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24 अगस्त, 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : पंजाब में आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन प्रोग्राम के तहत Markfed द्वारा निजी सप्लायर्स से रेडी-टू-कुक खाद्य पदार्थों की खरीद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के दायरे में आ गई है। एजेंसी सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग (SSWCD) के एक आंतरिक पत्राचार और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, SSWCD ने जनवरी में सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार तथा Markfed और Milkfed के प्रबंध निदेशकों को पत्र भेजकर निजी सप्लायर्स से खाद्य सामग्री लेने को लेकर सामने आई शिकायतों का उल्लेख किया था। पत्र में निजी ठेकेदारों से तैयार कराई गई पंजीरी की गुणवत्ता, स्वाद और बनावट को लेकर भी शिकायतों का जिक्र था।

बताया गया है कि निजी सप्लायर्स से तैयार कराई गई पंजीरी में रिफाइंड सोयाबीन तेल के इस्तेमाल को लेकर लाभार्थियों ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद इस उत्पाद को बंद कर दिया गया। विभाग लंबे समय से Markfed और Milkfed को खाद्य पदार्थों के लिए अपनी इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं विकसित करने पर जोर देता रहा है।

ED कथित तौर पर 21 जनवरी के कुछ WhatsApp चैट्स की भी जांच कर रही है। इन चैट्स में कथित रूप से टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिशों के संकेत मिलने की बात सामने आई है। एजेंसी Markfed के एक आंतरिक नोट को भी देख रही है, जिसमें एक वरिष्ठ अधिकारी ने टेंडर की अवधि बढ़ाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

यह मामला पंजाब के लगभग 26,600 आंगनवाड़ी केंद्रों में चलाए जा रहे सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन प्रोग्राम से जुड़ा है, जिससे करीब 12 लाख लोग लाभान्वित होते हैं। इस योजना के तहत बच्चों और अन्य लाभार्थियों को पोषण संबंधी खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।

Markfed पहले आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए फन पॉप्स, खिचड़ी प्रीमिक्स तथा मीठे और नमकीन दलिया प्रीमिक्स जैसी सामग्री की आपूर्ति करता था। रिपोर्ट के मुताबिक, इन उत्पादों की आपूर्ति के लिए निजी कंपनियों पर निर्भरता को लेकर विभागीय स्तर पर पहले भी सवाल उठाए गए थे।

मामला 22 दिसंबर 2025 को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में भी उठाया गया था। बैठक की अध्यक्षता सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने की थी। बैठक में Markfed और Milkfed की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया गया था।

बैठक के रिकॉर्ड के अनुसार, तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास प्रताप ने कहा था कि लंबे समय के लिए दोनों सहकारी संस्थाओं के पास अपनी उत्पादन सुविधाएं होना जरूरी है। बैठक में यह भी बताया गया कि Milkfed ने वर्ष 2005 के आसपास अपने मिल्क प्लांट्स में पांच पंजीरी यूनिट स्थापित की थीं और वे अब भी काम कर रही हैं।

SSWCD की निदेशक डॉ. शेना अग्रवाल ने भी निजी सप्लायर्स पर Markfed की निर्भरता से पहले सामने आई शिकायतों का उल्लेख किया था। वहीं Markfed के चीफ मैनेजर (मार्केटिंग) ने बताया था कि मौजूदा सप्लायर्स को टेंडर प्रक्रिया के जरिए सूचीबद्ध किया गया था और उनमें से कोई भी ब्लैकलिस्टेड नहीं था।

बैठक में मंत्री बलजीत कौर ने सहकारिता विभाग के तत्कालीन रजिस्ट्रार को दोनों फेडरेशनों के साथ समन्वय कर इन-हाउस उत्पादन क्षमता तैयार करने के निर्देश दिए थे। साथ ही लागत का दोबारा आकलन करने और भारतीय खाद्य निगम (FCI) से मिलने वाले सब्सिडी वाले खाद्यान्न को लागत में शामिल करने को कहा गया था।

रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट उत्पादों की व्यवस्था कोरोना महामारी के बाद शुरू की गई थी। वर्ष 2020 तक सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन प्रोग्राम के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों को ढीला और कच्चा राशन दिया जाता था। महामारी के बाद नई रेसिपी के तहत तैयार खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की गई और Markfed के साथ इसके लिए समझौता किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, देसी घी से तैयार होने वाली पंजीरी को 2023 में अधिक लागत के कारण बंद कर दिया गया और उसकी जगह सोयाबीन तेल से तैयार पंजीरी शुरू की गई। विभाग के अनुसार, यह बदलाव पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना द्वारा सुझाए गए पोषण मानकों के अनुरूप था।

अब ED की जांच का फोकस निजी सप्लायर्स से खरीद, टेंडर प्रक्रिया, अधिकारियों द्वारा टेंडर की अवधि बढ़ाने और खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता से जुड़े आरोपों पर है। जांच के दौरान एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि खरीद प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं और क्या किसी व्यक्ति या संस्था को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

फिलहाल ED की जांच जारी है और उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ आरोपों को सिद्ध नहीं माना जा सकता। जांच पूरी होने के बाद ही कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

Bharat Baani Bureau

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