14 मई अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : Iran युद्ध और पाकिस्तान के एयरस्पेस प्रतिबंधों ने Air India की अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए विदेशी एयरलाइंस, खासकर Lufthansa और Cathay Pacific, भारत के तेजी से बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विमानन बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, Iran संघर्ष और पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण कई हवाई मार्ग प्रभावित हुए हैं। इसके साथ पाकिस्तान द्वारा भारतीय एयरलाइंस के लिए एयरस्पेस बंद रखने से Air India की उड़ानों की अवधि और परिचालन लागत दोनों बढ़ गई हैं।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि Air India को जून से अगस्त के बीच कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती करनी पड़ी। दिल्ली-शिकागो, मुंबई-न्यूयॉर्क और कुछ यूरोपीय मार्गों पर सेवाएं कम या अस्थायी रूप से निलंबित की गईं।
विश्लेषकों का कहना है कि इससे भारत से यूरोप और उत्तर अमेरिका जाने वाले यात्रियों के लिए विदेशी एयरलाइंस अधिक आकर्षक बन गई हैं। खासतौर पर Gulf क्षेत्र में युद्ध के कारण यात्री वहां ट्रांजिट से बचना चाह रहे हैं, जिससे यूरोपीय और एशियाई एयरलाइंस को नया अवसर मिला है।
डेटा के अनुसार, मार्च से मई 2026 के बीच भारत से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में विदेशी एयरलाइंस की हिस्सेदारी बढ़कर 58.4% हो गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 51.2% थी। दूसरी ओर, Air India की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में लगभग 17.5% की गिरावट दर्ज की गई।
Lufthansa ने भारत-यूरोप मार्गों पर उड़ानों की संख्या बढ़ाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली-ज्यूरिख रूट पर Swiss एयरलाइन ने दूसरी दैनिक सेवा शुरू की है, जबकि Lufthansa ने भी भारतीय बाजार में आक्रामक विस्तार रणनीति अपनाई है।
वहीं Cathay Pacific ने भारत-हांगकांग उड़ानों में उल्लेखनीय वृद्धि की है। कंपनी का मानना है कि Gulf ट्रांजिट से बचने वाले यात्री अब Hong Kong के जरिए अमेरिका और अन्य देशों की यात्रा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, Air India की दीर्घकालिक रणनीति पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है। Tata Group द्वारा अधिग्रहण के बाद एयरलाइन वैश्विक स्तर पर खुद को मजबूत करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक संकट ने उसके विस्तार योजनाओं को झटका दिया है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि Air India को वित्त वर्ष 2025-26 में 2.12 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हो सकता है। कंपनी की आय का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से आता है, इसलिए उड़ानों में कटौती का सीधा असर राजस्व पर पड़ रहा है।
इस बीच, वैश्विक स्तर पर जेट फ्यूल की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। Iran युद्ध के कारण ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे एयरलाइंस की लागत लगातार बढ़ रही है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि Air India प्रतिस्पर्धी किराए और बेहतर सेवाएं देने में सफल रहती है, तो वह अभी भी यात्रियों को आकर्षित कर सकती है। लेकिन लंबी उड़ान अवधि और विदेशी एयरलाइंस की मजबूत कनेक्टिविटी उसके लिए चुनौती बनी हुई है।
कुल मिलाकर, Iran युद्ध और एयरस्पेस प्रतिबंधों ने भारत के एविएशन सेक्टर में बड़ा बदलाव ला दिया है। जहां Air India संघर्ष कर रही है, वहीं Lufthansa और Cathay Pacific जैसी विदेशी एयरलाइंस इस अवसर का लाभ उठाकर भारतीय बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर रही हैं।
Summary
Iran युद्ध और एयरस्पेस प्रतिबंधों से Air India की उड़ानें प्रभावित हुईं, जबकि Lufthansa और Cathay Pacific जैसी विदेशी एयरलाइंस ने भारतीय अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी।
