17 जून  2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण अध्ययन में पाया है कि रक्त में मौजूद कुछ विशेष प्रोटीन शरीर की उन उम्रदराज (Aging) कोशिकाओं की पहचान करने में मदद कर सकते हैं, जो विभिन्न गंभीर बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। यह खोज उम्र बढ़ने की प्रक्रिया और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में कुछ कोशिकाएं ऐसी अवस्था में पहुंच जाती हैं जहां वे विभाजित होना बंद कर देती हैं, लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं होतीं। इन्हें अक्सर “सेनेसेंट कोशिकाएं” (Senescent Cells) कहा जाता है।

ये कोशिकाएं शरीर में जमा होकर सूजन पैदा करने वाले रसायन और प्रोटीन छोड़ सकती हैं, जिससे हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर, अल्जाइमर और अन्य उम्र-संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

अध्ययन में वैज्ञानिकों ने रक्त के नमूनों का विश्लेषण कर ऐसे प्रोटीनों की पहचान की, जिनका संबंध इन उम्रदराज कोशिकाओं की गतिविधियों से पाया गया। शोधकर्ताओं का मानना है कि भविष्य में इन प्रोटीनों का उपयोग शरीर में हानिकारक सेनेसेंट कोशिकाओं की मात्रा का अनुमान लगाने के लिए किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में शरीर में ऐसी कोशिकाओं की पहचान करना जटिल और महंगा हो सकता है। यदि रक्त परीक्षण के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त की जा सके, तो बीमारी के जोखिम का पहले से आकलन करना अधिक आसान हो जाएगा।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalized Medicine) के क्षेत्र में भी उपयोगी साबित हो सकती है। इससे डॉक्टर यह समझ सकेंगे कि किन लोगों में उम्र से जुड़ी बीमारियों का खतरा अधिक है और उन्हें समय रहते उचित उपचार या जीवनशैली संबंधी सलाह दी जा सकती है।

वैज्ञानिक यह भी अध्ययन कर रहे हैं कि क्या इन प्रोटीन संकेतकों का उपयोग उन दवाओं के प्रभाव को मापने के लिए किया जा सकता है, जिनका उद्देश्य उम्रदराज कोशिकाओं को कम करना है।

हालांकि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह शोध अभी शुरुआती चरण में है और इसके निष्कर्षों को व्यापक आबादी पर लागू करने से पहले अतिरिक्त अध्ययन की आवश्यकता होगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने से भविष्य में कई गंभीर बीमारियों की रोकथाम और उपचार के नए रास्ते खुल सकते हैं।

यह अध्ययन इस दिशा में उम्मीद जगाता है कि आने वाले वर्षों में एक साधारण रक्त परीक्षण के जरिए उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम का अधिक सटीक आकलन संभव हो सकेगा।

Bharat Baani Bureau

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