25 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): वायु प्रदूषण को आमतौर पर बाहरी वातावरण, ट्रैफिक और औद्योगिक गतिविधियों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन घर के अंदर की हवा भी स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। खाना पकाने के दौरान निकलने वाला धुआं, धूल, फफूंद, तंबाकू का धुआं, पालतू जानवरों से जुड़े एलर्जेन और खराब वेंटिलेशन घर के अंदर प्रदूषकों का स्तर बढ़ा सकते हैं। ऐसे में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल मददगार हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार केवल एयर प्यूरीफायर पर निर्भर रहना फेफड़ों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है।
अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, घर के अंदर हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करना, उचित वेंटिलेशन बनाए रखना और जरूरत के अनुसार एयर फिल्ट्रेशन का इस्तेमाल करना जरूरी है। एयर प्यूरीफायर हवा में मौजूद कुछ कणों को कम कर सकता है, लेकिन यह प्रदूषण के हर स्रोत को खत्म नहीं करता।
एयर प्यूरीफायर क्या कर सकता है?
एयर प्यूरीफायर, विशेष रूप से HEPA फिल्टर वाले उपकरण, हवा में मौजूद महीन कणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। इनमें धूल, परागकण, धुएं के कण और कुछ अन्य सूक्ष्म प्रदूषक शामिल हो सकते हैं। इनका इस्तेमाल खासतौर पर उन कमरों में उपयोगी हो सकता है, जहां बच्चे, बुजुर्ग, एलर्जी से पीड़ित लोग या सांस संबंधी बीमारी वाले व्यक्ति अधिक समय बिताते हैं।
हालांकि, एयर प्यूरीफायर की क्षमता उसके फिल्टर, हवा साफ करने की दर, कमरे के आकार और उपकरण के सही रखरखाव पर निर्भर करती है। EPA के अनुसार, कोई भी एयर क्लीनर घर के सभी प्रदूषकों को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता। कुछ उपकरण मुख्य रूप से कणों को फिल्टर करते हैं, जबकि गैसीय प्रदूषकों को हटाने के लिए अलग तरह की तकनीक की आवश्यकता हो सकती है।
इसलिए एयर प्यूरीफायर को प्रदूषण नियंत्रण की एक अतिरिक्त व्यवस्था के रूप में देखना चाहिए, न कि प्रदूषण के मूल स्रोत का विकल्प।
प्रदूषण के स्रोत को खत्म करना सबसे जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, घर के अंदर हवा की गुणवत्ता सुधारने का सबसे प्रभावी तरीका प्रदूषण के स्रोत को कम करना या समाप्त करना है। यदि घर में कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है, तो एयर प्यूरीफायर के बजाय सबसे पहला कदम घर के अंदर धूम्रपान पूरी तरह बंद करना होना चाहिए। इसी तरह, खाना पकाते समय गैस या अन्य ईंधन से निकलने वाले धुएं को बाहर निकालने के लिए एग्जॉस्ट फैन या चिमनी का इस्तेमाल करना जरूरी है।
रसोई में वेंटिलेशन की कमी से नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, महीन कण और अन्य प्रदूषक जमा हो सकते हैं। खाना पकाते समय एग्जॉस्ट सिस्टम चालू रखना और उसकी नियमित सफाई करना प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकता है।
इसके अलावा, घर में धूल जमा न होने देना, फफूंद की समस्या को ठीक करना, नमी को नियंत्रित रखना और ऐसे रसायन वाले उत्पादों का सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए, जो हवा में हानिकारक पदार्थ छोड़ सकते हैं।
साफ हवा के लिए वेंटिलेशन जरूरी
घर के अंदर प्रदूषण कम करने के लिए ताजी हवा का उचित आवागमन महत्वपूर्ण है। जब बाहरी हवा की गुणवत्ता अच्छी हो, तो खिड़कियां और दरवाजे खोलकर वेंटिलेशन बढ़ाया जा सकता है। रसोई और बाथरूम में बाहर की ओर हवा निकालने वाले एग्जॉस्ट फैन प्रदूषकों और अतिरिक्त नमी को हटाने में मदद करते हैं।
हालांकि, जब बाहर वायु प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक हो, तब खिड़कियां खोलना उचित नहीं हो सकता। ऐसे समय में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर नजर रखना और घर में फिल्ट्रेशन सिस्टम का इस्तेमाल करना उपयोगी हो सकता है। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार, साफ हवा का बेहतर प्रवाह और HEPA एयर क्लीनर बंद स्थानों में हवा में मौजूद कुछ संक्रमणकारी कणों की मात्रा कम करने में मदद कर सकते हैं।
वेंटिलेशन और एयर फिल्ट्रेशन को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार संतुलित करना जरूरी है।
एयर प्यूरीफायर खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
यदि कोई व्यक्ति घर के लिए एयर प्यूरीफायर खरीदना चाहता है, तो केवल कीमत या ब्रांड के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए। कमरे के आकार के अनुरूप उपकरण चुनना महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार, Clean Air Delivery Rate (CADR) यह समझने में मदद करता है कि कोई उपकरण कितनी तेजी से हवा से कणों को हटाने में सक्षम है।
खरीदारी के समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए:
- कमरे के आकार के अनुसार उपयुक्त क्षमता वाला उपकरण चुनें।
- महीन कणों को फिल्टर करने के लिए HEPA फिल्टर वाले मॉडल पर विचार करें।
- फिल्टर बदलने और साफ करने की लागत को ध्यान में रखें।
- निर्माता के निर्देशों के अनुसार फिल्टर की नियमित देखभाल करें।
- ओजोन पैदा करने वाले एयर प्यूरीफायर से बचें।
- उपकरण को ऐसे कमरे में रखें, जहां परिवार के संवेदनशील सदस्य अधिक समय बिताते हों।
भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की सलाह में भी एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करते समय उपकरण की तकनीक, कमरे के आकार, सफाई क्षमता और रखरखाव पर ध्यान देने की बात कही गई है। ओजोन उत्पन्न करने वाले उपकरणों से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि ओजोन फेफड़ों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है।
फिल्टर की सफाई और बदलाव को न करें नजरअंदाज
एयर प्यूरीफायर का फिल्टर गंदा या अत्यधिक भरा हुआ होने पर उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए फिल्टर को निर्माता के निर्देशों के अनुसार साफ करना या बदलना चाहिए। केवल उपकरण खरीद लेना पर्याप्त नहीं है; उसका नियमित रखरखाव भी उतना ही जरूरी है।
केंद्रीय एयर कंडीशनिंग या HVAC सिस्टम में लगे फिल्टर की भी समय-समय पर जांच की जानी चाहिए। फिल्टर बदलने का अंतराल उपकरण के प्रकार, इस्तेमाल और निर्माता की सलाह पर निर्भर करता है।
बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को अतिरिक्त सावधानी
वायु प्रदूषण का प्रभाव सभी लोगों पर समान नहीं होता। अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), हृदय रोग या अन्य पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों को प्रदूषित हवा से अधिक परेशानी हो सकती है। बच्चों और बुजुर्गों को भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
यदि किसी व्यक्ति को प्रदूषण के दौरान सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न, लगातार खांसी, घरघराहट या सांस संबंधी लक्षणों में बढ़ोतरी महसूस हो, तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। पहले से किसी बीमारी के लिए निर्धारित दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर के निर्देश के अनुसार जारी रखना जरूरी है।
फेफड़ों की सुरक्षा के लिए अपनाएं समग्र रणनीति
घर के अंदर हवा को साफ रखने के लिए किसी एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय कई कदम एक साथ उठाने चाहिए। प्रदूषण के स्रोतों को कम करना, खाना पकाते समय एग्जॉस्ट का इस्तेमाल, उचित वेंटिलेशन, धूम्रपान से दूरी, नमी और फफूंद पर नियंत्रण तथा जरूरत के अनुसार HEPA एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल मिलकर बेहतर सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।
निष्कर्ष के तौर पर, एयर प्यूरीफायर घर के अंदर प्रदूषण कम करने में मददगार उपकरण है, लेकिन यह प्रदूषण के स्रोत को खत्म करने और पर्याप्त वेंटिलेशन का विकल्प नहीं है। फेफड़ों की बेहतर सुरक्षा के लिए घर की हवा की गुणवत्ता पर नियमित ध्यान देना और सांस संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज न करना आवश्यक है।
स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण सूचना: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। किसी व्यक्ति की बीमारी, लक्षण या उपचार के संबंध में निर्णय लेने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
