10 सितंबर, 2026 (भारत बानी ब्यूरो): भारत में मौसमी फ्लू और खासकर H1N1 के मामलों में बढ़ोतरी के बीच फ्लू वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। जिस Northern Hemisphere (NH) फ्लू वैक्सीन को वर्तमान में भारत में घूम रहे वायरस स्ट्रेन से बेहतर मेल खाने वाला माना जा रहा है, उसकी आपूर्ति सीमित है। ऐसे में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने लोगों को उपलब्ध Southern Hemisphere (SH) फ्लू वैक्सीन के इस्तेमाल का विकल्प सुझाया है।
ICMR का कहना है कि भारत में मौजूदा सर्विलांस डेटा से पता चलता है कि यहां प्रसारित हो रहे इन्फ्लुएंजा वायरस का मिलान Northern Hemisphere के लिए WHO द्वारा सुझाई गई वैक्सीन संरचना से अधिक करीब है। इसलिए NH वैक्सीन उपलब्ध होने पर उसे प्राथमिकता देना बेहतर है। लेकिन इसकी अनुपलब्धता की स्थिति में SH वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा सकता है और NH वैक्सीन उपलब्ध होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार आगे की रणनीति तय की जा सकती है।
दिल्ली में H1N1 ने बढ़ाई चिंता
दिल्ली में इस साल H1N1 संक्रमण विशेष रूप से चर्चा में है। 20 अगस्त तक दिल्ली में 2,602 मौसमी इन्फ्लुएंजा मामलों की सूचना मिली थी, जिनमें 1,777 मामले H1N1 के थे। फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ा है।
हालांकि, ICMR और स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में किसी नए या असामान्य H1N1 वायरस स्ट्रेन के उभरने के संकेत नहीं मिले हैं। मौजूदा वायरस को मौसमी इन्फ्लुएंजा के सामान्य पैटर्न के अनुरूप माना जा रहा है।
ICMR ने क्यों सुझाई दूसरी वैक्सीन?
फ्लू वायरस लगातार बदलते रहते हैं और अलग-अलग मौसमों के लिए WHO वैक्सीन में शामिल किए जाने वाले वायरस स्ट्रेन की संरचना की समीक्षा करता है। Northern और Southern Hemisphere के लिए वैक्सीन संरचना अलग हो सकती है क्योंकि दोनों क्षेत्रों में फ्लू के मौसम और वायरस के प्रसार का समय अलग होता है।
ICMR की मौजूदा सलाह इसी बात को ध्यान में रखती है। निगरानी में भारत में पाए जा रहे वायरस और NH वैक्सीन की अनुशंसित संरचना के बीच बेहतर समानता देखी गई है। इसलिए NH वैक्सीन को आदर्श विकल्प माना गया है। लेकिन अगर यह बाजार में उपलब्ध नहीं है, तो SH वैक्सीन को पूरी तरह छोड़ने के बजाय उपलब्ध वैक्सीन से सुरक्षा लेने पर विचार किया जा सकता है।
क्या Southern Hemisphere वैक्सीन बेअसर है?
नहीं। SH वैक्सीन का इस्तेमाल करने का मतलब यह नहीं है कि वह भारत में फैल रहे फ्लू वायरस के खिलाफ कोई सुरक्षा नहीं देती। इसमें भी कई ऐसे इन्फ्लुएंजा स्ट्रेन शामिल होते हैं जो भारत में प्रसारित हो सकते हैं।
हालांकि, वैक्सीन की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसमें मौजूद वायरस स्ट्रेन और उस समय आबादी में फैल रहे वायरस के बीच कितना अच्छा मेल है। इसलिए ICMR ने NH वैक्सीन को प्राथमिकता दी है, लेकिन उसकी कमी के दौरान उपलब्ध SH वैक्सीन को विकल्प माना है।
किसे वैक्सीन लेने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए?
यह सवाल खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि हर व्यक्ति के लिए फ्लू वैक्सीन जरूरी होने की बात नहीं कही गई है। अगस्त में ICMR ने कहा था कि भारत सरकार पूरी आबादी के लिए मौसमी फ्लू या H1N1 वैक्सीन की सार्वभौमिक सिफारिश नहीं कर रही है।
ICMR के अनुसार, कुछ 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड यानी कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के लिए फ्लू वैक्सीन पर विशेष रूप से विचार किया जा सकता है। अन्य जोखिम वाले लोगों के मामले में भी व्यक्तिगत स्थिति के आधार पर डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।
बच्चों, बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों में फ्लू के गंभीर होने का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। ऐसे मामलों में वैक्सीन लेने या न लेने का फैसला डॉक्टर से व्यक्तिगत जोखिम और लाभ पर चर्चा के बाद करना बेहतर है।
अगर NH वैक्सीन नहीं मिल रही तो क्या करें?
ICMR की मौजूदा सलाह का व्यावहारिक संदेश साफ है—सिर्फ इसलिए टीकाकरण को अनिश्चित समय तक टालना जरूरी नहीं कि पसंदीदा NH वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
यदि किसी व्यक्ति के लिए फ्लू वैक्सीन लेना चिकित्सकीय रूप से उचित है और NH वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, तो डॉक्टर SH वैक्सीन को विकल्प के रूप में विचार कर सकते हैं। बाद में NH वैक्सीन उपलब्ध होने पर आगे की जरूरत और समय डॉक्टर तय कर सकते हैं।
हालांकि, वैक्सीन लेने के बाद भी फ्लू से बचाव की अन्य सावधानियां जरूरी हैं। हाथों की नियमित सफाई, बीमार व्यक्ति के साथ नजदीकी संपर्क से बचना और बीमार होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखना संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीवायरल या एंटीबायोटिक लेने से बचने की सलाह दी है।
क्या आपको वैक्सीन का इंतजार करना चाहिए?
इसका जवाब हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं है। यदि आप कम जोखिम वाले स्वस्थ व्यक्ति हैं, तो वैक्सीन की जरूरत के बारे में डॉक्टर से चर्चा की जा सकती है। लेकिन यदि आप ऐसे समूह में आते हैं जिसे फ्लू से गंभीर बीमारी का अधिक खतरा हो सकता है, तो केवल NH वैक्सीन की कमी के कारण टीकाकरण को लंबे समय तक टालना उचित है या नहीं—इस पर डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
ICMR का मौजूदा रुख यही है कि NH वैक्सीन उपलब्ध होने पर उसे प्राथमिकता दी जाए, लेकिन उसकी कमी के दौरान उपयुक्त SH वैक्सीन को विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
साथ ही, विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा H1N1 वृद्धि को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार निगरानी में किसी नए या असामान्य वायरस स्ट्रेन का संकेत नहीं मिला है। फिर भी बढ़ते मामलों के बीच जोखिम वाले लोगों को सतर्क रहना, लक्षण गंभीर होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना और टीकाकरण का फैसला व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर करना महत्वपूर्ण है।
