8 जून  2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :  भारत में प्रजनन स्वास्थ्य (reproductive health) को लेकर किए गए एक नए अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। अध्ययन के अनुसार पुरुष बांझपन (male infertility) के इलाज पर होने वाला खर्च लगभग उतना ही है जितना महिलाओं में होने वाली गंभीर बीमारी Endometriosis के उपचार पर आता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह तुलना भारत में fertility-related healthcare की बढ़ती आर्थिक चुनौती को दर्शाती है। पहले जहां infertility को केवल एक medical condition माना जाता था, अब यह एक major public health and financial burden बनता जा रहा है।

अध्ययन में पाया गया कि पुरुष बांझपन के मामलों में diagnosis से लेकर advanced treatments जैसे IVF, ICSI और hormonal therapies तक का खर्च काफी अधिक होता है। कई बार यह इलाज लंबा चलता है, जिससे परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में male infertility के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में वृद्धि देखी गई है। इसके पीछे lifestyle changes, stress, pollution, smoking और poor dietary habits जैसे कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं।

दूसरी ओर, Endometriosis एक ऐसी स्थिति है जिसमें महिलाओं के reproductive organs में असामान्य tissue growth होती है, जिससे दर्द, infertility और अन्य complications हो सकते हैं।

Healthcare experts के अनुसार दोनों स्थितियों का इलाज अलग-अलग लेकिन महंगा है, और कई बार insurance coverage भी पर्याप्त नहीं होती।

अध्ययन में यह भी बताया गया है कि fertility treatment की demand urban India में तेजी से बढ़ रही है, खासकर उन couples में जो delayed pregnancies plan कर रहे हैं।

Doctors का कहना है कि infertility केवल medical issue नहीं बल्कि emotional और social stress भी पैदा करता है, जिससे mental health पर भी असर पड़ता है।

India में IVF centers की संख्या बढ़ रही है, लेकिन treatment cost अभी भी कई middle-class families के लिए चुनौती बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि awareness की कमी भी एक बड़ी समस्या है। कई पुरुष समय पर medical consultation नहीं लेते, जिससे condition और गंभीर हो जाती है।

Endometriosis के इलाज में भी surgeries, hormone therapy और long-term medication शामिल हो सकते हैं, जो काफी महंगे होते हैं।

Public health researchers का कहना है कि reproductive health को लेकर stigma को कम करना जरूरी है ताकि लोग समय पर इलाज ले सकें।

Study में सुझाव दिया गया है कि government और private sector को मिलकर fertility treatments को अधिक affordable और accessible बनाना चाहिए।

Experts का कहना है कि preventive healthcare, early diagnosis और lifestyle modification infertility burden को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

Men’s health को लेकर जागरूकता campaigns की भी आवश्यकता है ताकि लोग इस मुद्दे को गंभीरता से लें।

कुल मिलाकर, यह अध्ययन दिखाता है कि भारत में male infertility का इलाज अब एक significant economic burden बन चुका है, जो लगभग Endometriosis के उपचार जितना ही महंगा है, और इसके लिए व्यापक स्वास्थ्य सुधार और जागरूकता की जरूरत है।

Bharat Baani Bureau

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