20  मई अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : लुधियाना में केमिस्टों और ड्रगिस्टों की एकदिवसीय हड़ताल का असर आम लोगों और मरीजों पर साफ दिखाई दिया। शहर में करीब 4,000 मेडिकल स्टोर बंद रहने के कारण लोगों को दवाएं खरीदने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हड़ताल का आह्वान ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में किया गया था।

स्थानीय केमिस्ट संगठनों ने दावा किया कि बड़ी संख्या में मेडिकल स्टोर मालिकों ने हड़ताल में हिस्सा लिया। शहर के कई प्रमुख बाजारों और रिहायशी इलाकों में दवा दुकानें बंद रहीं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ी।

कई मरीजों ने बताया कि नियमित दवाएं लेने में उन्हें परेशानी हुई। खासकर बुजुर्ग, मधुमेह, रक्तचाप और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को दवा उपलब्ध न होने से चिंता का सामना करना पड़ा।

हड़ताल करने वाले केमिस्टों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स का कारोबार प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप है कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना पर्याप्त निगरानी के दवाएं बेच रहे हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है।

केमिस्ट संगठनों ने कहा कि दवाओं की बिक्री एक संवेदनशील क्षेत्र है और इसे पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर छोड़ना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर सख्त नियम लागू करने की मांग की।

दूसरी ओर, कई लोगों ने सवाल उठाया कि हड़ताल का सबसे ज्यादा असर आम मरीजों पर पड़ा। कुछ नागरिकों ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े क्षेत्र में बंद का फैसला लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है।

लुधियाना के कई इलाकों में लोग खुली मेडिकल दुकानों की तलाश करते नजर आए। कुछ अस्पतालों के अंदर मौजूद फार्मेसियों पर भी अतिरिक्त दबाव देखा गया।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री को पूरी तरह गलत नहीं कहा जा सकता, लेकिन इसके लिए मजबूत नियामक व्यवस्था जरूरी है। उनका मानना है कि मरीजों की सुरक्षा और सुविधा दोनों को ध्यान में रखकर नीति बनाई जानी चाहिए।

हड़ताल के दौरान कुछ आपातकालीन सेवाओं और अस्पतालों में सीमित दवा आपूर्ति जारी रही, लेकिन शहर के अधिकांश निजी मेडिकल स्टोर्स बंद रहे।

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स भारी डिस्काउंट और डिजिटल सेवाओं के जरिए पारंपरिक कारोबार पर दबाव बना रहे हैं। वहीं ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां दावा करती हैं कि वे दवाओं की पहुंच आसान बना रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में डिजिटल हेल्थकेयर तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में सरकार को पारंपरिक और ऑनलाइन दोनों प्रणालियों के बीच संतुलन बनाना होगा।

सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने केमिस्टों की मांगों को सही बताया, जबकि कई यूजर्स ने मरीजों की परेशानी को लेकर चिंता जताई।

कई नागरिकों ने मांग की कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए जरूरी दवाओं की आपूर्ति को हड़ताल से अलग रखा जाना चाहिए।

लुधियाना में यह हड़ताल केवल व्यापारिक मुद्दा नहीं बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था और डिजिटल बदलाव के बीच टकराव के रूप में भी देखी जा रही है।

कुल मिलाकर, एकदिवसीय केमिस्ट हड़ताल ने ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर जारी विवाद को और तेज कर दिया है। हालांकि व्यापारिक संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाया, लेकिन इसका सबसे अधिक असर आम मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ा।

Bharat Baani Bureau

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