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29 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): पोप लियो XIV ने रूस और यूक्रेन से चार साल से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत की मेज पर आने की अपील की है। फ्रांस की चार दिवसीय यात्रा से लौटते समय विमान में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पोप ने कहा कि रूस, यूक्रेन और अन्य देशों के नेताओं को एक साथ बैठकर संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान तलाशना चाहिए।

पोप ने कहा कि कैथोलिक चर्च की जिम्मेदारी है कि वह शांति, मानव जीवन और मानवीय गरिमा के मूल्यों को बढ़ावा दे। उन्होंने नेताओं से ऐसे रास्ते तलाशने का आग्रह किया, जिनसे युद्ध जारी रखने के बजाय बातचीत के माध्यम से विवादों का समाधान किया जा सके।

‘बातचीत के लिए एक साथ बैठें नेता’

पोप लियो XIV ने कहा कि चर्च लगातार रूस और यूक्रेन समेत विभिन्न देशों के नेताओं से एक साथ आने, बैठने और बातचीत करने का आह्वान करता रहेगा। उनके मुताबिक, मौजूदा युद्धों को जारी रखने के बजाय समस्याओं का समाधान खोजने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि यह सवाल राजनीतिक या गैर-राजनीतिक होने का नहीं है, बल्कि मानव जीवन की गरिमा और उसके महत्व को सामने रखने का है। पोप ने इस बात पर भी जोर दिया कि दुनिया में स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर अधिक संसाधन खर्च किए जा सकते हैं और हथियारों पर खर्च को कम किया जा सकता है।

परमाणु हथियारों को लेकर चिंता

पोप ने बातचीत के दौरान उन राष्ट्रीय नेताओं पर भी चिंता जताई, जो परमाणु हथियारों और अधिक विनाशकारी युद्धों की चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया पहले ही ऐसे संघर्षों का सामना कर रही है, जिनका मानवीय जीवन पर गंभीर असर पड़ रहा है।

उन्होंने बढ़ते सैन्य खर्च और हथियार उद्योग का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया में हथियारों पर खर्च की जाने वाली बड़ी धनराशि का इस्तेमाल भूख, आवास और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से निपटने में किया जा सकता है।

पोप ने सैन्य खर्च को लेकर यह भी कहा कि हथियारों पर बढ़ता खर्च तनाव को बढ़ा सकता है और इससे नए संघर्षों का खतरा पैदा हो सकता है।

यूरोपीय नेताओं से भी समझौते की अपील

रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर पोप की यह टिप्पणी उनके फ्रांस दौरे के दौरान दिए गए संदेश के कुछ घंटे बाद आई। फ्रांस के मेट्ज़ शहर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने यूरोपीय नेताओं से शांति हासिल करने के लिए कुछ मुद्दों पर समझौते और त्याग के लिए तैयार रहने का आह्वान किया था।

पोप ने यूरोप के भविष्य को लेकर अपने संबोधन में संवाद और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका संदेश था कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों को केवल सैन्य शक्ति के माध्यम से हल करने के बजाय कूटनीतिक रास्तों को भी लगातार तलाशना चाहिए।

चार साल से जारी है रूस-यूक्रेन युद्ध

रूस और यूक्रेन के बीच पूर्ण पैमाने पर युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था और तब से दोनों देशों के बीच संघर्ष जारी है। युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है, लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और यूक्रेन के कई हिस्सों में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।

संघर्ष का समाधान खोजने के लिए अलग-अलग समय पर कई कूटनीतिक प्रयास हुए हैं। हालांकि, युद्ध समाप्त करने के लिए रूस और यूक्रेन के बीच किसी व्यापक और स्थायी समझौते पर सहमति नहीं बन सकी है।

पोप लियो XIV की ताजा अपील इसी लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच आई है। उन्होंने किसी एक पक्ष की राजनीतिक स्थिति का समर्थन करने के बजाय बातचीत और शांति की आवश्यकता पर जोर दिया।

वेटिकन की कूटनीतिक भूमिका

रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान वेटिकन ने मानवीय और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए संवाद का रास्ता बनाए रखने की कोशिश की है। पोप ने भी कई मौकों पर युद्ध के मानवीय प्रभाव को कम करने और शांति की दिशा में कदम उठाने की अपील की है।

पोप लियो XIV ने कहा कि चर्च का उद्देश्य राजनीतिक पक्ष लेना नहीं, बल्कि मानव जीवन और गरिमा की रक्षा के मूल्यों को सामने रखना है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में एक ऐसी आवाज की जरूरत है जो हिंसा के बजाय बातचीत और समाधान की दिशा में लोगों का ध्यान आकर्षित करे।

हथियारों के बजाय स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च का संदेश

पोप की ताजा टिप्पणी में हथियारों पर होने वाले खर्च का मुद्दा भी प्रमुख रहा। उन्होंने कहा कि दुनिया में सैन्य क्षेत्र पर खर्च की जाने वाली बड़ी धनराशि को स्वास्थ्य, शिक्षा, भूख, आवास और रोजगार जैसी मानवीय जरूरतों की ओर मोड़ा जा सकता है।

उनका संदेश केवल रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं था। पोप ने अन्य देशों के नेताओं से भी संवाद और शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि हिंसा और ताकत के जरिए अपनी इच्छा थोपने की कोशिशों के बजाय बातचीत और वार्ता के जरिए मतभेदों को सुलझाने की आवश्यकता है।

शांति प्रयासों पर टिकी नजर

पोप लियो XIV की अपील ऐसे समय में सामने आई है जब रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की जरूरत लगातार बनी हुई है। उनके बयान से यह स्पष्ट है कि कैथोलिक चर्च युद्ध के बजाय बातचीत और मानवीय गरिमा को केंद्र में रखने की अपनी अपील जारी रखना चाहता है।

हालांकि, पोप की अपील अपने आप में रूस और यूक्रेन के बीच किसी नए समझौते का संकेत नहीं है। युद्ध का राजनीतिक और सैन्य समाधान दोनों पक्षों के बीच बातचीत तथा व्यापक अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर निर्भर करेगा।

फिलहाल पोप लियो XIV ने दोनों देशों के नेताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश दिया है—बातचीत की मेज पर आएं, एक-दूसरे की बात सुनें और युद्ध जारी रखने के बजाय समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान तलाशें।

Bharat Baani Bureau

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