7 जुलाई 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : क्रॉनिक हेपेटाइटिस-बी (HBV) संक्रमण दुनिया भर में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। हालांकि मौजूदा दवाएं वायरस को नियंत्रित करने में प्रभावी हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में संक्रमण पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाता। अब वैज्ञानिकों का मानना है कि फंक्शनल क्योर (Functional Cure) की दिशा में हो रहे शोध भविष्य में मरीजों के लिए नई उम्मीद बन सकते हैं।
फंक्शनल क्योर का अर्थ यह नहीं है कि वायरस शरीर से पूरी तरह समाप्त हो जाए, बल्कि इसका उद्देश्य वायरस की गतिविधि को इस स्तर तक दबाना है कि बीमारी दोबारा सक्रिय न हो और मरीज को लंबे समय तक दवा की आवश्यकता न पड़े।
वर्तमान में क्रॉनिक हेपेटाइटिस-बी के उपचार के लिए एंटीवायरल दवाओं का उपयोग किया जाता है। ये दवाएं वायरस की वृद्धि को नियंत्रित करती हैं और लीवर को गंभीर नुकसान से बचाने में मदद करती हैं। हालांकि अधिकांश मरीजों को लंबे समय तक दवा लेनी पड़ती है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, नई उपचार रणनीतियों में प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को मजबूत करने वाली दवाएं, वायरस के आनुवंशिक पदार्थ को लक्ष्य बनाने वाली तकनीकें और संयोजन उपचार (Combination Therapy) शामिल हैं। इन पर दुनिया के कई शोध संस्थानों में अध्ययन जारी है।
हालांकि इस क्षेत्र में कुछ परीक्षणों से उत्साहजनक परिणाम मिले हैं, लेकिन कई क्लिनिकल ट्रायल अपेक्षित सफलता नहीं दे पाए। वैज्ञानिकों का कहना है कि HBV वायरस की जटिल संरचना और शरीर में लंबे समय तक छिपे रहने की क्षमता उपचार विकास को चुनौतीपूर्ण बनाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में विभिन्न दवाओं और इम्यूनोथेरेपी के संयोजन से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। साथ ही मरीजों की स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत उपचार (Personalized Treatment) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि हेपेटाइटिस-बी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण (Vaccination) है। समय पर जांच, सुरक्षित रक्त चढ़ाना, संक्रमण नियंत्रण के उपाय और जोखिम वाले लोगों की नियमित स्क्रीनिंग भी बीमारी की रोकथाम में अहम हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि हालिया शोधों ने फंक्शनल क्योर की दिशा में नई संभावनाएं जरूर पैदा की हैं, लेकिन इसे व्यापक रूप से उपलब्ध उपचार बनने से पहले और बड़े पैमाने पर क्लिनिकल परीक्षणों की आवश्यकता होगी।
