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14  मई अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : एक नई वैश्विक स्टडी में सामने आया है कि Obesity यानी मोटापा अब निम्न और मध्यम आय वाले देशों में पहले से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस प्रवृत्ति को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट बन सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पहले मोटापे को मुख्य रूप से विकसित और उच्च आय वाले देशों की समस्या माना जाता था, लेकिन अब एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई देशों में भी इसकी दर तेजी से बढ़ रही है।

स्टडी के मुताबिक, शहरीकरण, बदलती जीवनशैली, प्रोसेस्ड फूड की बढ़ती उपलब्धता और शारीरिक गतिविधियों में कमी इस समस्या के प्रमुख कारण हैं। खासकर युवा पीढ़ी में जंक फूड और स्क्रीन-आधारित जीवनशैली ने जोखिम बढ़ा दिया है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में स्वास्थ्य ढांचा पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में मोटापे से जुड़ी बीमारियों का बढ़ना इन देशों की स्वास्थ्य प्रणालियों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

Obesity केवल वजन बढ़ने की समस्या नहीं है। यह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, स्ट्रोक और कई प्रकार के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कई विकासशील देशों में अब “double burden” की स्थिति बन रही है, जहां एक तरफ कुपोषण मौजूद है और दूसरी तरफ मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। यह विरोधाभासी स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है।

स्टडी में यह भी पाया गया कि बच्चों और किशोरों में मोटापे के मामले चिंताजनक गति से बढ़ रहे हैं। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि बचपन में ही वजन नियंत्रण नहीं किया गया, तो वयस्क होने पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा काफी बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों ने सरकारों से स्वस्थ भोजन को बढ़ावा देने, चीनी और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों पर नियंत्रण और शारीरिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की अपील की है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापे को केवल व्यक्तिगत समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके पीछे आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय कारण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कई निम्न और मध्यम आय वाले देशों में स्वस्थ भोजन महंगा होता जा रहा है, जबकि सस्ता और अधिक कैलोरी वाला प्रोसेस्ड फूड आसानी से उपलब्ध है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों में अस्वास्थ्यकर खानपान बढ़ रहा है।

स्टडी में यह भी कहा गया कि महामारी के बाद घर से काम, कम शारीरिक गतिविधि और डिजिटल जीवनशैली ने भी वजन बढ़ने की समस्या को तेज किया है।

विशेषज्ञों ने स्कूलों में पोषण शिक्षा, सार्वजनिक जागरूकता अभियान और शहरी क्षेत्रों में खेल व व्यायाम सुविधाओं को बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

Obesity को लेकर बढ़ती चिंता के बीच विश्व स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दशकों में स्वास्थ्य खर्च और गैर-संचारी रोगों का बोझ काफी बढ़ सकता है।

कुल मिलाकर, नई स्टडी यह संकेत देती है कि मोटापा अब केवल विकसित देशों तक सीमित समस्या नहीं रह गया है। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में इसकी तेजी से बढ़ती दर वैश्विक स्वास्थ्य नीति के लिए नई चुनौती बनती जा रही है।

Summary

नई स्टडी में खुलासा हुआ कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है, जिससे डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य संकटों का खतरा बढ़ रहा है।

Bharat Baani Bureau

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