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21 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो)। भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश फिलीपींस में आयोजित आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) विशेषज्ञ कार्य समूह की समुद्री सुरक्षा संयुक्त गतिविधि में शामिल हुए हैं। इस बहुपक्षीय समुद्री गतिविधि की मेजबानी जापान और फिलीपींस संयुक्त रूप से कर रहे हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना, समुद्री क्षेत्र की निगरानी क्षमता बढ़ाना और विभिन्न देशों की नौसेनाओं के बीच परिचालन समन्वय को बेहतर बनाना है।

अमेरिकी सातवीं फ्लीट की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस गतिविधि में भारत सहित ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, जापान, मलेशिया, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर और अमेरिका की नौसैनिक इकाइयां शामिल हैं। गतिविधि के तहत जहाजों, विमानों और सैन्य कर्मियों की भागीदारी के माध्यम से समुद्री सुरक्षा तथा संभावित मानवीय आपदा के दौरान संयुक्त प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है। <Cite refs={[“turn1search0”]} />

भारतीय नौसेना के दो युद्धपोतों की भागीदारी

इस संयुक्त समुद्री गतिविधि में भारत की ओर से शिवालिक श्रेणी का स्टील्थ मल्टी-रोल फ्रिगेट आईएनएस सह्याद्रि और कोरा श्रेणी का कॉर्वेट आईएनएस कुलिश भाग ले रहे हैं।

आईएनएस सह्याद्रि भारतीय नौसेना का स्वदेशी डिजाइन और निर्माण वाला युद्धपोत है। यह बहु-भूमिका अभियानों के लिए तैयार किया गया है और भारतीय नौसेना की लंबी दूरी की समुद्री तैनाती में शामिल रहा है। दूसरी ओर, आईएनएस कुलिश एक मिसाइल कॉर्वेट है, जिसे समुद्री निगरानी और परिचालन अभियानों के लिए उपयोग किया जाता है।

दोनों जहाजों की भागीदारी भारत की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री साझेदारों के साथ नियमित नौसैनिक गतिविधियों और रक्षा सहयोग को दर्शाती है। हालांकि, इस गतिविधि के प्रत्येक चरण में दोनों जहाजों की विशिष्ट जिम्मेदारियां और अभ्यास संबंधी विवरण अलग-अलग हो सकते हैं।

नौ देशों की नौसैनिक भागीदारी

अमेरिकी सातवीं फ्लीट की रिपोर्ट के अनुसार, गतिविधि में नौ देशों की नौसैनिक इकाइयां सक्रिय रूप से तैनात हैं। इनमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, जापान, मलेशिया, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर और अमेरिका शामिल हैं।

भाग लेने वाले प्रमुख नौसैनिक प्लेटफॉर्मों में अमेरिकी नौसेना का यूएसएस कैनबरा, पी-8ए पोसीडॉन समुद्री गश्ती विमान, जापान का हेलीकॉप्टर विध्वंसक जेएस इसे, ऑस्ट्रेलिया का एचएमएएस पर्थ और फिलीपींस के युद्धपोत शामिल हैं।

इस बहुराष्ट्रीय भागीदारी का उद्देश्य अलग-अलग देशों की नौसेनाओं को एक साथ काम करने का व्यावहारिक अनुभव देना है। संयुक्त गतिविधियों के दौरान संचार व्यवस्था, परिचालन समन्वय, समुद्री स्थिति की जानकारी साझा करना और आपदा की स्थिति में प्रतिक्रिया जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाता है। <Cite refs={[“turn1search0”]} />

सुबिक बे में होगा तटीय चरण

गतिविधि का तटीय चरण फिलीपींस के सुबिक बे, ज़ाम्बालेस क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा। इस चरण में आपदा प्रतिक्रिया से संबंधित टेबलटॉप अभ्यास, विशेषज्ञों के बीच विचार-विनिमय, भाग लेने वाले जहाजों पर ओपन हाउस और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम शामिल होंगे।

टेबलटॉप अभ्यास में प्रतिभागी किसी संभावित आपदा या संकट की काल्पनिक स्थिति पर चर्चा करते हैं और विभिन्न एजेंसियों तथा सैन्य इकाइयों के बीच प्रतिक्रिया की प्रक्रिया का अभ्यास करते हैं। ऐसे अभ्यासों से वास्तविक संकट के दौरान जिम्मेदारियों, संचार चैनलों और समन्वय की जरूरतों को समझने में मदद मिलती है।

जहाजों पर ओपन हाउस कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय अधिकारियों, नागरिकों और अन्य प्रतिभागियों को नौसैनिक प्लेटफॉर्मों तथा समुद्री सुरक्षा से जुड़े कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है।

समुद्री चरण में परिचालन क्षमता का अभ्यास

तटीय चरण के बाद गतिविधि का समुद्री चरण आयोजित किया जाएगा। इस दौरान भाग लेने वाले देशों की नौसैनिक इकाइयां विभिन्न समुद्री कौशल और संयुक्त परिचालन क्षमताओं का अभ्यास करेंगी।

इस प्रकार की गतिविधियों में समुद्री क्षेत्र की निगरानी, सूचना साझा करना, संचार, आपदा प्रतिक्रिया और विभिन्न नौसेनाओं के बीच सहयोग जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य भाग लेने वाले देशों की परिचालन क्षमता और आपसी समन्वय को बेहतर बनाना है।

अमेरिकी सातवीं फ्लीट के अनुसार, इस गतिविधि का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य मानवीय सहायता और आपदा राहत से जुड़े परिदृश्यों में बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना है। <Cite refs={[“turn1search0”]} />

ADMM-Plus का महत्व

आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) आसियान सदस्य देशों और उसके आठ संवाद साझेदार देशों के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग का मंच है। इसके साझेदारों में भारत, ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, रूस और अमेरिका शामिल हैं।

ADMM-Plus का उद्देश्य क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और विकास के लिए रक्षा प्रतिष्ठानों के बीच संवाद तथा व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देना है। मंच के अंतर्गत समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत, शांति स्थापना, सैन्य चिकित्सा, मानवीय माइन एक्शन और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जाता है। <Cite refs={[“turn0search7”]} />

समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ कार्य समूह की संयुक्त गतिविधियां इस व्यापक ढांचे के तहत विभिन्न देशों को साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशिक्षण और परिचालन अनुभव साझा करने का अवसर देती हैं।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका

भारतीय नौसेना पिछले कुछ वर्षों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ समुद्री सहयोग और नौसैनिक संपर्क बढ़ा रही है। भारत की एक्ट ईस्ट नीति और सागर—क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास की अवधारणा के तहत भारतीय नौसैनिक जहाज दक्षिण-पूर्व एशिया और अन्य साझेदार देशों का दौरा करते रहे हैं।

भारत और फिलीपींस के बीच रक्षा एवं समुद्री सहयोग में भी विस्तार हुआ है। दोनों देशों के नौसैनिक बलों के बीच पेशेवर आदान-प्रदान, संयुक्त गतिविधियां और बंदरगाह यात्राएं आयोजित की जाती रही हैं। भारतीय रक्षा मंत्रालय के अनुसार, नवंबर 2025 में आईएनएस सह्याद्रि ने मनीला पहुंचने से पहले फिलीपींस की नौसेना के साथ अभ्यास किया था। उस दौरान संचार अभ्यास, नौवहन गतिविधियां, विजिट बोर्ड सर्च एंड सीजर (VBSS) ड्रिल और उड़ान संचालन शामिल थे। <Cite refs={[“turn0search5”]} />

क्षेत्रीय सहयोग पर भारत का जोर

फिलीपींस में ADMM-Plus समुद्री गतिविधि में भारतीय नौसेना की भागीदारी को क्षेत्रीय साझेदारों के साथ व्यावहारिक सुरक्षा सहयोग के संदर्भ में देखा जा सकता है। बहुपक्षीय अभ्यासों से अलग-अलग देशों की नौसेनाओं को साझा प्रक्रियाओं, संचार और संकट प्रतिक्रिया के क्षेत्र में अनुभव प्राप्त होता है।

समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों में प्राकृतिक आपदाएं, समुद्री दुर्घटनाएं, मानवीय संकट और समुद्री क्षेत्र में निगरानी जैसी चुनौतियां शामिल हो सकती हैं। ऐसे में विभिन्न देशों के बीच समन्वय और सूचना साझा करना राहत एवं प्रतिक्रिया अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

फिलीपींस में आयोजित यह गतिविधि भारत सहित भाग लेने वाले देशों को समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यावहारिक साझेदारी को मजबूत करने का अवसर प्रदान कर रही है।

Bharat Baani Bureau

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