ष और कर्मचारी संगठनों ने पारदर्शिता और तकनीकी विशेषज्ञता पर सवाल उठाए हैं।

Bharat Baani Bureau

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *