18 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो) : सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने 9 सरकारी बैंकों को तीन बड़ी यूनिट में मिलाने का आदेश दिया है। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने इस वायरल पोस्ट को फर्जी बताया है। शोसल मीडिया प्लैटफॉर्मों में तेजी से शेयर हो रहे डॉक्यमेंट्स को ऐसा बनाया गया है, जैसे वित्त मंत्रालय की ओर से जारी भारत का आधिकारिक राजपत्र (गजट) हो।
इसमें झूठा दावा किया गया है कि सरकार ने सरकारी बैंकों के बड़े मर्जर को मंजूरी दे दी है और नौ बैंकों को तीन यूनिट में मिलाया जाएगा। फर्जी अधिसूचना के मुताबिक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में मिलाकर नया “SBI Group” बनाय जाएगा।
इसमें यह भी दावा था कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब एंड सिंध बैंक को पंजाब नेशनल बैंक में मर्ज किया जाएगा, जबकि केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूको बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा के अंदर लाया जाएगा।
PIB ने ‘गजट’ को बताया पूरी तरह फर्जी
PIB फैक्ट चेक यूनिट ने इस अधिसूचना को खारिज करते हुए साफ किया कि सोशल मीडिया पर घूम रहा यह डॉक्यूमेंट फर्जी है। यह डॉक्यूमेंट मैसेजिंग प्लैटफॉर्म और सोशल मीडिया पर सामने आया और फिर एक्स पर ज्यादा चर्चा में आया। इसके फैलने से लोगों में असमंजस पैदा हो गया कि क्या सरकार ने सरकारी बैंकों में एक और मर्जर की शुरुआत कर दी है।यह मामला जून में वायरल हुए ऐसे ही एक फर्जी दावे के बाद सामने आया है। उस फर्जी ग्राफिक में दावा किया गया था कि SBI, PNB और केनरा बैंक का मर्जर होगा, जिस पर तब भी PIB फैक्ट चेक ने सफाई जारी की थी।
असली मर्जर 2019 में हुआ था
2019 में असली मर्जर हुआ था, इसलिए ऐसे दावे भरोसेमंद लगते हैं। ऐसे दावे बार-बार सामने आ रहे हैं, जबकि भारत में PSU बैंकों के असली मर्जर का इतिहास रहा है। 2019 में सरकार ने 10 सरकारी बैंकों को चार इकाइयों में मिला दिया था, जिससे कुल PSU बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई थी। यही पुराना मर्जर ऐसा असली आधार बनता है कि फर्जी मर्जर डॉक्यूमेंट भरोसेमंद लगने लगते हैं, खासकर बैंक ग्राहकों और कर्मचारियों को, जिन्होंने ऐसे बदलाव देखे हैं।
PSU बैंक मर्जर से पहले क्या होता है?
सरकारी बैंकों का असली मर्जर होने के लिए एक औपचारिक प्रक्रिया जरूरी होती है। यह सोशल मीडिया पर घूम रहे किसी बिना अधिकार वाले डॉक्यूमेंट से तय नहीं हो सकता। सरकारी फैक्ट-चेकर्स के मुताबिक, ऐसे किसी भी बड़े बैंकिंग मर्जर के लिए वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की भूमिका, साथ ही जरूरी संसदीय या नियामक मंजूरी होनी चाहिए।
