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25 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो)। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में हाल के हफ्तों में बुखार, डेंगू और श्वसन संक्रमणों के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। शहर के कई अस्पतालों में बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और थकान की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। कुछ निजी अस्पतालों में बाह्य रोगी विभागों (OPD) पर दबाव बढ़ने, वार्डों के भरने और आपातकालीन विभागों में बिस्तर मिलने के लिए लंबा इंतजार करने की जानकारी सामने आई है।

डॉक्टरों के अनुसार, इस समय चेन्नई में केवल डेंगू ही नहीं, बल्कि इन्फ्लुएंजा, अन्य वायरल श्वसन संक्रमण और कुछ मामलों में रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (RSV) जैसे संक्रमण भी सामने आ रहे हैं। आने वाले उत्तर-पूर्वी मानसून से पहले मौसम में बदलाव और रुक-रुककर हो रही बारिश संक्रमणों के प्रसार तथा मच्छरों के प्रजनन को प्रभावित कर सकती है। <Cite refs={[“turn833547search0″,”turn833547search2″,”turn833547search9”]}/>

अस्पतालों में बढ़ रहा मरीजों का दबाव

चेन्नई के कई निजी अस्पतालों ने श्वसन संक्रमण, इन्फ्लुएंजा और डेंगू के मरीजों में वृद्धि की सूचना दी है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ अस्पतालों में आपातकालीन विभाग से भर्ती होने वाले मरीजों को बिस्तर मिलने के लिए 12 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। हालांकि, डॉक्टरों ने बताया कि अधिकांश मरीजों में संक्रमण हल्का रहा और वे दवाओं, आराम तथा पर्याप्त तरल पदार्थों के सेवन से ठीक हो रहे हैं।

बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, किडनी की बीमारी या कैंसर जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। कुछ मरीजों को सांस लेने में परेशानी के कारण नेबुलाइजेशन या नसों के माध्यम से तरल पदार्थ देने की आवश्यकता भी पड़ रही है। <Cite refs={[“turn833547search0″,”turn833547search2”]}/>

कौन-कौन से संक्रमण फैल रहे हैं?

चिकित्सकों के अनुसार, चेन्नई में मौजूदा बुखार के मामलों में कई तरह के वायरस की भूमिका हो सकती है। इनमें रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस, एडेनोवायरस, राइनोवायरस और पैराइन्फ्लुएंजा जैसे श्वसन वायरस शामिल हैं। इन्फ्लुएंजा, जिसमें H1N1 भी शामिल है, और डेंगू के मामलों की भी पहचान की जा रही है।

श्वसन संक्रमण आम तौर पर संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या निकट संपर्क के माध्यम से फैल सकते हैं। इसके विपरीत, डेंगू संक्रमित Aedes मच्छर के काटने से फैलता है। इसलिए दोनों संक्रमणों की रोकथाम के उपाय अलग-अलग होते हैं।

यदि किसी व्यक्ति को बुखार के साथ खांसी, गले में खराश और नाक बहने जैसे लक्षण हैं, तो श्वसन संक्रमण की संभावना पर विचार किया जा सकता है। वहीं, तेज बुखार के साथ सिरदर्द, शरीर में दर्द और मांसपेशियों में दर्द डेंगू सहित कई अन्य संक्रमणों में भी हो सकता है। केवल लक्षणों के आधार पर किसी संक्रमण की पुष्टि नहीं की जा सकती। <Cite refs={[“turn833547search2″,”turn833547search3″,”turn833547search9”]}/>

बारिश और मच्छरों के प्रजनन का संबंध

चेन्नई में रुक-रुककर हो रही बारिश और आने वाले उत्तर-पूर्वी मानसून के कारण घरों, निर्माण स्थलों और खुले क्षेत्रों में पानी जमा होने की संभावना बढ़ जाती है। जमा हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल स्थान बन सकता है और इससे डेंगू के प्रसार का जोखिम बढ़ सकता है।

ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन ने बुखार के मामलों में वृद्धि के बीच मच्छर नियंत्रण और निगरानी गतिविधियां तेज की हैं। इनमें घर-घर जाकर जांच, मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान, जमा पानी को हटाना और जागरूकता अभियान शामिल हैं।

नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे घरों के आसपास पानी जमा न होने दें। गमलों, पुराने टायरों, पानी के कंटेनरों, छतों और निर्माण स्थलों पर जमा पानी की नियमित जांच करना महत्वपूर्ण है। <Cite refs={[“turn833547search5″,”turn833547search8″,”turn833547news13”]}/>

चेन्नई में डेंगू के मामलों की स्थिति

सितंबर में चेन्नई में डेंगू के मामलों में वृद्धि की अलग-अलग रिपोर्टें सामने आई हैं। 16 सितंबर तक तमिलनाडु में वर्ष की शुरुआत से 16,334 डेंगू मामले और नौ संबंधित मौतें दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने इस वृद्धि को मौसमी बदलावों के संदर्भ में देखा और इसे असामान्य नहीं बताया। 2025 की इसी अवधि में 15,688 मामले और 13 मौतें दर्ज की गई थीं, जबकि 2024 में मामलों की संख्या काफी अधिक थी। <Cite refs={[“turn833547news18”]}/>

चेन्नई से जुड़ी स्थानीय रिपोर्टों में अगस्त और सितंबर के दौरान बुखार के मामलों में वृद्धि का उल्लेख है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में इस्तेमाल किए गए आंकड़ों की समयावधि और निगरानी के तरीके अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी एक आंकड़े को पूरे शहर में संक्रमण की वास्तविक स्थिति का पूर्ण प्रतिनिधि मानने से पहले आधिकारिक स्वास्थ्य विभाग के अद्यतन आंकड़ों को देखना जरूरी है।

हर बुखार डेंगू नहीं होता

डॉक्टरों ने लोगों को आगाह किया है कि बुखार होने पर उसे तुरंत डेंगू मान लेना सही नहीं है। वायरल संक्रमण, इन्फ्लुएंजा, डेंगू और अन्य बीमारियों के लक्षणों में समानता हो सकती है। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच और आवश्यकता के अनुसार प्रयोगशाला परीक्षण जरूरी हो सकते हैं।

डेंगू का संदेह होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं लेना जोखिमपूर्ण हो सकता है। विशेष रूप से दर्द और बुखार कम करने वाली दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए, क्योंकि कुछ दवाएं डेंगू के संदिग्ध मरीजों में रक्तस्राव के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

लंबे समय तक बना रहने वाला बुखार, तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी या नए लक्षण सामने आने पर मरीज को चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। <Cite refs={[“turn833547search4″,”turn833547search10”]}/>

बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान

चेन्नई के अस्पतालों में बच्चों और किशोरों के बीच भी लंबे समय तक बुखार, अत्यधिक थकान और भोजन या तरल पदार्थ लेने में कमी जैसे लक्षणों की सूचना मिली है। कुछ मामलों में बुखार से संबंधित भ्रम या असामान्य व्यवहार भी देखा गया है।

बाल रोग विशेषज्ञों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बुखार कम होने के बाद यदि बच्चा असामान्य रूप से सुस्त हो, पानी या भोजन लेने से मना करे, लगातार उल्टी करे या सांस लेने में परेशानी महसूस करे, तो तत्काल चिकित्सा सहायता ली जानी चाहिए।

डेंगू के संभावित चेतावनी संकेतों में पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, रक्तस्राव, अत्यधिक सुस्ती और तरल पदार्थ लेने से इनकार शामिल हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। <Cite refs={[“turn833547search2″,”turn833547search9”]}/>

संक्रमण से बचाव के लिए क्या करें?

चेन्नई में मौसमी संक्रमणों के जोखिम को कम करने के लिए नागरिक कुछ बुनियादी सावधानियां अपना सकते हैं:

  • घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
  • मच्छरों से बचने के लिए रिपेलेंट, पूरी बांह के कपड़े और आवश्यकतानुसार मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
  • हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से साफ करें।
  • खांसी या छींक आने पर मुंह और नाक ढकें।
  • श्वसन संबंधी लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाले स्थानों में मास्क पहनने और दूसरों से निकट संपर्क कम करने पर विचार करें।
  • पर्याप्त पानी पिएं और आराम करें।
  • बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं न लें।
  • लगातार या तेज बुखार होने पर डॉक्टर से परामर्श लें।

इन्फ्लुएंजा से बचाव के लिए टीकाकरण कुछ उच्च जोखिम वाले समूहों में उपयोगी हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को टीकाकरण संबंधी सलाह अपने चिकित्सक से लेनी चाहिए। <Cite refs={[“turn833547news17″,”turn833547search0″,”turn833547search4”]}/>

स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और तैयारी

चेन्नई में बुखार के मामलों में वृद्धि के बीच स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मच्छर नियंत्रण, घर-घर निगरानी और अस्पतालों की तैयारी पर ध्यान बढ़ाया है। उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान जलभराव, जल निकासी और मच्छरों के प्रजनन स्थलों पर नियंत्रण महत्वपूर्ण रहेगा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मौसमी संक्रमणों का प्रभाव केवल अस्पतालों की क्षमता पर नहीं, बल्कि लोगों की समय पर जांच कराने, सही उपचार लेने और रोकथाम के उपाय अपनाने पर भी निर्भर करता है।

निष्कर्ष

चेन्नई में बुखार के मामलों में वृद्धि का संबंध कई मौसमी संक्रमणों से है। इन्फ्लुएंजा और अन्य श्वसन वायरस के साथ डेंगू का प्रसार स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। बारिश, नमी और जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना सकते हैं, जबकि भीड़भाड़ और निकट संपर्क श्वसन संक्रमणों के प्रसार में भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि, उपलब्ध सरकारी आकलनों के अनुसार डेंगू के मामलों में वृद्धि को मौसमी संदर्भ में देखा जा रहा है। नागरिकों को घबराने के बजाय रोकथाम, स्वच्छता, मच्छर नियंत्रण और समय पर चिकित्सा परामर्श पर ध्यान देना चाहिए। लगातार बुखार या चेतावनी संकेत दिखाई देने पर स्वयं उपचार करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना सबसे महत्वपूर्ण कदम है

Bharat Baani Bureau

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