30 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): शरीर की चर्बी यानी Body Fat को अक्सर वजन बढ़ने और मोटापे से जोड़कर देखा जाता है। फिटनेस और सोशल मीडिया के दौर में बहुत कम बॉडी फैट को आकर्षक और स्वस्थ शरीर की निशानी के तौर पर भी पेश किया जाता है। लेकिन वैज्ञानिक शोध और विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर को पूरी तरह स्वस्थ रहने के लिए एक निश्चित मात्रा में वसा की जरूरत होती है।
वसा शरीर में ऊर्जा जमा करने से लेकर हार्मोन बनाने, शरीर का तापमान नियंत्रित करने और महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा तक कई जरूरी काम करती है। इसलिए लक्ष्य शरीर से हर संभव मात्रा में वसा हटाना नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर संरचना बनाए रखना होना चाहिए।
शरीर की वसा एक सक्रिय अंग की तरह काम करती है
वैज्ञानिक समझ में अब Body Fat को केवल निष्क्रिय ऊर्जा भंडार नहीं माना जाता। Adipose tissue यानी वसा ऊतक शरीर की कई जैविक प्रक्रियाओं में सक्रिय भूमिका निभाता है।
जब हम भोजन करते हैं तो शरीर कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा को अलग-अलग उपयोगी घटकों में बदलता है। जरूरत से ज्यादा ऊर्जा को शरीर वसा के रूप में जमा कर सकता है। जरूरत पड़ने पर यही जमा ऊर्जा शरीर के लिए ईंधन का काम करती है।
वसा कोशिकाएं कुछ ऐसे हार्मोन और संकेतक भी बनाती हैं जो शरीर को ऊर्जा की उपलब्धता के बारे में जानकारी देते हैं। इनमें लेप्टिन प्रमुख है, जो मस्तिष्क को शरीर में ऊर्जा भंडार की स्थिति के बारे में संकेत देता है।
शरीर को गर्म रखने में भी मदद करती है वसा
Body Fat का एक महत्वपूर्ण काम शरीर के तापमान को बनाए रखने में मदद करना है। त्वचा के नीचे मौजूद सफेद वसा की परत शरीर को इन्सुलेशन प्रदान करती है।
इसके अलावा शरीर में Brown Fat और Beige Fat जैसे वसा ऊतक भी पाए जाते हैं। इनमें मौजूद विशेष कोशिकाएं ऊर्जा का इस्तेमाल गर्मी पैदा करने के लिए कर सकती हैं। इस प्रक्रिया से शरीर को ठंडे वातावरण में तापमान बनाए रखने में मदद मिलती है।
महत्वपूर्ण अंगों के लिए सुरक्षा कवच
शरीर में मौजूद वसा महत्वपूर्ण अंगों के आसपास सुरक्षा और कुशन का काम भी कर सकती है। त्वचा के नीचे मौजूद वसा शरीर को बाहरी चोटों के प्रभाव से बचाने में योगदान देती है।
NIH के अनुसार, वसा शरीर के लिए ऊर्जा भंडार होने के साथ-साथ इन्सुलेशन और महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा में भी भूमिका निभाती है। वसा ऊतक ऊर्जा नियंत्रण और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया से जुड़े पदार्थ भी छोड़ता है।
बहुत कम Body Fat क्यों हो सकता है नुकसानदायक?
जिस तरह शरीर में अत्यधिक वसा स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ा सकती है, उसी तरह बहुत कम शरीर की वसा भी समस्या पैदा कर सकती है।
यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक बहुत कम कैलोरी लेता है या अत्यधिक डाइटिंग करता है, तो शरीर ऊर्जा बचाने की स्थिति में जा सकता है। पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध नहीं होने पर शरीर के कई सामान्य जैविक कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक कम वसा और अपर्याप्त ऊर्जा उपलब्धता से प्रतिरक्षा प्रणाली, हार्मोनल संतुलन, मांसपेशियों और हड्डियों पर असर पड़ सकता है। महिलाओं में बहुत कम Body Fat और लंबे समय तक ऊर्जा की कमी मासिक धर्म चक्र को प्रभावित कर सकती है, जबकि पुरुषों में हार्मोन और ऊर्जा स्तर प्रभावित हो सकते हैं।
हर व्यक्ति के लिए एक ही Body Fat प्रतिशत नहीं
Body Fat की कोई एक ऐसी प्रतिशत सीमा नहीं है जिसे हर व्यक्ति के लिए आदर्श कहा जा सके। उम्र, लिंग, शरीर की संरचना, आनुवंशिकता और शारीरिक गतिविधि जैसे कई कारक इसमें भूमिका निभाते हैं।
BBC की रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि सामान्य तौर पर स्वस्थ वयस्क पुरुषों में करीब 10–20 प्रतिशत और महिलाओं में करीब 20–29 प्रतिशत बॉडी फैट पाया जा सकता है। हालांकि इसे व्यक्तिगत लक्ष्य या चिकित्सकीय निदान नहीं माना जाना चाहिए।
एथलीटों में बॉडी फैट का स्तर अक्सर इससे कम हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति को एथलीट जैसी कम वसा वाली शरीर संरचना हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए।
ज्यादा Body Fat भी स्वास्थ्य के लिए जोखिम
इसका मतलब यह भी नहीं है कि अधिक शरीर की वसा स्वस्थ है। अत्यधिक Body Fat, विशेष रूप से Visceral Fat यानी पेट के अंदर अंगों के आसपास जमा वसा, कई स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ी है।
अधिक visceral fat शरीर में सूजन से जुड़े रसायनों को बढ़ा सकती है और इंसुलिन के काम में हस्तक्षेप कर सकती है। इससे टाइप-2 डायबिटीज और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
इसलिए स्वास्थ्य के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि शरीर में कितनी वसा है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि वसा कहां जमा है और शरीर की कुल संरचना कैसी है।
BMI हमेशा पूरी तस्वीर नहीं बताता
शरीर की संरचना समझने के लिए केवल वजन या BMI (Body Mass Index) पर निर्भर रहना भी पर्याप्त नहीं है। BMI यह नहीं बता सकता कि किसी व्यक्ति के वजन में कितना हिस्सा मांसपेशियों का है और कितना वसा का।
उदाहरण के लिए, अधिक मांसपेशियों वाला व्यक्ति BMI के आधार पर अधिक वजन वाला दिखाई दे सकता है, जबकि उसके शरीर में वसा अपेक्षाकृत कम हो सकती है। इसलिए कुछ परिस्थितियों में Body Composition का अलग से आकलन ज्यादा उपयोगी हो सकता है।
उम्र बढ़ने के साथ Body Composition बदलती है
उम्र बढ़ने के साथ शरीर की संरचना भी बदलती है। आम तौर पर उम्र बढ़ने पर शरीर में वसा बढ़ सकती है, जबकि मांसपेशियों और हड्डियों का स्तर कम हो सकता है।
इसलिए उम्रदराज लोगों के लिए केवल वजन कम करने के बजाय संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और strength training पर ध्यान देना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका उद्देश्य मांसपेशियों को बनाए रखना और स्वस्थ Body Composition को बढ़ावा देना है।
लक्ष्य होना चाहिए संतुलन
विशेषज्ञों की बात का मुख्य संदेश यह है कि शरीर की वसा को पूरी तरह खत्म करना स्वास्थ्य का लक्ष्य नहीं होना चाहिए। शरीर को ऊर्जा भंडारण, हार्मोनल संकेत, तापमान नियंत्रण और अन्य जैविक प्रक्रियाओं के लिए वसा की आवश्यकता होती है।
वहीं, अत्यधिक वसा—खासकर visceral fat—स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकती है। इसलिए बहुत कम या बहुत ज्यादा के बजाय संतुलित Body Composition पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।
फिटनेस के नाम पर अत्यधिक कैलोरी प्रतिबंध, लगातार वजन घटाने या बेहद कम Body Fat हासिल करने की कोशिश स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल सकती है। स्वस्थ आहार, पर्याप्त पोषण, नियमित व्यायाम और पर्याप्त रिकवरी शरीर को स्वस्थ रखने के अधिक टिकाऊ तरीके हैं।
स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण नोट: Body Fat की जरूरत हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। यदि तेजी से वजन घट रहा है, मासिक धर्म में बदलाव हो रहा है, अत्यधिक थकान महसूस होती है या भोजन को लेकर अत्यधिक प्रतिबंध अपनाए जा रहे हैं, तो डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।
