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28 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): देशभर के मोबाइल फोन रिटेलर्स ने 2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’ मनाने का फैसला किया है। ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) ने यह विरोध प्रदर्शन UPI के पात्र व्यापारी लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) के खिलाफ घोषित किया है।

गांधी जयंती के दिन होने वाले इस विरोध के दौरान मोबाइल दुकानदार एक दिन के लिए UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने और अपने UPI QR कोड को काले कपड़े से ढकने की योजना बना रहे हैं। रिटेलर्स का कहना है कि उनका विरोध UPI या डिजिटल भुगतान व्यवस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि व्यापारी भुगतान पर अतिरिक्त लागत लगाए जाने को लेकर है।

15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR ढांचा

रिपोर्टों के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के पात्र person-to-merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया जाना है। यह शुल्क प्रत्येक लेनदेन पर अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा।

वहीं, person-to-person (P2P) लेनदेन इस शुल्क के दायरे में नहीं होंगे। ₹2,000 तक के पात्र छोटे व्यापारी लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे।

इस बदलाव को लेकर व्यापारिक संगठनों की चिंता मुख्य रूप से उन कारोबारों को लेकर है जहां मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमत आम तौर पर ₹2,000 से काफी अधिक होती है और ग्राहक बड़ी रकम का भुगतान UPI के माध्यम से करते हैं।

AIMRA की ‘Zero MDR’ की मांग

AIMRA का कहना है कि UPI व्यापारी भुगतान को Zero MDR व्यवस्था के तहत जारी रखा जाना चाहिए। संगठन के अनुसार, मोबाइल रिटेल कारोबार में मार्जिन पहले ही सीमित हैं और डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क से छोटे दुकानदारों की आय पर असर पड़ सकता है।

AIMRA के उपाध्यक्ष और दिल्ली-NCR क्षेत्र के अध्यक्ष तरविंदर सिंह ने कहा कि 2 अक्टूबर का प्रदर्शन इस अतिरिक्त लागत को लेकर रिटेलर्स की चिंता को सामने रखने के लिए किया जा रहा है। संगठन ने सरकार से व्यापारी UPI भुगतान पर शून्य MDR व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है।

₹5 लाख से ₹30 लाख मासिक UPI कारोबार का उदाहरण

AIMRA ने वित्त मंत्री को भेजे अपने प्रतिनिधित्व में अनुमान लगाया है कि ₹5 लाख से ₹30 लाख तक का मासिक UPI कारोबार करने वाले छोटे मोबाइल रिटेलर्स पर नए MDR के कारण करीब ₹2,000 से ₹12,000 प्रति माह का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।

संगठन का दावा है कि देशभर के छोटे मोबाइल रिटेलर्स पर मिलाकर यह बोझ करीब ₹40 करोड़ प्रति माह और लगभग ₹500 करोड़ सालाना तक पहुंच सकता है। ये आंकड़े AIMRA के अनुमान हैं और संगठन ने इन्हें सरकार के समक्ष अपनी मांग के समर्थन में रखा है।

QR कोड पर काला कपड़ा बांधेंगे रिटेलर्स

‘No UPI Day’ के तहत रिटेलर्स अपने दुकानों पर लगे UPI QR कोड को काले कपड़े से ढकेंगे। इसका उद्देश्य ग्राहकों को यह बताना होगा कि उस दिन मोबाइल रिटेल दुकानों पर UPI भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा।

AIMRA ने स्पष्ट किया है कि यह कदम डिजिटल इंडिया या UPI के विरोध में नहीं है। संगठन का कहना है कि वह चाहता है कि डिजिटल भुगतान प्रणाली का विस्तार जारी रहे, लेकिन व्यापारियों के लिए इसकी लागत भी कम और टिकाऊ बनी रहे।

ग्राहकों पर क्या होगा असर?

2 अक्टूबर को विरोध में शामिल मोबाइल दुकानों पर ग्राहक UPI से भुगतान नहीं कर पाएंगे। ऐसे में ग्राहकों को नकद या दुकानदार द्वारा स्वीकार किए जाने वाले अन्य भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।

हालांकि, यह विरोध मोबाइल रिटेलर्स तक सीमित है। इसका मतलब यह नहीं है कि 2 अक्टूबर को पूरे देश में UPI सेवा बंद रहेगी। अन्य दुकानों और सेवाओं पर UPI सामान्य रूप से उपलब्ध रह सकता है, जब तक संबंधित व्यापारी स्वयं इस विरोध में शामिल न हो।

UPI पर शुल्क को लेकर व्यापक बहस

UPI पर MDR लागू किए जाने को लेकर व्यापारिक संगठनों और डिजिटल भुगतान क्षेत्र में व्यापक बहस चल रही है। सरकार द्वारा प्रस्तावित व्यवस्था का दायरा मुख्य रूप से ₹2,000 से अधिक के पात्र merchant transactions तक है।

Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, 15 अक्टूबर से UPI पर शुल्क व्यवस्था में बदलाव से भुगतान कंपनियों के राजस्व मॉडल में भी बदलाव आएगा। रिपोर्ट ने यह भी बताया कि PhonePe और Google Pay वर्तमान में UPI लेनदेन में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं।

दूसरी ओर, छोटे व्यापारियों पर असर को लेकर अलग-अलग व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई है। कुछ संगठनों का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क का भार अंततः व्यापारियों की लागत बढ़ा सकता है।

2 अक्टूबर के बाद क्या?

मोबाइल रिटेलर्स का 2 अक्टूबर का विरोध फिलहाल एक दिवसीय प्रतीकात्मक कार्रवाई के रूप में घोषित किया गया है। AIMRA की मुख्य मांग यह है कि व्यापारी UPI भुगतान पर Zero MDR व्यवस्था जारी रखी जाए।

अब सरकार और संबंधित नियामकीय संस्थाओं की ओर से व्यापारिक संगठनों की मांग पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर रहेगी। खासतौर पर 15 अक्टूबर से प्रस्तावित नई शुल्क व्यवस्था से पहले बातचीत के जरिए किसी बदलाव या स्पष्टीकरण की संभावना पर कारोबारी संगठनों की नजर होगी।

मोबाइल रिटेलर्स के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके कारोबार में उच्च मूल्य के उत्पादों की बिक्री होती है और ग्राहक तेजी से डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में UPI भुगतान पर किसी भी अतिरिक्त लागत का सीधा संबंध उनके भुगतान खर्च और लाभ मार्जिन से जुड़ सकता है।

Bharat Baani Bureau

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