1 अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : आज के समय में Autism Spectrum Disorder (ASD) को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद समाज में कई गलतफहमियां और मिथक अब भी मौजूद हैं। इनमें सबसे आम सवाल यह है कि क्या ऑटिज़्म खराब पालन-पोषण का परिणाम है, और क्या यह एक ऐसी बीमारी है जिसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। विशेषज्ञ इन दोनों ही धारणाओं को गलत बताते हैं।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि Autism Spectrum Disorder कोई मानसिक बीमारी नहीं, बल्कि एक न्यूरोडेवलपमेंटल कंडीशन है। इसका मतलब है कि यह व्यक्ति के मस्तिष्क के विकास और कार्य करने के तरीके से जुड़ा होता है। ऑटिज़्म वाले लोग दुनिया को अलग तरीके से समझते हैं और उनकी सोच, व्यवहार और संचार शैली सामान्य से भिन्न हो सकती है।
❗ मिथक 1: क्या ऑटिज़्म खराब पेरेंटिंग से होता है?
यह धारणा पूरी तरह गलत और वैज्ञानिक रूप से अस्वीकार्य है। पहले के समय में कुछ लोग मानते थे कि “ठंडी मां” या भावनात्मक दूरी रखने वाले माता-पिता बच्चों में ऑटिज़्म का कारण बनते हैं। लेकिन आधुनिक शोध ने इस सिद्धांत को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, Autism Spectrum Disorder का मुख्य कारण आनुवंशिक (genetic) और जैविक (biological) कारक होते हैं। कई मामलों में यह परिवार में पहले से मौजूद जीन से जुड़ा हो सकता है। इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान कुछ कारक—जैसे स्वास्थ्य समस्याएं या पर्यावरणीय प्रभाव—भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।
इसलिए यह कहना कि माता-पिता की परवरिश से ऑटिज़्म होता है, न केवल गलत है बल्कि इससे परिवारों पर अनावश्यक मानसिक दबाव भी पड़ता है।
❗ मिथक 2: क्या ऑटिज़्म एक बीमारी है जिसे ठीक किया जा सकता है?
दूसरा बड़ा मिथक यह है कि ऑटिज़्म एक बीमारी है और इसका इलाज करके इसे पूरी तरह “ठीक” किया जा सकता है। यह भी एक गलत धारणा है।
Autism Spectrum Disorder कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसे दवा या सर्जरी से खत्म किया जा सके। यह व्यक्ति के जीवन भर रहने वाली स्थिति है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इसमें सुधार नहीं हो सकता।
विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर थेरेपी, शिक्षा और सपोर्ट सिस्टम के जरिए ऑटिज़्म वाले बच्चे और वयस्क अपनी क्षमताओं को विकसित कर सकते हैं और एक संतुलित जीवन जी सकते हैं।
🧠 सही दृष्टिकोण क्या होना चाहिए?
आजकल दुनिया भर में “न्यूरोडाइवर्सिटी” (Neurodiversity) का विचार तेजी से स्वीकार किया जा रहा है। इसका मतलब है कि मस्तिष्क के विभिन्न प्रकार के विकास को सामान्य माना जाए और उन्हें “ठीक” करने के बजाय समझने और स्वीकार करने की कोशिश की जाए।
ऑटिज़्म वाले लोगों में कई खास क्षमताएं भी होती हैं—जैसे गहरी एकाग्रता, विश्लेषणात्मक सोच और रचनात्मकता। कई लोग तकनीक, कला और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं।
👨👩👧 परिवार और समाज की भूमिका
ऑटिज़्म से जुड़े मिथकों को खत्म करने में परिवार और समाज की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। माता-पिता को दोष देने के बजाय उन्हें समर्थन और सही जानकारी देना जरूरी है।
स्कूलों, कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर भी समावेशी (inclusive) वातावरण बनाना जरूरी है, ताकि ऑटिज़्म वाले लोग बिना किसी भेदभाव के अपनी क्षमताओं का उपयोग कर सकें।
⚠️ निष्कर्ष
कुल मिलाकर, Autism Spectrum Disorder को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करना बेहद जरूरी है। यह न तो खराब पालन-पोषण का परिणाम है और न ही कोई ऐसी बीमारी जिसे “ठीक” किया जा सके। सही जानकारी, सहानुभूति और समर्थन के जरिए हम एक ऐसा समाज बना सकते हैं, जहां हर व्यक्ति को समान अवसर मिले।
Summary
ऑटिज़्म खराब पेरेंटिंग से नहीं होता और यह कोई ठीक होने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि एक न्यूरोडेवलपमेंटल कंडीशन है, जिसमें सही सपोर्ट से जीवन बेहतर बनाया जा सकता है।
