21 जुलाई 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : भारत को डेंगू के खिलाफ अपनी पहली स्वीकृत वैक्सीन मिल गई है। Qdenga नाम की इस वैक्सीन को देश में 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए मंजूरी दी गई है। यह कदम भारत में डेंगू की रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डेंगू एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित Aedes मच्छरों के काटने से फैलती है। भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोग डेंगू से प्रभावित होते हैं। गंभीर मामलों में यह बीमारी डेंगू हेमरेजिक फीवर और शॉक सिंड्रोम जैसी जानलेवा जटिलताओं का कारण बन सकती है।
Qdenga क्या है?
Qdenga एक टेट्रावैलेंट डेंगू वैक्सीन है, जिसे डेंगू वायरस के चारों प्रमुख सीरोटाइप के खिलाफ सुरक्षा देने के लिए विकसित किया गया है। वैक्सीन का उद्देश्य डेंगू संक्रमण और इसके गंभीर रूपों के जोखिम को कम करना है।
इस वैक्सीन को 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए मंजूरी दी गई है। हालांकि, वैक्सीन किसे लगवानी चाहिए, इसकी खुराक और टीकाकरण कार्यक्रम व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर कर सकते हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में डेंगू का प्रसार एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। मानसून और उसके बाद के महीनों में मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनने से डेंगू के मामलों में अक्सर बढ़ोतरी देखी जाती है।
पहली स्वीकृत डेंगू वैक्सीन उपलब्ध होने से बीमारी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था को एक नया विकल्प मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि टीकाकरण के साथ मच्छर नियंत्रण, साफ-सफाई और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करना भी जरूरी रहेगा।
क्या वैक्सीन के बाद डेंगू से पूरी सुरक्षा मिलेगी?
डेंगू के खिलाफ कोई भी वैक्सीन हर व्यक्ति को पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं देती। डेंगू वायरस के अलग-अलग सीरोटाइप और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के कारण संक्रमण का जोखिम अलग हो सकता है।
इसलिए वैक्सीन लगवाने के बाद भी मच्छरों से बचाव के उपाय जारी रखना महत्वपूर्ण है। घरों और आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरदानी और रिपेलेंट का इस्तेमाल करना तथा पूरी आस्तीन के कपड़े पहनना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डेंगू वैक्सीन के इस्तेमाल से पहले लोगों को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, खासकर यदि उन्हें कोई पुरानी बीमारी है या वे किसी विशेष चिकित्सा उपचार से गुजर रहे हैं।
डेंगू से बचाव के लिए टीकाकरण को सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के साथ मिलाकर अपनाना अधिक प्रभावी हो सकता है।
