2 जुलाई  2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :  भारतीय सिनेमा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने तथा फिल्म उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से गीतकार, लेखक और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष प्रसून जोशी की अध्यक्षता में एक अध्ययन समूह (Study Group) का गठन किया गया है। इस समूह का उद्देश्य भारतीय फिल्म उद्योग के सामने मौजूद चुनौतियों का अध्ययन करना और उसके विकास के लिए व्यावहारिक सुझाव देना है।

भारतीय सिनेमा दुनिया के सबसे बड़े फिल्म उद्योगों में से एक है, जहां हर वर्ष विभिन्न भाषाओं में बड़ी संख्या में फिल्में बनती हैं। इसके बावजूद वैश्विक बाजार में इसकी संभावनाओं का पूरा लाभ अभी तक नहीं मिल पाया है। ऐसे में अध्ययन समूह से उम्मीद की जा रही है कि वह उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली बनाने के लिए सुझाव देगा।

अध्ययन समूह का उद्देश्य

समूह का मुख्य उद्देश्य भारतीय सिनेमा के विकास में आने वाली बाधाओं की पहचान करना और उन्हें दूर करने के लिए नीति संबंधी सुझाव देना है। इसमें फिल्म निर्माण, वितरण, प्रदर्शन, डिजिटल प्लेटफॉर्म, अंतरराष्ट्रीय बाजार, तकनीकी नवाचार और निवेश जैसे विषयों का अध्ययन किया जाएगा।

इसके अलावा भारतीय फिल्मों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने, विदेशी बाजारों में प्रचार-प्रसार और अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में बेहतर भागीदारी जैसे पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

किन मुद्दों पर होगा फोकस?

अध्ययन समूह भारतीय फिल्म उद्योग से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार करेगा, जिनमें शामिल हैं—

  • भारतीय फिल्मों की वैश्विक ब्रांडिंग।
  • क्षेत्रीय सिनेमा को प्रोत्साहन।
  • नई तकनीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभाव।
  • फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाना।
  • कौशल विकास और प्रतिभाओं को बढ़ावा देना।
  • अंतरराष्ट्रीय सह-निर्माण (Co-production) के अवसर।
  • निवेश और रोजगार बढ़ाने के उपाय।

भारतीय सिनेमा के लिए क्यों जरूरी है यह पहल?

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय फिल्मों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता बढ़ी है। कई भारतीय फिल्मों ने वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की है और विदेशी दर्शकों के बीच भी अपनी पहचान बनाई है। इसके बावजूद उद्योग को वितरण, मार्केटिंग, तकनीकी उन्नयन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एक समग्र नीति और दीर्घकालिक रणनीति से भारतीय सिनेमा की वैश्विक स्थिति और मजबूत हो सकती है।

क्षेत्रीय फिल्मों को भी मिलेगा लाभ

भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को देखते हुए क्षेत्रीय फिल्म उद्योग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। अध्ययन समूह से उम्मीद है कि वह केवल हिंदी सिनेमा ही नहीं, बल्कि तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, मराठी, बंगाली, पंजाबी और अन्य भारतीय भाषाओं की फिल्मों को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहतर अवसर दिलाने के लिए सुझाव देगा।

इससे क्षेत्रीय फिल्म निर्माताओं को नए बाजार और निवेश के अवसर मिलने की संभावना है।

रोजगार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

फिल्म उद्योग केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यटन, आतिथ्य, तकनीक, एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, संगीत, फैशन और विज्ञापन जैसे कई क्षेत्रों को भी बढ़ावा देता है। यदि भारतीय सिनेमा का विस्तार होता है तो इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और रचनात्मक अर्थव्यवस्था (Creative Economy) को भी मजबूती मिलेगी।

आगे क्या?

अध्ययन समूह विभिन्न हितधारकों से सुझाव लेने, उद्योग की मौजूदा स्थिति का विश्लेषण करने और अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपने का कार्य करेगा। इन सिफारिशों के आधार पर भविष्य में नई नीतियां या सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समूह की सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहुंच, निवेश, तकनीकी गुणवत्ता और सांस्कृतिक प्रभाव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। यह पहल भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और भारतीय फिल्मों को विश्व स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

Bharat Baani Bureau

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