21 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो)। अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध तथा खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के बीच दुनिया के प्रमुख ऊर्जा मार्गों में शामिल हॉर्मुज जलडमरूमध्य से कमोडिटी जहाजों की आवाजाही में तेज गिरावट दर्ज की गई है। शिपिंग डेटा के अनुसार, पिछले सप्ताहांत इस जलमार्ग से केवल 12 कमोडिटी जहाज गुजरे, जबकि इससे पहले वाले सप्ताहांत यह संख्या 35 थी। इससे वैश्विक तेल, गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य से युद्ध शुरू होने से पहले प्रतिदिन लगभग 125 बड़े वाणिज्यिक जहाज गुजरते थे। इनमें तेल टैंकर, गैस कैरियर, बल्क कैरियर और कंटेनर जहाज शामिल थे। यह मार्ग दुनिया की दैनिक कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आपूर्ति के लगभग पांचवें हिस्से के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण रहा है। <Cite refs={[“turn0news0″,”turn0search10”]} />
सप्ताहांत में जहाजों की संख्या घटकर 12 रह गई
केप्लर के प्रारंभिक शिपिंग डेटा के अनुसार, रविवार को दो रिफाइंड तेल उत्पाद ले जाने वाले टैंकर और दो खाली बल्क एवं गैस कैरियर जलडमरूमध्य से बाहर निकले। वहीं, दो छोटे तेल टैंकर खाड़ी में दाखिल हुए।
शनिवार को पांच जहाज कृषि उत्पाद, तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) और उर्वरक लेकर जलमार्ग से बाहर निकले। इसके अतिरिक्त, एक खाली बहुत बड़े गैस कैरियर ने खाड़ी में प्रवेश किया।
यह आंकड़े उन जहाजों पर आधारित हैं जिन्हें शिपिंग ट्रैकिंग प्रणाली के माध्यम से पहचाना जा सका है। कुछ जहाजों द्वारा अपने ट्रांसपोंडर बंद कर दिए जाने की संभावना के कारण वास्तविक आवाजाही इससे अधिक हो सकती है। <Cite refs={[“turn0news0″,”turn0news27”]} />
अमेरिका-ईरान गतिरोध से बढ़ा सुरक्षा जोखिम
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में कमी का प्रमुख कारण अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य एवं कूटनीतिक गतिरोध बताया जा रहा है। क्षेत्र में हमलों, समुद्री सुरक्षा जोखिमों और जहाजों की निगरानी से संबंधित चिंताओं ने शिपिंग कंपनियों के लिए परिचालन संबंधी अनिश्चितता बढ़ा दी है।
कई जहाजों के मार्ग बदलने, यात्रा स्थगित करने या ट्रांसपोंडर बंद करके आगे बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। ऐसी परिस्थितियों में शिपिंग कंपनियों को माल की सुरक्षा, बीमा लागत, जहाजों की उपलब्धता और संभावित देरी जैसे पहलुओं पर विचार करना पड़ता है।
रॉयटर्स के अनुसार, हॉर्मुज से दिखाई देने वाली जहाज आवाजाही अब बेहद सीमित स्तर पर पहुंच गई है, हालांकि मध्य पूर्व के कुछ तेल उत्पादक देश ट्रांसपोंडर बंद करके भी तेल का निर्यात जारी रखे हुए हैं। <Cite refs={[“turn0news0″,”turn0news21”]} />
सऊदी अरब का तेल निर्यात फिर बढ़ा
जहां हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दिखाई देने वाले कमोडिटी जहाजों की संख्या में गिरावट आई है, वहीं सऊदी अरब के तेल निर्यात में सितंबर के दौरान सुधार दर्ज किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब का तेल निर्यात सितंबर में अब तक 40 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक हो गया है। अगस्त में यह लगभग 24 लाख बैरल प्रतिदिन तक गिर गया था, जो कम से कम 2013 के बाद का सबसे निचला स्तर बताया गया है।
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हूती हमलों के बाद ऊर्जा कंपनी सऊदी अरामको ने सितंबर और अक्टूबर में हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते अधिक तेल भेजने का फैसला किया। इससे समुद्री मार्ग पर निर्भरता बढ़ी है और क्षेत्रीय सुरक्षा जोखिमों के बावजूद तेल प्रवाह को बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। <Cite refs={[“turn0news0″,”turn0news25”]} />
13 टैंकरों ने 3.4 करोड़ बैरल कच्चा तेल पहुंचाया
केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, 13 सितंबर से शुरू हुए सप्ताह में कुल 13 तेल टैंकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकले। इन टैंकरों में बड़ी क्षमता वाले क्रूड कैरियर भी शामिल थे और कुल मिलाकर लगभग 3.4 करोड़ बैरल कच्चा तेल ले जाया गया।
इस मात्रा में सऊदी अरब की हिस्सेदारी लगभग आधी थी, जबकि लगभग 35 प्रतिशत मात्रा इराक से संबंधित थी। यह आंकड़ा बताता है कि कुल जहाज आवाजाही में गिरावट के बावजूद कुछ तेल उत्पादक देश सीमित समुद्री मार्गों के माध्यम से निर्यात जारी रखने में सक्षम हैं।
हालांकि, जहाजों की कम संख्या और मार्ग से जुड़ी अनिश्चितता भविष्य में निर्यात की गति तथा माल ढुलाई की लागत पर प्रभाव डाल सकती है।
मध्य पूर्व से तेल प्रवाह अभी भी पूरी तरह बाधित नहीं
जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों ने 18 सितंबर को जारी एक टिप्पणी में कहा कि क्षेत्रीय व्यवधानों के बावजूद मध्य पूर्व से तेल का प्रवाह अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार, पिछले 10 दिनों में कुल तेल प्रवाह औसतन 1.71 करोड़ बैरल प्रतिदिन रहा, जो 2025 के औसत से लगभग 61 लाख बैरल प्रतिदिन कम है।
विश्लेषकों ने सऊदी अरब के तेल प्रवाह में बदलाव को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उपग्रह डेटा के अनुसार, पिछले छह दिनों में हॉर्मुज के रास्ते सऊदी तेल की आवाजाही औसतन 29 लाख बैरल प्रतिदिन रही, जबकि अगस्त में यह लगभग 7 लाख बैरल प्रतिदिन थी। <Cite refs={[“turn0news0″,”turn0news22”]} />
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि शिपिंग ट्रैफिक में गिरावट और वास्तविक तेल प्रवाह के बीच अंतर हो सकता है। कुछ जहाजों की ट्रैकिंग उपलब्ध नहीं होने तथा वैकल्पिक परिचालन व्यवस्था अपनाए जाने से केवल दिखाई देने वाले जहाजों की संख्या के आधार पर कुल ऊर्जा आपूर्ति का पूरा आकलन करना कठिन है।
वैश्विक तेल और गैस बाजार पर असर
हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। यदि जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक कम रहती है, तो तेल और LNG की आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ सकता है। इससे माल ढुलाई, बीमा और ऊर्जा आयात की लागत में वृद्धि की संभावना रहती है।
तेल की कीमतों पर प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करेगा, जिनमें उत्पादक देशों का निर्यात, वैकल्पिक पाइपलाइन मार्ग, भंडार का स्तर, जहाजों की उपलब्धता और अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक स्थिति शामिल हैं।
हालिया रिपोर्टों में यह भी संकेत मिला है कि सऊदी अरब के तेल निर्यात में सुधार और संभावित आपूर्ति बहाली की उम्मीदों के कारण बाजार की प्रतिक्रिया एकसमान नहीं रही। कुछ बाजारों में तेल की कीमतों पर दबाव कम हुआ, जबकि समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। <Cite refs={[“turn0news22″,”turn0news23”]} />
भारत सहित आयातक देशों के लिए चिंता
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान का असर उन देशों पर भी पड़ सकता है जो मध्य पूर्व से कच्चा तेल, LPG और अन्य ऊर्जा उत्पाद आयात करते हैं। भारत के लिए यह समुद्री मार्ग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की ऊर्जा आपूर्ति का एक हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आने वाले आयात पर निर्भर करता है।
यदि जहाजों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़े या माल ढुलाई और बीमा लागत बढ़े, तो आयातित ऊर्जा उत्पादों की लागत पर दबाव आ सकता है। हालांकि, घरेलू कीमतों पर वास्तविक असर सरकार की नीतियों, आयात स्रोतों, अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और आपूर्ति की अवधि सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा।
आगे की स्थिति कूटनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही की स्थिति अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष एवं कूटनीतिक प्रयासों से जुड़ी हुई है। यदि क्षेत्रीय तनाव कम होता है और जहाजों को सुरक्षित मार्ग की गारंटी मिलती है, तो वाणिज्यिक आवाजाही में सुधार संभव है। इसके विपरीत, नए हमलों या समुद्री प्रतिबंधों से शिपिंग गतिविधियां और प्रभावित हो सकती हैं।
फिलहाल, कमोडिटी जहाजों की संख्या में तेज गिरावट के बावजूद मध्य पूर्व से तेल का प्रवाह पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। सऊदी अरब समेत कुछ उत्पादक देश निर्यात जारी रखने के वैकल्पिक तरीकों और सीमित समुद्री मार्गों का उपयोग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में जहाजों की आवाजाही, तेल निर्यात और अमेरिका-ईरान वार्ता की दिशा वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेतक बने रहेंगे।
