4 सितंबर , 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मानी जाने वाली मथुरा से लेकर देशभर के मंदिरों और घरों तक शुक्रवार को जन्माष्टमी की धूम है। भक्ति, संगीत, पूजा और मध्यरात्रि के जन्मोत्सव के बीच यह पर्व भगवान कृष्ण के जीवन और उनकी शिक्षाओं को याद करने का अवसर भी देता है। इस मौके पर टीवी और मनोरंजन जगत से जुड़े कई कलाकारों ने बताया कि कृष्ण की कौन-सी सीख उन्हें निजी और पेशेवर जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
कृष्ण को केवल एक धार्मिक चरित्र के रूप में नहीं, बल्कि मित्र, मार्गदर्शक, रणनीतिकार, नेता और योद्धा के रूप में भी देखा जाता है। उनके जीवन के अलग-अलग पहलू लोगों को परिस्थितियों के अनुसार संतुलन बनाए रखने, अपने कर्तव्य पर ध्यान देने, सही निर्णय लेने और कठिन समय में उम्मीद बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं। इसी वजह से उनकी शिक्षाएं आज भी अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों के लिए प्रासंगिक मानी जाती हैं।
अद्रिजा रॉय: परिणाम नहीं, कर्म पर ध्यान
‘अनुपमा’ अभिनेत्री अद्रिजा रॉय के लिए कृष्ण की सबसे महत्वपूर्ण सीख है—अपने कर्म और प्रयास पर ध्यान देना, न कि हर समय परिणाम की चिंता करना।
अद्रिजा ने बताया कि एक कलाकार के जीवन में सफलता का आकलन अक्सर रेटिंग, समीक्षा, दर्शकों की प्रतिक्रिया और किसी प्रोजेक्ट की सफलता से किया जाता है। लेकिन इन सभी चीजों को हमेशा नियंत्रित नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, कलाकार अपने अभिनय की तैयारी, मेहनत और ईमानदारी को जरूर नियंत्रित कर सकता है।
उनका मानना है कि सफलता मिलने पर व्यक्ति को आभारी होना चाहिए, जबकि असफलता को कड़वाहट के बजाय सीख में बदलना चाहिए। जन्माष्टमी उन्हें इसी सोच को दोबारा याद करने का अवसर देती है।
अद्रिजा कृष्ण के उस गुण से भी प्रभावित हैं जिसमें वे अलग-अलग लोगों की जरूरत और परिस्थिति को समझकर उनके साथ खड़े होते थे। उनके लिए कृष्ण का मित्र, मार्गदर्शक और नेता—तीनों भूमिकाओं को एक साथ निभाना बेहद प्रेरणादायक है।
आदेश चौधरी: महत्वाकांक्षा और संतोष के बीच संतुलन
अभिनेता आदेश चौधरी के लिए जन्माष्टमी कृष्ण की शिक्षाओं में मौजूद संतुलन को याद करने का अवसर है। उनका कहना है कि जीवन में महत्वाकांक्षी होना जरूरी है, लेकिन उपलब्धियों का जुनून इतना नहीं होना चाहिए कि बाकी चीजें पीछे छूट जाएं।
आदेश के अनुसार, जीवन केवल करियर और लक्ष्य तक सीमित नहीं है। परिवार, रिश्ते, व्यक्तिगत खुशी और मानसिक शांति भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। वह मानते हैं कि व्यक्ति एक साथ संतुष्ट और महत्वाकांक्षी हो सकता है।
कृष्ण के जीवन से उन्हें यही संदेश मिलता है कि अलग-अलग जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। जो हमारे पास है उसके लिए आभार व्यक्त करते हुए भी भविष्य के लिए मेहनत जारी रखी जा सकती है।
सोनिया बंसल: सही रास्ते पर टिके रहना
अभिनेत्री सोनिया बंसल कृष्ण की उस सीख से प्रेरणा लेती हैं जो कठिन परिस्थितियों में भी सही बात के साथ खड़े रहने का संदेश देती है।
उन्होंने अपने करियर के ऐसे अवसरों का जिक्र किया जहां आसान रास्ता चुनना तत्काल लाभ दे सकता था, लेकिन उन्हें लगा कि वह उनके मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उनके लिए कृष्ण की शिक्षाएं यह याद दिलाती हैं कि सुविधाजनक विकल्प हमेशा सही विकल्प नहीं होता।
सोनिया का मानना है कि कभी-कभी सही निर्णय लेने का मतलब किसी अवसर को ठुकराना या बेहतर अवसर का इंतजार करना भी हो सकता है। हालांकि यह तत्काल मुश्किल लग सकता है, लेकिन लंबे समय में अपने सिद्धांतों पर कायम रहना आत्मविश्वास देता है।
अंगद हसीजा: कठिन समय में उम्मीद बनाए रखना
अभिनेता अंगद हसीजा के लिए जन्माष्टमी का सबसे खूबसूरत संदेश उम्मीद और विश्वास है।
उनके अनुसार, कृष्ण का जन्म स्वयं एक कठिन परिस्थिति में हुआ था, लेकिन उनका जीवन आगे चलकर करोड़ों लोगों के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा का स्रोत बना। यही बात अंगद को यह विश्वास देती है कि मुश्किल समय स्थायी नहीं होता।
उनका मानना है कि विश्वास व्यक्ति को आगे बढ़ने की ताकत देता है और उम्मीद उसे बेहतर कल की ओर देखने का कारण देती है। इसलिए जन्माष्टमी उनके लिए केवल उत्सव नहीं बल्कि जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की याद भी है।
अंकुर भारद्वाज: रुककर सोचने का अवसर
अभिनेता अंकुर भारद्वाज जन्माष्टमी को सकारात्मकता और कृतज्ञता के साथ मनाना पसंद करते हैं। समय मिलने पर वह परिवार के साथ समय बिताने, मंदिर जाने और प्रार्थना करने की कोशिश करते हैं।
उनके लिए त्योहार का वातावरण—भजन, सजावट और मध्यरात्रि का जन्मोत्सव—विशेष महत्व रखता है। लेकिन उनका मानना है कि उत्सव के साथ उसके वास्तविक अर्थ पर विचार करना भी जरूरी है।
उनके अनुसार, जन्माष्टमी व्यक्ति को अपनी व्यस्त दिनचर्या से थोड़ी देर रुककर कृष्ण की शिक्षाओं पर विचार करने और उन्हें रोजमर्रा के जीवन में अपनाने का अवसर देती है।
गौरवव सैक्सेना: कृष्ण की बहुमुखी भूमिका से प्रेरणा
अभिनेता गौरवव सैक्सेना कृष्ण की बहुमुखी व्यक्तित्व से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। वह कृष्ण को एक साथ प्रेम करने वाले पुत्र, विश्वसनीय मित्र, मार्गदर्शक, योद्धा और नेता के रूप में देखते हैं।
उनके लिए यह इस बात का उदाहरण है कि किसी व्यक्ति को केवल एक पहचान से परिभाषित नहीं किया जा सकता। परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग भूमिकाएं निभाने की क्षमता भी एक बड़ी ताकत है।
गौरवव का मानना है कि कृष्ण की विशेषता केवल उनकी शक्ति में नहीं थी, बल्कि लोगों और परिस्थितियों को समझने की उनकी क्षमता में भी थी। शांत रहकर रणनीति बनाना और साथ ही संवेदनशील बने रहना उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
सान्वी तलवार: कर्म और नेतृत्व का संदेश
अभिनेत्री सान्वी तलवार भी कृष्ण की उस सीख को महत्वपूर्ण मानती हैं जिसमें व्यक्ति से अपने प्रयास पर ध्यान देने और परिणाम को लेकर अत्यधिक चिंतित न होने की बात कही गई है।
उनके अनुसार, मेहनत, तैयारी और ईमानदारी हमारे नियंत्रण में हैं, लेकिन हर परिणाम हमारे हाथ में नहीं होता। इसलिए सफलता को कृतज्ञता के साथ और असफलता को सीख के रूप में स्वीकार करना चाहिए।
सान्वी कृष्ण के योद्धा और नेता वाले रूप से भी प्रभावित हैं। उनके लिए वास्तविक ताकत केवल लड़ने में नहीं, बल्कि यह समझने में है कि किस चीज के लिए खड़ा होना जरूरी है।
जन्माष्टमी का संदेश आज भी प्रासंगिक
2026 की जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जा रही है और इस अवसर पर देशभर में धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। दिल्ली में भी मध्यरात्रि के आसपास विशेष पूजा और जन्मोत्सव आयोजित किए जाते हैं।
इन कलाकारों की बातें अलग-अलग हैं, लेकिन उनका मूल संदेश एक जैसा दिखाई देता है—कृष्ण की शिक्षाएं केवल धार्मिक ग्रंथों या त्योहारों तक सीमित नहीं हैं। कर्म पर ध्यान देना, सही निर्णय लेना, महत्वाकांक्षा और संतोष में संतुलन रखना, कठिन समय में उम्मीद बनाए रखना और परिस्थितियों के अनुसार अपनी भूमिका निभाना आज भी व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में उतना ही महत्वपूर्ण है।
यही शायद जन्माष्टमी की सबसे बड़ी खूबसूरती है। भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हुए लोग केवल उनकी बाल लीलाओं और दिव्य स्वरूप को याद नहीं करते, बल्कि उनके जीवन और गीता के संदेशों से अपने वर्तमान जीवन के लिए भी दिशा लेने की कोशिश करते हैं।
