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1 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): त्योहारी सीजन में मिठाइयों, दूध और दूध से बने उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को खाद्य सुरक्षा जांच तेज करने के निर्देश दिए हैं। 29 सितंबर को जारी विशेष फेस्टिव ड्राइव के तहत राज्यों से मिठाइयों, डेयरी उत्पादों, घी, खोया, पनीर समेत अधिक मांग वाली खाद्य वस्तुओं की जांच और सैंपलिंग बढ़ाने को कहा गया है।

FSSAI का यह निर्देश आगामी नवरात्रि और दिवाली के दौरान खाद्य पदार्थों की मांग में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए जारी किया गया है। प्राधिकरण ने मिलावट, नकली और असुरक्षित खाद्य उत्पादों की बिक्री रोकने के लिए निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई को तेज करने पर जोर दिया है।

दूध और डेयरी उत्पादों पर विशेष नजर

त्योहारी मौसम में दूध और दूध से बने उत्पादों की खपत बढ़ जाती है। FSSAI ने विशेष रूप से दूध, घी, खोया और पनीर जैसे उत्पादों को निगरानी के दायरे में रखने को कहा है। इसके अलावा मिठाइयां, नमकीन, पापड़/फ्रायम्स, खाद्य तेल और पेय पदार्थों की भी जांच की जाएगी।

प्राधिकरण के अनुसार, अलग-अलग क्षेत्रों में खाने की आदतों और मिलावट की संभावित प्रवृत्तियों को देखते हुए स्थानीय अधिकारी जांच के लिए अन्य खाद्य वस्तुओं को भी अभियान में शामिल कर सकते हैं।

हॉटस्पॉट और संवेदनशील इलाकों में होगी सैंपलिंग

FSSAI ने राज्यों के Designated Officers, Food Safety Officers और Central Food Safety Officers को अपने-अपने क्षेत्रों में निरीक्षण और सैंपलिंग करने के निर्देश दिए हैं।

जांच के लिए विशेष रूप से उन बाजारों और स्थानों पर ध्यान देने को कहा गया है जिन्हें खाद्य मिलावट की दृष्टि से हॉटस्पॉट या संवेदनशील माना जाता है। इसका उद्देश्य त्योहारी मांग बढ़ने के साथ बाजार में पहुंचने वाले असुरक्षित या मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले खाद्य उत्पादों की पहचान करना है।

‘Food Safety on Wheels’ से मौके पर जांच

FSSAI ने राज्यों को उपलब्धता के अनुसार Food Safety on Wheels (FSW) मोबाइल फूड टेस्टिंग यूनिट्स को प्रमुख बाजारों में तैनात करने को भी कहा है।

इन मोबाइल इकाइयों के जरिए मौके पर खाद्य पदार्थों की जांच की जा सकती है। FSSAI पहले भी इन मोबाइल परीक्षण इकाइयों का इस्तेमाल दूध और दूध उत्पादों में मिलावट की जांच के लिए करने के निर्देश देता रहा है।

मोबाइल टेस्टिंग यूनिट्स का इस्तेमाल केवल जांच के लिए ही नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा को लेकर भरोसा मजबूत करने के लिए भी किया जा सकता है।

जांच का डेटा रियल टाइम में दर्ज करना होगा

नए अभियान में एक महत्वपूर्ण निर्देश यह भी है कि निरीक्षण, सैंपलिंग और उनके नतीजों से संबंधित डेटा FoSCoS या FoSCoRIS पर रियल टाइम आधार पर दर्ज किया जाए। इससे अभियान के दौरान हुई कार्रवाई और उसके परिणामों की निगरानी की जा सकेगी।

FSSAI ने अपने निर्देश में इस मामले को महत्वपूर्ण बताते हुए राज्यों और क्षेत्रीय अधिकारियों से अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने को कहा है।

पनीर की लेबलिंग भी FSSAI के रडार पर

डेयरी उत्पादों को लेकर FSSAI की सक्रियता ऐसे समय में बढ़ी है जब प्राधिकरण ने हाल ही में गैर-दूधीय घटकों से बने उत्पादों को ‘पनीर’ के रूप में पेश किए जाने पर रोक लगाने के लिए एक ड्राफ्ट संशोधन प्रस्तावित किया है।

24 सितंबर 2026 को जारी प्रस्ताव में FSSAI ने कहा कि ‘Analogue in Dairy Context’ श्रेणी में आने वाले उत्पादों को अपनी नामकरण, लेबलिंग या मार्केटिंग में ‘Paneer’ शब्द का इस्तेमाल बंद करना होगा। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और संरचना के बारे में भ्रमित होने से बचाना है।

यह प्रस्ताव अभी ड्राफ्ट स्तर पर है और इसे अंतिम नियम नहीं माना जाना चाहिए।

उपभोक्ताओं के लिए भी सतर्क रहने की जरूरत

त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को भी खाद्य पदार्थ खरीदते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। खासकर पैकेज्ड डेयरी उत्पादों में लेबल, सामग्री, निर्माण और समाप्ति तिथि तथा संबंधित लाइसेंस/पंजीकरण संबंधी जानकारी देखना महत्वपूर्ण है।

खुले में बिकने वाली मिठाइयों और दूध से बने उत्पादों की खरीद में भी साफ-सफाई और भंडारण की स्थिति पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

FSSAI का ताजा अभियान मुख्य रूप से निगरानी, निरीक्षण और सैंपलिंग पर केंद्रित है। किसी विशेष उत्पाद या प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई जांच के नतीजों और लागू खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार होगी।

त्योहारी सीजन के दौरान बढ़ी मांग के बीच FSSAI और राज्यों की यह संयुक्त निगरानी खाद्य मिलावट और असुरक्षित उत्पादों की बिक्री पर नियंत्रण के प्रयास का हिस्सा है।

Bharat Baani Bureau

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