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31 अगस्त, 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :  ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। Brent crude oil के 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की चिंता गहरा गई है। ऐसे में निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण Sensex और Nifty में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के Larak Island पर मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाए जाने के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को और गंभीर कर दिया है। बाजारों में सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर है, क्योंकि यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।

सोमवार को Brent crude में करीब 2.4 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह लगभग $90.20 प्रति बैरल तक पहुंच गया। अमेरिकी WTI crude भी 85 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा था। तेल की कीमतों में यह तेजी भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि महंगा कच्चा तेल आयात बिल, रुपये और महंगाई पर दबाव बढ़ा सकता है।

भारतीय शेयर बाजार में शुरुआत भी कमजोर रही। Reuters के अनुसार, सुबह करीब 9:22 बजे Nifty 50 0.42 प्रतिशत गिरकर 24,073.85 पर और Sensex 0.28 प्रतिशत गिरकर 77,042.87 पर पहुंच गया। 16 प्रमुख सेक्टरों में से 14 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि IT इंडेक्स करीब 1.5 प्रतिशत नीचे रहा।

हालांकि, बाजार में गिरावट का स्तर सिर्फ ईरान युद्ध पर निर्भर नहीं है। निवेशक US bond yields, Federal Reserve की ब्याज दर नीति, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर भी नजर रख रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सख्त रुख की आशंका ने भी वैश्विक बाजारों पर दबाव बनाया है।

महंगा तेल भारत के लिए क्यों चिंता की बात?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में crude oil की कीमत बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर रुपये पर पड़ सकता है और पेट्रोलियम उत्पादों, परिवहन तथा अन्य लागतों के जरिए महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।

तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने पर उन कंपनियों पर भी दबाव बढ़ सकता है जिनके कारोबार में ईंधन बड़ी लागत है। Aviation, paints, chemicals और automobile जैसे क्षेत्रों पर इसका असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, upstream oil कंपनियों को ऊंची crude prices से फायदा हो सकता है।

Nifty के लिए अहम स्तर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, Nifty के लिए 24,075 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट है। इसके नीचे टिकने पर 24,000 और फिर 23,900 के स्तरों की ओर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, 24,300 के ऊपर मजबूती बाजार में recovery का संकेत दे सकती है।

इसका मतलब है कि मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में एकतरफा बड़ी गिरावट की भविष्यवाणी करना मुश्किल है। यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तथा crude oil 90 डॉलर से ऊपर लंबे समय तक बना रहता है, तो भारतीय बाजारों में volatility बढ़ सकती है। इसके विपरीत, युद्धविराम या Strait of Hormuz से जुड़े सकारात्मक संकेत crude prices को नीचे ला सकते हैं और बाजार को राहत मिल सकती है।

एशियाई बाजारों में भी दबाव

भारतीय बाजारों पर वैश्विक संकेतों का भी असर पड़ा है। सोमवार को जापान का Nikkei, Hong Kong का Hang Seng और दक्षिण कोरिया का Kospi गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। तेल की बढ़ती कीमत और अमेरिकी बाजारों में कमजोर sentiment ने एशियाई निवेशकों को भी सतर्क रखा।

इसके अलावा, भारतीय बाजार में MSCI index rebalancing से जुड़े बदलाव भी आज volatility बढ़ा सकते हैं। बाजार पहले से ही विदेशी निवेश प्रवाह और रुपये की दिशा को लेकर सतर्क है।

HDFC Bank पर भी नजर

आज बाजार में HDFC Bank भी खास चर्चा में है। बैंक के CEO Sashidhar Jagdishan ने अक्टूबर के अंत में अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं करने का फैसला किया है। इसके बावजूद शुरुआती कारोबार में HDFC Bank के शेयरों में तेजी दिखाई दी। Reuters के अनुसार, सुबह के कारोबार में बैंक के शेयर करीब 2.1 प्रतिशत ऊपर थे।

आगे क्या होगा?

विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में भारतीय बाजार की दिशा मुख्य रूप से crude oil prices और Iran-US conflict के घटनाक्रम से तय हो सकती है। यदि Hormuz में तेल और शिपिंग गतिविधियां बाधित होती हैं, तो crude में और तेजी बाजार के लिए नकारात्मक संकेत होगी। वहीं, तनाव कम होने पर oil prices में नरमी आ सकती है।

मौजूदा स्थिति में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े दांव लगाने के बजाय बाजार की volatility पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है। ऊंची तेल कीमतों के साथ कमजोर रुपया और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता भारतीय equities के लिए चुनौती बनी हुई है।

सोमवार के शुरुआती कारोबार ने भी यही संकेत दिया कि Sensex और Nifty पर दबाव बढ़ा है, लेकिन बाजार की दिशा पूरे दिन बदल सकती है। अगर crude 90 डॉलर के ऊपर बना रहता है और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है, तो गिरावट का जोखिम कायम रहेगा। वहीं, crude में नरमी और geopolitical tensions में कमी बाजार में recovery का रास्ता खोल सकती है।

Bharat Baani Bureau

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