29 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 23 से 25 सितंबर तक वॉशिंगटन में हुई तीन दिवसीय शिखर बैठक ने दोनों देशों के बीच संवाद और कूटनीतिक संपर्क को आगे बढ़ाया, लेकिन व्यापार, ताइवान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ईरान जैसे प्रमुख मुद्दों पर कोई बड़ा समाधान सामने नहीं आया। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने संबंधों में स्थिरता और आगे बातचीत जारी रखने पर जोर दिया, लेकिन अमेरिका-चीन रणनीतिक प्रतिस्पर्धा की मूल वजहें अभी भी कायम हैं।
बैठक के बाद चीन और अमेरिका ने संबंधों को “रणनीतिक स्थिरता” पर आधारित रचनात्मक संबंध के रूप में विकसित करने की बात कही। चीन के अनुसार दोनों पक्ष सम्मान, निष्पक्षता और पारस्परिकता के आधार पर संबंध आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।
व्यापार तनाव में अस्थायी राहत
शिखर बैठक का सबसे महत्वपूर्ण व्यावहारिक पहलू दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव को कुछ समय के लिए नियंत्रित रखने की कोशिश रही। अमेरिका और चीन ने करीब 60 अरब डॉलर मूल्य के गैर-संवेदनशील उत्पादों के लिए टैरिफ में कटौती की सूची जारी की है। दोनों देशों की ओर से लगभग 30-30 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद इन सूचियों में शामिल हैं। हालांकि सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।
इसका अर्थ यह है कि व्यापार संबंधों में तत्काल टकराव को कम करने की कोशिश हुई है, लेकिन व्यापक व्यापार विवाद का स्थायी समाधान अभी नहीं हुआ है। अमेरिकी और चीनी अधिकारियों को आगे भी बाजार पहुंच, टैरिफ और तकनीकी व्यापार जैसे मुद्दों पर बातचीत करनी होगी।
ताइवान का मुद्दा बरकरार
शी और ट्रंप की बातचीत में ताइवान सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक बना रहा। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और अमेरिका से ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन नहीं करने की मांग करता रहा है।
बैठक के दौरान शी ने ताइवान के मुद्दे पर चीन की स्थिति दोहराई। दूसरी ओर, अमेरिका की ताइवान नीति में कोई व्यापक बदलाव घोषित नहीं किया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने बैठक के बाद भी ताइवान को लेकर मौजूदा नीति को जारी रखने की बात कही।
अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियारों की बिक्री भी बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच तनाव का प्रमुख कारण बनी हुई है। इस मुद्दे पर शिखर बैठक से कोई अंतिम समझौता सामने नहीं आया।
AI और तकनीकी प्रतिस्पर्धा पर भी मतभेद
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत तकनीक दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। अमेरिका चीन की तकनीकी क्षमता और रणनीतिक क्षेत्रों में उसकी बढ़ती भूमिका को लेकर चिंतित है, जबकि चीन अमेरिकी निर्यात नियंत्रण और तकनीकी प्रतिबंधों को अपने विकास के लिए बाधा मानता है।
बैठक में AI समेत तकनीकी सहयोग और प्रतिस्पर्धा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन किसी व्यापक नियामकीय समझौते की घोषणा नहीं हुई। इससे संकेत मिलता है कि दोनों देश इस क्षेत्र में संवाद बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन तकनीकी प्रतिस्पर्धा अभी खत्म नहीं हुई है।
ईरान और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा
शी और ट्रंप ने द्विपक्षीय संबंधों के अलावा ईरान और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। चीन और अमेरिका ने इस बात पर सहमति जताई कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से संबंधित अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करना चाहिए। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में किसी भी देश या संस्था द्वारा ट्रांजिट शुल्क लगाए जाने का भी विरोध किया।
हालांकि, ईरान को लेकर अमेरिका और चीन की व्यापक रणनीतिक प्राथमिकताओं में अंतर बना हुआ है। इसलिए इस क्षेत्र में बैठक से तत्काल किसी बड़े नीति बदलाव की उम्मीद नहीं बनी है।
कूटनीतिक माहौल रहा सकारात्मक
तीन दिवसीय यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच औपचारिक और प्रतीकात्मक कार्यक्रमों पर भी काफी जोर रहा। ट्रंप ने शी का व्हाइट हाउस में औपचारिक स्वागत किया। दोनों नेताओं ने चाय पर बातचीत की और अमेरिकी नेशनल आर्काइव्स का दौरा भी किया।
शी की यात्रा चीन के किसी राष्ट्रपति की 11 वर्षों में पहली व्हाइट हाउस यात्रा थी। दोनों नेताओं ने भविष्य में भी मुलाकात और संवाद जारी रखने की इच्छा जताई है। शी ने नवंबर में चीन में होने वाले APEC सम्मेलन और दिसंबर में अमेरिका में होने वाले G20 सम्मेलन में एक-दूसरे की भागीदारी का समर्थन करने की बात भी कही।
आगे की बातचीत पर टिकी नजर
शिखर बैठक ने अमेरिका और चीन के बीच संवाद के रास्ते खुले रखे हैं, लेकिन प्रमुख रणनीतिक मतभेद अभी भी मौजूद हैं। व्यापार में कुछ शुल्क राहत और संवाद की निरंतरता से तत्काल तनाव कम हो सकता है, लेकिन ताइवान, तकनीकी निर्यात नियंत्रण, AI, बाजार पहुंच और दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दों पर आगे भी बातचीत की आवश्यकता होगी।
बैठक के बाद सामने आए परिणामों को देखते हुए फिलहाल यह कहा जा सकता है कि अमेरिका-चीन संबंधों में संवाद और अस्थायी स्थिरता का प्रयास जारी है, जबकि मूलभूत मतभेदों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश बैठक में बनी सहमतियों को किस हद तक लागू करते हैं और क्या वे व्यापार तथा सुरक्षा से जुड़े कठिन मुद्दों पर आगे ठोस समझौते कर पाते हैं।
