10 सितंबर, 2026 (भारत बानी ब्यूरो): मानसिक स्वास्थ्य उपचार लंबे समय से एक ऐसी चुनौती से जूझ रहा है, जिसमें एक ही बीमारी से पीड़ित अलग-अलग मरीजों पर एक ही दवा या थेरेपी का असर अलग हो सकता है। किसी व्यक्ति को पहली दवा से राहत मिल जाती है, जबकि दूसरे को कई उपचार आजमाने पड़ सकते हैं। इसी समस्या को कम करने के लिए चिकित्सा विज्ञान में Precision Psychiatry यानी सटीक एवं व्यक्तिगत मनोरोग चिकित्सा की अवधारणा तेजी से विकसित हो रही है।
Precision psychiatry का उद्देश्य मरीज की बीमारी को केवल लक्षणों के आधार पर देखने के बजाय उसकी जैविक विशेषताओं, मस्तिष्क से जुड़े संकेतों, आनुवंशिक जानकारी, जीवनशैली और उपचार के पिछले अनुभवों को एक साथ समझकर उपचार तय करना है। हाल में प्रकाशित एक Nature Reviews Drug Discovery लेख के अनुसार, यह क्षेत्र मानसिक विकारों के पीछे मौजूद न्यूरोबायोलॉजिकल प्रक्रियाओं और biomarkers को उपचार के विकास से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
अभी क्यों जरूरी है Precision Psychiatry?
डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर, स्किजोफ्रेनिया और एंग्जायटी जैसे मानसिक स्वास्थ्य विकारों में उपचार की प्रतिक्रिया व्यक्ति-व्यक्ति में काफी अलग हो सकती है। वर्तमान व्यवस्था में डॉक्टर अक्सर लक्षणों, बीमारी के इतिहास, उम्र, अन्य स्वास्थ्य स्थितियों और पहले के उपचारों के आधार पर दवा चुनते हैं।
यह तरीका कई मरीजों में प्रभावी है, लेकिन कुछ लोगों में सही दवा और सही खुराक तक पहुंचने में समय लग सकता है। बार-बार दवा बदलने की प्रक्रिया से उपचार में देरी, दुष्प्रभाव और मरीज के उपचार छोड़ने का जोखिम बढ़ सकता है।
Precision psychiatry इसी trial-and-error approach को कम करने की कोशिश करती है। American Psychiatric Association के अनुसार, इस क्षेत्र में neuroscience, clinical information, population-level data, neuroimaging, electrophysiology, behavioral science, machine learning और pharmacotherapy जैसे विभिन्न स्रोतों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
Biomarkers बन सकते हैं महत्वपूर्ण आधार
Precision psychiatry में biomarkers की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Biomarker ऐसा मापने योग्य जैविक संकेत है, जो शरीर या मस्तिष्क की किसी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दे सकता है।
शोधकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या brain imaging, electrophysiological measurements, molecular markers या अन्य जैविक संकेतों की मदद से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि कोई मरीज किस उपचार का बेहतर जवाब देगा।
मसलन, भविष्य में डॉक्टर के पास केवल यह जानकारी न हो कि मरीज को depression है, बल्कि उसके पास यह भी संकेत हो सकते हैं कि मरीज में बीमारी से जुड़ी कौन-सी जैविक प्रक्रिया अधिक सक्रिय है और किस तरह का उपचार उस प्रक्रिया को बेहतर तरीके से target कर सकता है।
Nature Mental Health में प्रकाशित शोध और विचारों में भी biomarkers तथा अन्य objective measurements के जरिए psychiatric disorders को अधिक सटीक समूहों में बांटने और उपचार को उनके अनुरूप करने की संभावना पर चर्चा की गई है।
Genetic testing से क्या बदलेगा?
Precision psychiatry का एक प्रमुख क्षेत्र pharmacogenomics है। इसमें मरीज के genes से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल यह समझने के लिए किया जाता है कि उसका शरीर किसी विशेष दवा को किस तरह metabolise कर सकता है और दवा के असर या side effects की संभावना कैसी हो सकती है।
इससे कुछ मामलों में डॉक्टर को संभावित रूप से उन दवाओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है जिन्हें मरीज बेहतर तरीके से सहन कर सकता है।
हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि pharmacogenomics अभी ऐसा सटीक उपकरण नहीं बन पाया है जो हर मरीज के लिए पहली बार में सही psychiatric medicine चुन दे। 2024 की एक systematic review में पाया गया कि उपलब्ध pharmacogenomic scores उपचार के परिणामों में सीमित मात्रा में variation समझाते हैं और इन्हें सीधे clinical practice में इस्तेमाल करने के लिए अभी और मजबूत evidence की जरूरत है।
AI और मशीन लर्निंग की बढ़ती भूमिका
Artificial Intelligence precision psychiatry को आगे बढ़ाने वाला एक अन्य महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है। मरीज की clinical history, symptoms, medication response, brain imaging और अन्य data को एक साथ analyse करके AI-based models उपचार की संभावित प्रतिक्रिया का अनुमान लगाने में मदद कर सकते हैं।
ऐसे prediction models पर पिछले दो दशकों में काफी शोध हुआ है, लेकिन उनकी वास्तविक clinical utility, bias और अलग-अलग आबादी में generalisability अभी महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं।
इसलिए AI को डॉक्टर के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि clinical decision-support tool के रूप में देखना अधिक व्यावहारिक है।
भारत के लिए भी बड़ी संभावना
भारत जैसे विविध आबादी वाले देश में precision psychiatry की संभावनाएं खास महत्व रखती हैं। भारतीय आबादी में genetic diversity काफी अधिक है और psychiatric treatment से जुड़े pharmacogenomic data की उपलब्धता अभी सीमित रही है।
2026 में प्रकाशित एक भारतीय अध्ययन ने psychiatric medications के metabolism से जुड़े pharmacogenomic landscape को समझने की कोशिश की और इस क्षेत्र में भारतीय मरीजों से जुड़े अधिक डेटा की आवश्यकता पर जोर दिया।
भविष्य में यदि भारतीय आबादी के लिए पर्याप्त और विविध clinical तथा genetic datasets तैयार होते हैं, तो treatment-response prediction को स्थानीय आबादी के अनुरूप विकसित करना संभव हो सकता है।
मरीजों के लिए संभावित फायदे
Precision psychiatry सफलतापूर्वक विकसित होती है तो मरीजों को कई स्तरों पर फायदा मिल सकता है। सबसे बड़ा संभावित लाभ सही उपचार तक जल्दी पहुंचना हो सकता है।
इसके अलावा गलत दवा के कारण होने वाले side effects को कम करने, treatment resistance की पहचान जल्दी करने और कुछ मरीजों में relapse के जोखिम का बेहतर अनुमान लगाने में भी मदद मिल सकती है।
यह approach मानसिक स्वास्थ्य उपचार को अधिक patient-centred बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम हो सकती है, क्योंकि इसमें व्यक्ति की विशिष्ट biological और clinical profile को उपचार योजना का हिस्सा बनाया जाता है।
लेकिन अभी रास्ते में कई चुनौतियां
Precision psychiatry को लेकर उत्साह के बावजूद इसे अभी पूरी तरह स्थापित clinical practice नहीं माना जा सकता। मानसिक स्वास्थ्य विकारों में genes, environment, life experiences और brain biology के बीच संबंध बेहद जटिल हैं।
इसके अलावा biomarkers की विश्वसनीयता, AI models में bias, data privacy, लागत, healthcare infrastructure और अलग-अलग जातीय एवं भौगोलिक आबादी में research results की applicability जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण हैं।
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एक अकेला biomarker या genetic test आमतौर पर किसी व्यक्ति के पूरे मानसिक स्वास्थ्य की तस्वीर नहीं बता सकता। इसलिए भविष्य की precision psychiatry संभवतः कई प्रकार के data को जोड़कर काम करेगी।
डॉक्टर की भूमिका बनी रहेगी अहम
Precision psychiatry का उद्देश्य डॉक्टर को हटाना नहीं, बल्कि डॉक्टर को बेहतर जानकारी उपलब्ध कराना है। American Psychiatric Association भी इसे clinical expertise का विकल्प नहीं बल्कि उसका पूरक बताती है।
इसका मतलब है कि भविष्य में मरीज का treatment plan clinical assessment, patient preference और डॉक्टर के अनुभव के साथ biomarkers, genetics और AI-based predictions को जोड़कर तैयार किया जा सकता है।
भविष्य में बदल सकता है मानसिक स्वास्थ्य उपचार
Precision psychiatry अभी विकास के दौर में है, लेकिन इसका लक्ष्य महत्वपूर्ण है—“एक बीमारी, एक इलाज” की सोच से आगे बढ़कर “एक मरीज, उसके लिए सबसे उपयुक्त इलाज” की दिशा में जाना।
यदि biomarkers, genetics, AI और clinical data को विश्वसनीय तरीके से जोड़ा जा सका, तो इससे psychiatric treatment को अधिक व्यक्तिगत, तेज और प्रभावी बनाने की संभावना है। लेकिन इस बदलाव को व्यापक clinical practice तक पहुंचने के लिए बड़े, विविध और उच्च गुणवत्ता वाले अध्ययनों की जरूरत होगी।
इसलिए precision psychiatry को अभी भविष्य की तकनीक भर नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य उपचार को अधिक व्यक्तिगत बनाने की दिशा में चल रहा वैज्ञानिक संक्रमण माना जा सकता है।
