26 मई अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : Pakistan के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने कहा है कि वह Pakistan के Abraham Accords में शामिल होने के पक्ष में नहीं हैं। उनके इस बयान ने Middle East कूटनीति और Israel के साथ संबंधों को लेकर नई राजनीतिक चर्चा शुरू कर दी है।
Abraham Accords वह समझौता श्रृंखला है जिसके तहत कई Arab देशों ने Israel के साथ अपने संबंध सामान्य किए थे। इस प्रक्रिया को United States के समर्थन से आगे बढ़ाया गया था और इसे Middle East में कूटनीतिक बदलाव के रूप में देखा गया।
Khawaja Asif ने कहा कि Pakistan की स्थिति Palestine मुद्दे से जुड़ी हुई है और जब तक Palestinian लोगों के अधिकारों और स्वतंत्र राज्य के प्रश्न पर उचित समाधान नहीं निकलता, तब तक Israel के साथ संबंध सामान्य करने का सवाल नहीं उठता।
उनका बयान ऐसे समय आया है जब Middle East में जारी तनाव और क्षेत्रीय गठबंधनों को लेकर नई चर्चाएं चल रही हैं। हाल के महीनों में कुछ रिपोर्ट्स में यह अटकलें लगाई गई थीं कि भविष्य में Pakistan भी Abraham Accords पर विचार कर सकता है।
हालांकि Pakistan की सरकार और राजनीतिक नेतृत्व लंबे समय से यह कहता रहा है कि वह Palestine के समर्थन की अपनी पारंपरिक नीति से पीछे नहीं हटेगा।
विश्लेषकों का कहना है कि Pakistan के भीतर Israel के साथ संबंधों को लेकर राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर संवेदनशील माहौल रहा है। इसलिए Abraham Accords में शामिल होने का कोई भी कदम घरेलू राजनीति में बड़ा विवाद पैदा कर सकता है।
Abraham Accords के तहत United Arab Emirates, Bahrain, Morocco और Sudan जैसे देशों ने Israel के साथ संबंध सामान्य किए थे।
इन समझौतों को समर्थकों ने क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया था, जबकि आलोचकों ने कहा कि इससे Palestine मुद्दा कमजोर पड़ सकता है।
Pakistan में कई राजनीतिक और धार्मिक समूह पहले भी Israel के साथ किसी भी प्रकार के औपचारिक संबंधों का विरोध करते रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि Pakistan की विदेश नीति में Palestine मुद्दा लंबे समय से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। देश आधिकारिक तौर पर दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है।
Khawaja Asif के बयान को घरेलू राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्रीय राजनीति तेजी से बदल रही है।
Middle East मामलों के जानकारों का मानना है कि Abraham Accords ने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और कूटनीतिक समीकरणों को बदल दिया है। हालांकि सभी मुस्लिम देश इस प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए तैयार नहीं हैं।
सोशल मीडिया पर भी Khawaja Asif के बयान को लेकर बहस तेज हो गई। कुछ लोगों ने इसे Pakistan की पारंपरिक नीति के अनुरूप बताया, जबकि कुछ ने बदलते वैश्विक हालात में नई कूटनीतिक सोच की जरूरत पर जोर दिया।
विश्लेषकों के अनुसार, Pakistan के लिए Israel के साथ संबंधों का मुद्दा केवल विदेश नीति का विषय नहीं बल्कि घरेलू राजनीति, धार्मिक भावना और क्षेत्रीय रणनीति से भी जुड़ा हुआ है।
इस बीच, Middle East में जारी संघर्ष और geopolitical बदलावों ने Abraham Accords की प्रासंगिकता को फिर चर्चा में ला दिया है।
कुल मिलाकर, Khawaja Asif का बयान संकेत देता है कि फिलहाल Pakistan Abraham Accords में शामिल होने के मूड में नहीं है और Palestine मुद्दे पर अपनी पुरानी नीति बनाए रखना चाहता है।
